जयपुर में अहंकार के साथ खड़े रावण के पुतले, छोटे से लेकर बड़े रावण तक; जानें कितनी है कीमत

Last Updated:October 14, 2026, 14:02 IST
Jaipur Ravan Effigy Market: जयपुर में परकोटे से लेकर जयपुर के बाहरी इलाकों में सड़कों पर रावण की मंडियां सजी हैं, जहां इस बार कारीगर इको-फ्रेंडली आतिशबाजी और वाटरप्रूफिंग रावण तैयार कर रहे हैं.दशहरे पर्व पर हर साल जयपुर में सार्वजनिक आयोजनों के साथ-साथ कॉलोनियों और हाउसिंग सोसायटियों में रावण दहन किया जाता हैं जिसके चलते रावण के पुतलों की जमकर डिमांड रहती हैं.
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जयपुर: नवरात्रि का पर्व चल रहा हैं और दशहरा की जयपुर में रौनक शुरू हो गई हैं. सड़कों पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले आकार लेने लगे हैं जयपुर के अलग-अलग इलाकों में रावण मंडियां से गई हैं जहां दिन रात कारीगर कारीगर बांस की खपच्चियों और रंग-बिरंगे कागजों से रावण बनाने में जुटे हैं. जयपुर में परकोटे से लेकर जयपुर के बाहरी इलाकों में सड़कों पर रावण की मंडियां सजी हैं जहां इस बार कारीगर इको-फ्रेंडली आतिशबाजी और वाटरप्रूफिंग रावण तैयार कर रहे हैं. दशहरे पर्व पर हर साल जयपुर में सार्वजनिक आयोजनों के साथ-साथ कॉलोनियों और हाउसिंग सोसायटियों में रावण दहन किया जाता हैं जिसके चलते रावण के पुतलों की जमकर डिमांड रहती हैं. इसलिए दशहरे महिने पहले की कारीगर रावण के पुतले बनाने में जुट जाते हैं.
लोकल-18 ने जयपुर के आगरा रोड़ पर पहुंच कर यहां रावण तैयार करने वाले कारीगरों से बात की तो वह मंजू देवी बताती है कि वह जोधपुर की रहने वाली हैं और हर साल दशहरे पर जयपुर में रावण के पुतले बनाती हैं कि हर साल की तरह इस साल भी रावण के पुतलों की खूब डिमांड हैं इसलिए वह लगातार अपने परिवार के साथ महिने भर से पुतले बनाने के काम में जुटी हुई हैं.
जयपुर की सड़कों पर तैयार हैं में 10 हजार रावण के पुतलेलोकल-18 ने जयपुर के अलग-अलग इलाकों में पहुंच कर यहां रावण मंडियां देखी जहां हजारों की संख्या में छोटे से लेकर बड़े साइज के पुतले बनकर तैयार हो चुके हैं कारीगरों का कहना हैं हर साल जयपुर में सजा हजारों रावणों के पुतलों की ब्रिकी होती हैं ऐसे ही इस साल भी जयपुर में तकरिबन 8 से 10 हजार पुतले बिकने का अनुमान है, जिनमें 70 प्रतिशत मांग कॉलोनियों की है. जयपुर में सबसे अधिक रावण की मंडियां मानसरोवर, टोंक रोड, न्यू सांगानेर रोड, इस्कॉन मंदिर रोड, अरावली मार्ग, गोपालपुरा बाईपास और गांधी नगर मोड़, जगतपुरा के पास सड़क किनारे स्थानीय व बाहरी कारीगरों ने अपनी अस्थायी स्टॉल्स सजाई हैं सड़कों के किनारे कारीगरों द्वारा तैयार 10 से 35 फीट तक के पुतले तैयार खड़े हैं.
मंजू देवी का कहना हैं कि पिछले वर्ष दशहरे पर बारिश के चलते पुतले ख़राब हो गए थे जिसकी वज़ह से कारीगरों को काफी नुकसान हुआ था. लेकिन इस बार बारिश का ख़तरा नहीं हैं मंजू देवी का कहना हैं अगर उनके द्वारा बनाए गए पुतले बिक जाते हैं ठीक नहीं तो आखिर में न बिके पुतलों से नुकसान हर साल झेलना पड़ता हैं क्योंकि पुतले बनाने के लिए बांस, कपड़ा, कागज और अन्य सामग्री अब पहले से बाजारों में महंगी हो गई हैं.
500 रूपए से लेकर 50 हजार तक हैं रावण के पुतलों की कीमतलोकल-18 से बात करते हुए कारीगरों का कहना हैं लगातार बाजारों में पुतले बनाने की सामग्री बांस, सुतली, मैदा और चमकीले कागज महंगी होने के चलते पुतलों के दाम भी बढ़ गए हैं. जैसे बाजार में बच्चों के लिए 5 फीट का पुतला 500 से 800 रुपए, 20 से 35 फीट का पुतला 12 से 30 हजार रुपए और 50 फीट का ढ़ांचे का पुतले की कीमत करीब 50 हजार रुपए में तक हैं. साथ ही पिछले साल बारिश से सबक लेते हुए कारीगरों ने इस बात पुतलों में खासतौर पर अंदरूनी ढांचे पर प्लास्टिक और वाटरप्रूफ शीट चढ़ा रहे हैं, ताकि बारिश होने पर पुतले खराब न हों. अगर रावण के इन पुतलों को तैयार करने की बात करें तो इन्हें बास की लकड़ी, मेदा, कागज़, पॉलीथिन और कपड़े के उपयोग से खाली खोखे के रूप में तैयार किया जाता हैं जिसमें कारीगरों को लगातार काम करना पड़ता हैं तब जाकर दशहरे के लिए पुतलों की डिमांड पूरी हो पाती हैं.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Jaipur,Rajasthan
First Published :
October 14, 2026, 14:02 IST



