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खरपतवार समझने की न करें भूल, सेहत का खजाना है लहचिचरा यानी अपामार्ग, जानिए आयुर्वेद में इसके फायदे और जरूरी सावधानियां

Last Updated:November 01, 2026, 19:48 IST

Apamarga Plant Benefits: रास्तों के किनारे या खेतों की मेड़ों पर अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाने वाला और जिसे हम केवल खरपतवार समझकर उखाड़ फेंकते हैं, वह पौधा असल में औषधीय गुणों की खान हो सकता है. बात हो रही है ‘लहचिचरा’ यानी ‘अपामार्ग’ की, जो पारंपरिक चिकित्सा और आयुर्वेद में सदियों से कई शारीरिक समस्याओं के समाधान के तौर पर पहचाना जाता रहा है. दांतों की देखभाल से लेकर पाचन दुरुस्त करने तक, इस पौधे के हर हिस्से की अपनी उपयोगिता मानी गई है. हालांकि, किसी भी पारंपरिक नुस्खे को अपनाने से पहले इसके वैज्ञानिक आधार और जरूरी सावधानियों को समझना भी उतना ही अनिवार्य है.

Apamarga Plant Benefits: प्रकृति में कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल पुराने समय से आयुर्वेद और घरेलू उपचार में किया जाता रहा है. इन्हीं में से एक है लहचिचरा यानी अपामार्ग का पौधा. यह खेतों, खाली जमीन और रास्तों के किनारे आसानी से देखने को मिल जाता है. आमतौर पर लोग इसे खरपतवार समझकर हटा देते हैं, लेकिन पारंपरिक चिकित्सा में इसका खास महत्व बताया गया है.

पौधे के कई हिस्सों का होता है इस्तेमाललोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र ने बताया कि लहचिचरा के पौधे की जड़, पत्तियों और तने का पारंपरिक रूप से अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जाता है. आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में इसका उपयोग कई तरह की शारीरिक परेशानियों के लिए बताया गया है. हालांकि, इसका इस्तेमाल करने से पहले पौधे की सही पहचान और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है. उन्होंने बताया कि इस पौधे में फूल और फल एक साथ लगते हैं. पुराने समय में इसके बीजों का इस्तेमाल खाने के लिए भी किया जाता था. हालांकि, इसके बीजों को लेकर पाचन और लंबे समय तक पेट भरा रहने जैसे दावों की वैज्ञानिक पुष्टि जरूरी है.

दांतों की सफाई में भी किया जाता है इस्तेमालडॉ. अभिषेक कुमार मिश्र के अनुसार, लहचिचरा का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से दातुन के रूप में भी किया जाता है. लोक मान्यता के अनुसार, इससे दांतों की सफाई करने और मसूड़ों से जुड़ी कुछ परेशानियों में राहत पाने के लिए इसका उपयोग किया जाता रहा है. हालांकि, दांतों में दर्द, मसूड़ों से खून आने या पायरिया जैसी समस्या होने पर दंत चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है.

पारंपरिक चिकित्सा में बताए जाते हैं ये उपयोगवैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र ने बताया कि लहचिचरा का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा में पेट से जुड़ी परेशानियों और गुर्दे की पथरी जैसी समस्याओं के लिए भी बताया जाता है. कुछ जगहों पर इसका उपयोग वजन कम करने के घरेलू उपायों में भी किया जाता है. हालांकि, इन सभी उपयोगों की प्रभावशीलता के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं.

उन्होंने बताया कि पुराने समय में बिच्छू के डंक जैसी समस्याओं में भी इस पौधे की जड़ का इस्तेमाल किया जाता था. लेकिन बिच्छू के डंक पर घरेलू उपचार के भरोसे नहीं रहना चाहिए. ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है.

इस्तेमाल से पहले रखें सावधानीलहचिचरा एक पारंपरिक औषधीय पौधा है, लेकिन इसका सेवन या इस्तेमाल बिना जानकारी के नहीं करना चाहिए. खासकर गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन करने से बचना चाहिए. बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को भी इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए. लहचिचरा के बताए गए कई उपयोग पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं. किसी बीमारी के इलाज के लिए इसे दवा का विकल्प न मानें और बिना चिकित्सकीय सलाह के इसका सेवन न करें.

About the AuthorRahul Goel

Rahul Goel is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at Hindi, managing State and Local18 content operations a…

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Gonda,Uttar Pradesh

First Published :

November 01, 2026, 19:48 IST

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