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जहां औरंगजेब ने भी टेके थे घुटने, जानिए जीण माता मंदिर की चमत्कारी कहानी,नवरात्र में उमड़ते हैं लाखों श्रद्धालु

Last Updated:October 11, 2026, 19:49 IST

Jeen Mata Temple Sikar: सीकर का जीण माता मंदिर अपनी प्राचीन मान्यताओं और अनोखी लोककथाओं के लिए प्रसिद्ध है. मान्यता है कि यहां मुगल बादशाह औरंगजेब ने अखंड ज्योत जलाई थी. नवरात्र के नौ दिनों में लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं, जानिए जीण माता की तपस्या, भाई हर्ष भैरव नाथ और मंदिर से जुड़ी दिलचस्प कहानी.Amazon Prime DayTop Deals Insideनवरात्र में क्यों उमड़ते हैं लाखों श्रद्धालु? जानिए जीण माता मंदिर का इतिहासZoom

सीकर. शारदीय नवरात्र शुरू होते ही देशभर के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है. राजस्थान के सीकर जिले में स्थित जीण माता सिद्ध पीठ में नवरात्र का विशेष महत्व है. अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित यह प्राचीन मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और ऐतिहासिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है. नवरात्र के पूरे नौ दिन यहां माता के दरबार में मेला भरता है, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं. इस मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता मुगल बादशाह औरंगजेब और अखंड ज्योत की है.

जीण माता का मंदिर सीकर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर जीणमाता गांव में स्थित है. मंदिर को हजारों साल पुराना बताया जाता है, हालांकि इसके मूल निर्माण से जुड़े प्रमाणिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं. मान्यता है कि करीब 300 साल पहले मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था, जिसके दस्तावेज मौजूद बताए जाते हैं. जीण माता को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है.  शेखावाटी क्षेत्र की कई जातियों में उन्हें कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है. राजस्थान के अलावा दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, मंदिर में बच्चों के जड़ूले कराने की भी परंपरा है.

भाई हर्ष से विवाद के बाद शुरू हुई तपस्या

जीण माता के जन्म और उनके तपस्या करने से जुड़ी एक रोचक लोककथा प्रचलित है. मान्यता के अनुसार, जीण माता का जन्म चौहान वंश के राजपूत परिवार में हुआ था. वह अपने भाई हर्ष से बहुत स्नेह करती थी, एक दिन वह अपनी भाभी के साथ तालाब से पानी लेने गई वहां दोनों के बीच इस बात को लेकर विवाद हो गया कि हर्ष किससे अधिक स्नेह करता है. कहानी के अनुसार, दोनों ने तय किया कि हर्ष जिसके सिर से पानी का मटका पहले उतारेगा, वही उसे अधिक प्रिय होगा. घर पहुंचने पर हर्ष ने पहले अपनी पत्नी के सिर से मटका उतारा. इससे नाराज होकर जीण माता अरावली के काजल शिखर पर चली गई और तपस्या करने लगी. बाद में हर्ष को इस विवाद का पता चला तो वह अपनी बहन को मनाने पहाड़ी पर पहुंचा, लेकिन जीण माता ने घर लौटने से इनकार कर दिया. इसके बाद हर्ष भी वहीं भैरव की तपस्या करने लगा. आज भी जीण माता मंदिर से कुछ दूरी पर पहाड़ी की चोटी पर हर्ष भैरव नाथ का मंदिर स्थित है.

औरंगजेब से जुड़ी है अखंड ज्योत की मान्यता

जीण माता मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित कथा मुगल बादशाह औरंगजेब की है, स्थानीय मान्यता के अनुसार, औरंगजेब मंदिरों को तोड़ते हुए इस क्षेत्र में पहुंचा था. कहा जाता है कि उसने पहले हर्षनाथ भैरव मंदिर में तोड़फोड़ करवाई और फिर जीण माता मंदिर की ओर बढ़ा. किंवदंती के मुताबिक, जब मुगल सेना मंदिर को नुकसान पहुंचाने के लिए आगे बढ़ी तो स्थानीय लोगों ने माता से रक्षा की प्रार्थना की. इसके बाद मधुमक्खियों के झुंड ने सेना पर हमला कर दिया. मधुमक्खियों के काटने से सैनिकों को पीछे हटना पड़ा। कथा में यह भी बताया जाता है कि इस घटना के बाद औरंगजेब ने मंदिर में अखंड ज्योत जलवाई.

मान्यता के अनुसार, इसके बाद दिल्ली दरबार से ज्योत के लिए तेल भेजा जाता था. बाद में यह व्यवस्था जयपुर के राजघराने से जुड़ गई. कहा जाता है कि जयपुर के महाराजा ने तेल भेजने की व्यवस्था मासिक के बजाय साल में दो बार, नवरात्र के अवसर पर कर दी थी. आज भी जीण माता मंदिर में अखंड ज्योत की परंपरा श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है. नवरात्र के दौरान यहां दर्शन, पूजा और मेले के लिए भक्तों की भारी भीड़ पहुंचती है.

About the Authorमोनाली पाल

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…

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Sikar,Rajasthan

First Published :

October 11, 2026, 19:47 IST

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