गुस्साया साथी स्टूडेंट बोला ‘क्यों हम आगे आकर साथ नहीं खड़े हो सकते?’

Last Updated:September 24, 2026, 16:02 IST
Jodhpur Dr. Rajnaresh Yadav Death Case: जोधपुर एम्स में रेजिडेंट डॉक्टर राजनरेश यादव की आत्महत्या के बाद विरोध तेज होता जा रहा है. घटना के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध और हड़ताल शुरू की, वहीं अब यूथ भी न्याय की मांग को लेकर सामने आया है. बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन कर मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई. प्रदर्शन के दौरान एक रेजिडेंट डॉक्टर भावुक नजर आए और संस्थान में एकजुटता को लेकर सवाल उठाए.
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जोधपुर एम्स में रेजिडेंट डॉक्टर राजनरेश यादव की आत्महत्या
जोधपुर: जोधपुर एम्स में रेजिडेंट डॉक्टर राजनरेश यादव की आत्महत्या के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. घटना के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध और हड़ताल का रास्ता अपनाया है. वहीं अब राजनरेश यादव को न्याय दिलाने की मांग को लेकर यूथ भी सामने आया है. इसी कड़ी में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और डॉक्टर राजनरेश की मौत के मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई. प्रदर्शन के दौरान एक रेजिडेंट डॉक्टर भावुक नजर आए. उन्होंने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि आखिर ऐसी घटनाओं के बाद एक्शन क्यों नहीं लिया जा रहा है और संस्थान के बच्चे, टीचर्स और फैकल्टी मेंबर्स एक-दूसरे के साथ खड़े क्यों नहीं हो सकते.
सोशल मीडिया पर वीडियो ने. रेडिडेंट डॉक्टर कहता है क्यों यहां पर एक्शन नहीं लिया जा रहा है? क्यों यहां के बच्चे, यहां के टीचर्स, यहां के फैकल्टी मेंबर्स क्यों? क्यों हम आगे आके साथ नहीं खड़े हो सकते? अपने बच्चों के, अपने फैकल्टी मेंबर्स के… वह 36 घंटे की ड्यूटी का जिक्र करते हुए कहता है कि सबके साथ कलेक्टिवली हमें परेशान किया जा रहा है भाई…. इसके बाद उसकी आवाज में एक अलग ही पीड़ा महसूस होती है. हाथ जोड़कर वह सभी से साथ आने की अपील करता हुआ नजर आ रहा है. हाथ जोड़के निवेदन है, सभी से, चाहे छोटे हों चाहे बड़े हों, सब साथ आइए, कुछ ऐसा कीजिए जो देश में बदलाव लाए. सिर्फ इसी देश में नहीं, दुनिया में. हम सब एक हैं, हम सब डॉक्टर हैं, हमारे बच्चे डॉक्टर बनेंगे.
‘हाथ कांप रहा है मेरा हम सब डरे हुए हैं’वीडियो में सबसे ज्यादा झकझोर देने वाली बात तब सामने आती है, जब वह अपने डर को स्वीकार करता है. वह कहता है- हाथ कांप रहा है मेरा, मुक्ति मांगने जाओ तो मुंह से नहीं निकलता है कुछ! डरते हैं, हम सब डरते हैं.” वह कहता है कि हर कोई किसी न किसी चीज से बंधा हुआ है, इसलिए खुलकर बोल नहीं पाता. राजनरेश की मौत के मामले में किसी को दोषी ठहराने के बजाय वह कहता है कि “किसी को तो आगे आकर साथ देना चाहिए था.” फिर खुद को भी इस चुप्पी का हिस्सा बताते हुए कहता है- “मुझे भी पता लग गया था, मैं भी नहीं आया था, मैं भी गुनहगार हूं! क्योंकि नॉर्मलाइज कर दिया गया है, मेरे मन में भी वो चीज नॉर्मलाइज हो गई है.” अंत में उसकी बात एक सवाल बनकर रह जाती है- डरे हुए हैं. हम सब इसके अलावा हम क्या कर सकते हैं? हम कहां हैं, हम क्या कर रहे हैं?
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Jodhpur,Rajasthan
First Published :
September 24, 2026, 16:02 IST



