क्या ब्रेस्ट कैंसर में पूरी ब्रेस्ट हटाना जरूरी है? डॉक्टर से जानें कब संभव है बचाव

फरीदाबाद: ब्रेस्ट कैंसर का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में कीमोथेरेपी और पूरी ब्रेस्ट की सर्जरी का ख्याल आता है. लेकिन अब इलाज के तरीके पहले से बदल रहे हैं. मरीज को कौन-सी दवा दी जाएगी और किस तरह की सर्जरी की जरूरत होगी, यह कैंसर की स्थिति के साथ-साथ उसकी जैविक बनावट पर भी निर्भर करता है. कुछ मरीजों में नई दवाओं की मदद से कीमोथेरेपी से बचना संभव हो सकता है, जबकि कई मामलों में पहले कीमोथेरेपी देकर ट्यूमर का आकार छोटा किया जाता है, जिससे पूरी ब्रेस्ट निकालने की जरूरत नहीं पड़ती. अमृता हॉस्पिटल की ब्रेस्ट ऑन्कोलॉजिस्ट और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. श्वेता राजदान ने लोकल18 से बातचीत में ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली नई दवाओं और जांच की भूमिका के बारे में बताया.
कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी के अलावा भी विकल्प
डॉ. श्वेता राजदान बताती हैं कि आजकल ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी के अलावा टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. इलाज तय करने से पहले यह देखा जाता है कि कैंसर किस तरह का है और उसकी कोशिकाओं में कौन-से विशेष रिसेप्टर मौजूद हैं. एचईआर2 पॉजिटिव ब्रेस्ट कैंसर में टारगेटेड इंजेक्शन दिए जा सकते हैं, जबकि हार्मोन पॉजिटिव कैंसर में टारगेटेड दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा, कुछ ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों को इम्यूनोथेरेपी भी दी जाती है. हालांकि, कौन-सा इलाज सही रहेगा, यह मरीज की रिपोर्ट और बीमारी की स्थिति पर निर्भर करता है.
जांच से तय होता है कौन-सी दवा होगी असरदार
डॉ. राजदान बताती हैं कि पहले ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में ट्यूमर के आकार पर अधिक ध्यान दिया जाता था, लेकिन अब उसकी जैविक बनावट को भी अहमियत दी जाती है. इसके लिए बायोप्सी के बाद हार्मोन रिसेप्टर, एचईआर2 और केआई-67 जैसी जांच की जाती हैं. इनकी मदद से कैंसर की प्रकृति और उसके बढ़ने की गति को समझने में मदद मिलती है. रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं कि मरीज को पहले कीमोथेरेपी दी जाए या सर्जरी की जाए और उसके लिए कौन-सी दवाएं उपयुक्त रहेंगी.
क्या ब्रेस्ट हटाए बिना हो सकता है इलाज
डॉ. श्वेता राजदान बताती हैं कि ब्रेस्ट कैंसर में कई बार पहले कीमोथेरेपी देकर ट्यूमर का आकार छोटा किया जाता है. इसके बाद ऐसी सर्जरी की जा सकती है, जिसमें पूरी ब्रेस्ट निकालने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे मरीज की ब्रेस्ट को बचाना संभव हो सकता है. हालांकि, यह हर मरीज में संभव नहीं होता. इसका फैसला कैंसर के प्रकार, फैलाव और इलाज के प्रति उसकी प्रतिक्रिया को देखकर किया जाता है.
कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती हैं नई दवाएं
डॉ. राजदान बताती है कि कीमोथेरेपी की दवाएं तेजी से बढ़ने वाली कोशिकाओं को प्रभावित करती हैं, जबकि टारगेटेड थेरेपी कैंसर कोशिकाओं में मौजूद खास लक्ष्य पर काम करती है. इससे कैंसर की वृद्धि को रोकने में मदद मिल सकती है. वहीं, इम्यूनोथेरेपी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर से लड़ने में मदद करती है. इन सभी उपचारों का इस्तेमाल मरीज की जरूरत के अनुसार किया जाता है.
भविष्य में कम सर्जरी से इलाज की उम्मीद
डॉ. श्वेता राजदान बताती हैं कि ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में तेजी से बदलाव हो रहे हैं. टारगेटेड थेरेपी और मरीज की जरूरत के अनुसार इलाज तय करने की पद्धति से भविष्य में कुछ मरीजों को कीमोथेरेपी या सर्जरी से बचाने की संभावना बढ़ सकती है. हालांकि, फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में सर्जरी या कीमोथेरेपी की जरूरत पूरी तरह खत्म हो जाएगी. इलाज का फैसला बीमारी की स्थिति और मरीज की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही किया जाता है.



