गरीबी और धर्म की वजह से छूटी मोहब्बत, साहिर लुधियानवी की अनकही दास्तां, कलम के दम पर बने अमर गीतकार

Last Updated:October 25, 2026, 04:06 IST
महान गीतकार साहिर लुधियानवी की 25 अक्टूबर को 46वीं पुण्यतिथि है. संघर्षों से भरे शुरुआती दिनों से लेकर बॉलीवुड में अपनी कलम का लोहा मनवाने वाले साहिर ने ऐसे कालजयी गीत लिखे, जो आज भी लोगों के दिलों में उतर जाते हैं. अमृता प्रीतम से अधूरे प्यार की टीस हो या गीतकारों को रॉयल्टी दिलाने की ऐतिहासिक लड़ाई, साहिर लुधियानवी का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा.
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साहिर लुधियानवी ने बॉलीवुड को दिए अमर गीत. (फोटो: Instagram@brown_verses)
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के महान गीतकार साहिर लुधियानवी ने अपने संजीदा गीतों से हिंदी सिनेमा को एक नया मुकाम देने के लिए जाने जाते हैं. भले ही वह इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनके लिखे गीत आज भी लोगों के दिलों पर राज करते हैं. साहिर लुधियानवी का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन फिल्म दुनिया में आते ही अपनी कलम की ताकत से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया था. गरीबी से लड़कर और अधूरी मोहब्बत के बाद उन्होंने कलम के दम पर जबरदस्त सफलता हासिस की थी. 25 अक्टूबर को गीतकार साहिर लुधियानवी की 46वीं पुण्यतिथि है. इस खास मौके पर आइए जानते हैं उनके फिल्मी सफर और अनछुए पहलुओं के बारे में.
साहिर लुधियानवी का जन्म 8 मार्च 1921 को भारत के पंजाब के लुधियाना में हुआ था. उनका असली नाम अब्दुल हयी था. साहिर एक समृद्ध परिवार से आते थे, लेकिन माता-पिता के अलग होने के बाद उन्हें कई प्रकार की चुनौती और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा. साहिर ने अपनी शुरुआती शिक्षा लुधियाना से पूरी की. इसके बाद वह एक सरकारी विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करने लगे.
गबीरी की वजह से अधूरी रह गई मोहब्बत
साहिर को शुरू के दिनों से ही लिखने में काफी रुचि थी. वह कॉलेज में अपनी शायरी के लिए काफी मशहूर थे. इस दौरान उनको यूनिवर्सिटी की एक लड़की अमृता से प्यार हो गया, जो इनकी सबसे बड़ी फैन थी, लेकिन गरीबी और मुस्लिम होने के कारण अमृता के परिवारवालों ने इस रिश्ते से साफ तौर पर इनकार कर दिया और उनके पिता के कहने पर उन्हें कॉलेज से भी निकाल दिया गया.
साहिर लुधियानवी को करनी पड़ी छोटी-मोटी नौकरियां
कॉलेज से निकाले जाने के बाद साहिर को जीविका के लिए कई प्रकार की छोटी-मोटी नौकरियां करने पड़ी. इसके बाद 1943 में वह पाकिस्तान के लाहौर चले गए, जहां उन्होंने अपनी पहली संग्रह कविता ‘तल्खियां’ छपवाई. इसके बाद 1949 में वह मुंबई आ गए, जहां उन्होंने फिल्म ‘आजादी की राह पर’ में अपनी पहली गीत लिखा, लेकिन उन्हें असल प्रसिद्धि फिल्म ‘नौजवान’ के लिए लिखे गई गीत से मिली.
इन फिल्मों के लिए साहिर लुधियानवी ने लिखे गीत
साहिर ने ‘प्यासा’, ‘बाजी’, ‘जाल’, ‘हमराज’, ‘त्रिशूल’, ‘इंसाफ’ का तराजू ‘कभी कभी’, ‘ताजमहल’, ‘नौजवान’, ‘प्यार की प्यास’ जैसी फिल्मों के लिए गीत लिखे. साहिर हिंदी फिल्म जगत के पहले ऐसे गीतकार थे, जिन्होंने गानों की बिक्री पर गीतकारों को रॉयल्टी दिलाने के लिए ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी और उसमें जीत भी हासिल की.
पद्मश्री से सम्मानित हुए थे साहिर लुधियानवी
फिल्मों के लिए बेहतरीन गाने लिखने के लिए साहिर लुधियानवी को बेस्ट गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला. इसके अलावा उन्हें कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया. साहिर लुधियानवी की रचनाओं की एक खास बात यह थी कि उनकी कविताओं और गीतों में आम आदमी का दर्द, सामाजिक असमानता और गहरे रोमांस का भाव झलकता था. साहिर लुधियानवी का निधन 59 साल की उम्र में 25 अक्टूबर 1980 को दिल का दौरा पड़ने से हुई थी.
About the AuthorKamta PrasadSenior Sub Editor
कामता प्रसाद (KP) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 सालों का लंबा अनुभव है. वर्तमान में वह न्यूज18 हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कामता को एंटरटेनमेंट …
October 25, 2026, 04:06 IST



