गोविंद सिंह डोटासरा, टीकाराम जूली और सुप्रिया श्रीनेत; राजस्थान में क्या करने जा रही कांग्रेस?

जयपुर. 9 सितंबर को जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में होने वाला Gen Z For Change कार्यक्रम पहली नजर में छात्रों के लिए एक कार्यक्रम लगता है. AI ट्रेनिंग होगी, करियर काउंसलिंग होगी, लीगल सपोर्ट की जानकारी दी जाएगी और IITians, डॉक्टर्स, वकील और Gen Z एक्सपर्ट्स छात्रों से बात करेंगे. लेकिन राजनीति में सिर्फ कार्यक्रम की सूची नहीं देखी जाती, उसके पीछे का समय और चेहरे भी देखे जाते हैं.
कांग्रेस ने यह कार्यक्रम ऐसे समय रखा है, जब राजस्थान में निकाय चुनाव का माहौल है और पार्टी पहले ही GenZ for Change अभियान शुरू कर चुकी है. कांग्रेस ने इसे युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश के तौर पर शुरू किया है. पार्टी की योजना जिला और विधानसभा स्तर पर Gen Z कमेटियां बनाने और छात्रों के मुद्दों को सीधे पार्टी नेतृत्व तक ले जाने की भी है. अब सवाल यही है कि आखिर कांग्रेस जयपुर से क्या संदेश देना चाहती है?
युवाओं की बात सुनकर अब वोट की बात?राजस्थान की राजनीति में युवाओं और छात्रों की नाराजगी कोई नई बात नहीं है. पिछले दिनों जयपुर में छात्र संगठनों ने छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर विधानसभा की ओर मार्च किया था. प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग की और कई छात्रों को हिरासत में भी लिया था. छात्रों की यह आवाज सीधे राजनीतिक दलों के लिए भी एक संदेश है कि युवा सिर्फ सोशल मीडिया पर दिखने वाला वोट बैंक नहीं है, उसके अपने मुद्दे भी हैं. ऐसे माहौल के बीच कांग्रेस का Gen Z अभियान सामने आता है. पार्टी अब छात्रों से AI, रोजगार, स्किल, करियर, कानून और स्थानीय समस्याओं पर बात करने जा रही है. यह बदलाव छोटा नहीं है. पारंपरिक राजनीतिक भाषणों से अलग कांग्रेस युवाओं के रोजमर्रा के सवालों के आसपास अपनी बात रखने की कोशिश कर रही है. और शायद यही इस पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी कहानी है.
इतने बड़े चेहरे एक मंच पर क्यों?9 सितंबर के कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा रहेंगे. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी पहुंचेंगे. AICC सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स विभाग की चेयरमैन सुप्रिया श्रीनेत मौजूद रहेंगी. भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब भी कार्यक्रम में शामिल होंगे. जयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा और प्रदेश प्रभारी सौरभ राय की मौजूदगी भी रहेगी. यानी इसे केवल छात्रों का छोटा कार्यक्रम मानना मुश्किल है. पार्टी के प्रदेश नेतृत्व से लेकर राष्ट्रीय स्तर के सोशल मीडिया और युवा संगठन के चेहरे तक यहां मौजूद होंगे. यहां से कांग्रेस शायद दो काम एक साथ करना चाहती है. पहला, छात्रों और युवा मतदाताओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाना. दूसरा, यह दिखाना कि पार्टी सिर्फ चुनाव के समय युवाओं के पास नहीं जा रही, बल्कि उनके करियर और रोजमर्रा के सवालों पर भी बात करना चाहती है.
Gen Z को टारगेट करना कितना बड़ा दांव?निकाय चुनाव में युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाता किसी भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हैं. कांग्रेस ने जयपुर में 30 साल से कम उम्र के 30 उम्मीदवार भी मैदान में उतारे हैं. ऐसे में Gen Z अभियान और युवा उम्मीदवारों को अलग-अलग फैसले मानना मुश्किल है. दोनों को एक ही बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है. यानी कांग्रेस सिर्फ युवाओं से वोट मांगने की तैयारी नहीं कर रही, बल्कि उन्हें पार्टी के आसपास लाने की कोशिश भी कर रही है. Gen Z कमेटियों की बात इसी ओर इशारा करती है. पार्टी ने साफ तौर पर कहा है कि अभियान सिर्फ चुनावी भीड़ जुटाने तक सीमित नहीं रहेगा और युवाओं के मुद्दों को आगे ले जाने की कोशिश होगी.
सचिन पायलट का नाम भी क्यों चर्चा में?इसी बीच कांग्रेस ने सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी बनाकर एक और बड़ा संकेत दिया है. 5 सितंबर को कांग्रेस ने भूपेश बघेल की जगह पायलट को पंजाब का AICC प्रभारी बनाया. पंजाब में पार्टी के सामने 2027 का विधानसभा चुनाव है और संगठन के भीतर चल रही खींचतान के बीच पायलट को जिम्मेदारी दी गई है. अब राजस्थान की राजनीति में इसकी चर्चा होना स्वाभाविक है. पायलट लंबे समय से कांग्रेस के युवा चेहरे के तौर पर देखे जाते रहे हैं. ऐसे में एक तरफ राजस्थान कांग्रेस Gen Z के साथ सीधा संवाद शुरू करती है और दूसरी तरफ पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व पायलट जैसे अपेक्षाकृत युवा नेता को पंजाब जैसी अहम जिम्मेदारी देता है, तो दोनों घटनाओं को एक बड़े युवा फोकस के संदर्भ में देखना गलत नहीं होगा. हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि कांग्रेस की पूरी राष्ट्रीय रणनीति अब सिर्फ युवाओं के इर्द-गिर्द घूमने वाली है. लेकिन संकेत जरूर मिल रहे हैं.
जयपुर में असली परीक्षा कार्यक्रम के बाद होगी9 सितंबर का कार्यक्रम खत्म होने के बाद असली सवाल शुरू होगा. क्या छात्र सिर्फ कार्यक्रम में आएंगे और फिर वापस चले जाएंगे, या कांग्रेस उनके साथ लगातार संपर्क बनाए रखेगी? क्या AI ट्रेनिंग, करियर काउंसलिंग और लीगल सपोर्ट जैसे मुद्दे जमीन पर भी पहुंचेंगे? क्या Gen Z कमेटियां सिर्फ चुनाव तक रहेंगी या आगे भी काम करेंगी?
यही इस पूरी कवायद की असली परीक्षा होगीक्योंकि युवा अब सिर्फ यह नहीं पूछता कि कौन सी पार्टी सत्ता में आएगी. वह पूछता है कि नौकरी कहां है, परीक्षा समय पर क्यों नहीं होती, पढ़ाई के बाद रास्ता क्या है, AI के दौर में करियर कैसे बचेगा और उसकी आवाज कौन सुनेगा. कांग्रेस ने शायद इसी बदलते सवाल को पकड़ने की कोशिश की है.



