सिरोही के इस मंदिर में बालस्वरूप में विराजते हैं हनुमानजी, 150 सीढ़ियां चढ़कर होते हैं दर्शन, जानें 5 मंगलवार व्रत की मान्यता

Last Updated:October 16, 2026, 08:10 IST
Sirohi Hanuman Tekri Temple: सिरोही जिले के आबूरोड-पालनपुर नेशनल हाईवे 27 पर स्थित हनुमान टेकरी मंदिर अरावली पहाड़ियों में बसा आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां बालाजी की 4 फीट ऊंची बालस्वरूप प्रतिमा स्थापित है, जहां 150 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचा जाता है. मान्यता है कि लगातार 5 मंगलवार व्रत रखने से मनोकामना पूरी होती है. लगभग 7 दशक पहले महंत कस्तूरनाथ महाराज ने यहां कठिन तपस्या की थी. हनुमान जयंती पर यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें राजस्थान और गुजरात से हजारों भक्त पहुंचते हैं.
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सिरोही: राजस्थान के सिरोही जिले में आबूरोड-पालनपुर नेशनल हाईवे 27 पर खड़ा गांव के पास स्थित हनुमान टेकरी मंदिर क्षेत्र के हजारों भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है. अरावली पर्वतमाला की सुंदर पहाड़ियों के बीच बने इस प्राचीन और दिव्य मंदिर में भगवान हनुमानजी की बाल स्वरूप में लगभग 4 फीट ऊंची आकर्षक प्रतिमा स्थापित है. इस पवित्र स्थान पर बालाजी के दर्शन पाने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 150 सीढ़ियां चढ़कर ऊपर जाना पड़ता है. मंदिर का शांत और मनोरम वातावरण यहां आने वाले हर व्यक्ति के मन से नकारात्मक ऊर्जा को पूरी तरह समाप्त कर देता है.
स्थानीय ग्रामीणों और दूर-दूर से आने वाले भक्तों के बीच इस मंदिर को लेकर एक विशेष धार्मिक मान्यता प्रचलित है. माना जाता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से यहां लगातार 5 मंगलवार तक व्रत रखकर बालाजी महाराज के दर्शन करता है, उसकी हर मनोकामना अवश्य पूरी होती है. मंदिर परिसर में तैयार किया जाने वाला प्रसिद्ध लापसी का प्रसाद श्रद्धालुओं के बीच बहुत लोकप्रिय है, जिसे भक्तगण बड़े श्रद्धा भाव और चाव के साथ ग्रहण करते हैं.
महंत कस्तूरनाथ महाराज की तपस्या और मंदिर का इतिहासमंदिर के व्यवस्थापक प्रेमनाथ महाराज के अनुसार इस धाम के विकास और मुख्य प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा में महंत योगी कस्तूरी नाथ महाराज का अतुलनीय योगदान रहा है. लगभग सात दशक पहले जब महंत कस्तूरनाथ महाराज केवल 14 से 15 वर्ष के थे, तब वे इस बीहड़ और घने जंगल वाले स्थान पर आए थे. उन्होंने पहाड़ी पर स्थित एक प्राकृतिक शिला में हनुमानजी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की. बाद में उन्होंने भारतीय रेलवे में अपनी सेवाएं दीं और सेवामुक्त होने के बाद संन्यासी जीवन अपनाकर अपना पूरा जीवन इसी पहाड़ी पर कठोर तपस्या करते हुए बिताया. वर्तमान बाल स्वरूप प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा भी उन्हीं के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुई थी. आज भी मंदिर परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित है, जहां भक्त नमन करते हैं.
हनुमान जयंती पर लगता है विशाल मेलाहर वर्ष हनुमान जयंती के पावन अवसर पर यहां एक विशाल वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है. इस दौरान पूरे मंदिर प्रांगण को आकर्षक रोशनी और सुंदर फूलों से सजाया जाता है. इस मेले में सिरोही जिले के अलावा पड़ोसी राज्य गुजरात से भी भारी संख्या में श्रद्धालु और साधु-संत दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मेले की पूर्व संध्या और गुरु पूर्णिमा जैसे पर्वों पर भव्य भजन संध्या का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से प्रसिद्ध भजन गायक अपनी प्रस्तुतियां देने आते हैं. मंदिर परिसर में लगे घने पेड़-पौधे भक्तों को एक अलौकिक और आत्मिक शांति का अहसास कराते हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Sirohi,Sirohi,Rajasthan
First Published :
October 16, 2026, 08:10 IST



