चंदा जुटाकर सड़क बनवा रहे थे ग्रामीण, तभी 11 हजार वोल्ट की लाइन ने उजाड़ दिए 8 परिवार, खुशियां मातम में बदलीं

झुंझुनूं: धार्मिक स्थल तक पहुंचने के लिए ग्रामीण आपसी सहयोग से सड़क बनवा रहे थे. किसी ने चंदा दिया तो किसी ने श्रमदान कर विकास की इस पहल में भागीदारी निभाई. लेकिन सोमवार सुबह सड़क निर्माण के दौरान एक ऐसी घटना हुई, जिसने आठ परिवारों की खुशियां छीन लीं. झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी क्षेत्र के छापोली गांव में सीमेंट मिक्सर मशीन का लोहे का पाइप ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन से टकरा गया. मशीन में करंट फैलते ही वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए. हादसे में 8 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 5 अन्य झुलस गए. एक साथ आठ लोगों की मौत से पूरे इलाके में मातम पसर गया.
हादसा सोमवार सुबह छापोली के कुंड के पास हुआ. जानकारी के अनुसार छापोली से धार्मिक स्थल कदमकुंड तक सड़क निर्माण का काम चल रहा था. बताया जा रहा है कि सड़क वन विभाग की भूमि पर बनाई जा रही थी. वन विभाग की जमीन होने के कारण निर्माण की अनुमति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीण आपसी सहयोग से चंदा जुटाकर सड़क का निर्माण करवा रहे थे. इसी दौरान सीमेंट मिक्सर मशीन खिसकने लगी. मशीन को संभालने के प्रयास में ग्रामीणों ने उसे पकड़ने की कोशिश की. इसी बीच मशीन के ऊपर लगा लोहे का पाइप 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन से टकरा गया. देखते ही देखते मशीन में करंट प्रवाहित हो गया और आसपास काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए.
एक साथ आठ मौतों से गांव में मचा कोहरामहादसे में मंडावरा, छापोली और उदयपुरवाटी क्षेत्र के आठ लोगों की जान चली गई. मृतकों में मंडावरा निवासी हरिराम गुर्जर (30), मंगलचंद गुर्जर (22), कालूराम गुर्जर (29) और पवन गुर्जर (23) शामिल हैं. वहीं छापोली निवासी सुरेंद्र उर्फ सुरेश सैनी (30), मुकेश सैनी (27) और नितेश (30) की भी मौत हो गई. उदयपुरवाटी निवासी विष्णु सैनी (38) ने भी हादसे में दम तोड़ दिया. हादसे में पांच अन्य मजदूर भी झुलस गए. इनमें छापोली निवासी गीता (45), संतरा (35), मंजू (38), महेंद्र सैनी (27) और गीगाराम सैनी (48) शामिल हैं. सभी घायलों को उदयपुरवाटी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां उनका उपचार जारी है.
घटनास्थल पर शवों के साथ बैठे रहे ग्रामीण, कई दौर की वार्ताहादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई. आठ लोगों की मौत की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए. ग्रामीण शवों के साथ घटनास्थल पर ही बैठ गए और प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं. ग्रामीणों का कहना था कि मृतकों के परिवारों को उचित आर्थिक सहायता और आश्रितों को नौकरी दी जाए. इसके बाद ग्रामीणों और प्रशासन के बीच कई दौर की बातचीत हुई.
मंत्री झाबर सिंह खर्रा पहुंचे मौके पर, 15-15 लाख और नौकरी का आश्वासनहादसे की सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग और पुलिस अधीक्षक कावेंद्र सिंह सागर मौके पर पहुंचे. पूर्व विधायक राजेंद्र गुड़ा भी घटनास्थल पर पहुंचे. बाद में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भी मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की और हादसे की जानकारी ली. वार्ता के दौरान विधायक भगवानाराम सैनी, पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी और पूर्व विधायक राजेंद्र गुड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने मृतकों के परिजनों को 15-15 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और संविदा पर नौकरी देने का आश्वासन दिया. साथ ही पूरे मामले की जांच करवाने के निर्देश दिए. मंत्री के आश्वासन के बाद ग्रामीण पोस्टमार्टम करवाने के लिए राजी हुए.
हादसे ने खड़े किए कई सवाल, निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था की होगी जांचइस दर्दनाक हादसे ने सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस स्थान पर निर्माण कार्य चल रहा था, वहां से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही थी. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिजली लाइन के इतने नजदीक मशीन से काम करवाते समय सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? मशीन के संचालन और बिजली लाइन से सुरक्षित दूरी बनाए रखने को लेकर क्या सावधानियां बरती गई थीं? इसके अलावा वन विभाग की भूमि पर सड़क निर्माण की अनुमति और संबंधित जिम्मेदारियों की भी जांच जरूरी है. प्रशासन ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं. जांच में हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार पक्षों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है.
एक सड़क की उम्मीद, आठ परिवारों के जीवन में अंधेराछापोली से कदमकुंड तक सड़क बनाने का सपना ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से देखा था. इस काम में गांव के लोगों की मेहनत और आर्थिक सहयोग जुड़ा था. लेकिन एक दर्दनाक हादसे ने इस पहल को मातम में बदल दिया. जिन परिवारों के सदस्य सुबह घर से काम पर निकले थे, वे अब कभी वापस नहीं लौटेंगे. किसी ने बेटा खोया तो किसी ने पति और किसी परिवार ने अपना कमाने वाला सदस्य. छापोली और आसपास के गांवों में शोक का माहौल है. अब ग्रामीणों को सरकार के आश्वासन के पूरा होने और हादसे की निष्पक्ष जांच का इंतजार है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस हादसे के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी और जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया है, उन्हें न्याय कब मिलेगा?



