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जोधपुर MDM अस्पताल में ‘तीसरी आंख’ का पहरा, 450 कैमरे 24 घंटे रख रहे निगरानी, चोरी और संदिग्धों पर कसा शिकंजा

Last Updated:August 29, 2026, 10:14 IST

Jodhpur MDM Hospital News: जोधपुर के सबसे बड़े MDM अस्पताल में सुरक्षा और निगरानी के लिए 450 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. कंट्रोल रूम से अस्पताल अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित खुद इसकी समीक्षा करते हैं. इन कैमरों की मदद से बाइक/मोबाइल चोरी जैसी घटनाओं के खुलासे, भटके परिजनों की तलाश और कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है.

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Jodhpur: जोधपुर संभाग के सबसे बड़े और प्रमुख मथुरादास माथुर (MDM) अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को अब पूरी तरह हाइटेक और आधुनिक तकनीक से लैस कर दिया गया है. पूरे अस्पताल परिसर में स्थापित करीब 450 सीसीटीवी कैमरे अब केवल साधारण सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा मात्र नहीं रह गए हैं, बल्कि किसी भी अप्रिय घटना, अपराध की पड़ताल और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाने में सबसे अहम कड़ी साबित हो रहे हैं.

चाहे अस्पताल परिसर से बाइक या मोबाइल चोरी का मामला हो, कोई संदिग्ध गतिविधि हो या फिर विशाल अस्पताल परिसर में किसी मरीज के परिजन या बच्चे भटक जाएं—हर विषम परिस्थिति में ‘तीसरी आंख’ यानी ये सीसीटीवी कैमरे बेहद मददगार साबित हो रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में हुई कई चोरी की वारदातों और घटनाओं के खुलासे में इन सीसीटीवी फुटेज ने पुलिस और अस्पताल प्रशासन को सटीक और अहम सुराग दिए हैं.

MDM अस्पताल परिसर के हर छोटे-बड़े और संवेदनशील हिस्से को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में लाया गया है.

प्रमुख स्थानों पर कवरेज: अस्पताल के मुख्य प्रवेश (Entrance) और निकास (Exit) द्वारों, इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी (OPD) ब्लॉक, ट्रामा सेंटर, पार्किंग एरिया और मरीजों की आवाजाही वाले सभी प्रमुख गलियारों में कैमरे लगाए गए हैं.
जांच में साक्ष्य: कैमरों की 24 घंटे चलने वाली रिकॉर्डिंग को आवश्यकता पड़ने पर किसी भी दुर्घटना, विवाद या संदिग्ध घटना की बारीकी से जांच करने के लिए डिजिटल साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

बाइक और मोबाइल चोरी रोकने में मददगार साबित हो रही तकनीकजोधपुर संभाग का बड़ा चिकित्सा केंद्र होने के कारण एमडीएम अस्पताल में प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज और उनके तीमारदार इलाज के लिए पहुंचते हैं. इतनी भारी भीड़ का फायदा उठाकर कई बार शातिर चोर और जेबकतरे अस्पताल परिसर में मोबाइल, पर्स और पार्किंग में खड़े वाहनों को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं. ऐसी स्थिति में सीसीटीवी कैमरों की यह निरंतर निगरानी संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाने में सहायक सिद्ध हो रही है. किसी भी चोरी की वारदात के घटित होने पर सुरक्षा टीम फुटेज खंगालकर संदिग्ध व्यक्ति के हुलिए की पहचान करती है और उसके आने-जाने के सटीक रास्ते (Route) का पता लगाकर पुलिस को त्वरित कार्रवाई करने में मदद पहुंचाती है.

विशाल परिसर में बिछड़े परिजनों की तलाश हुई आसानएमडीएम अस्पताल का क्षेत्रफल काफी बड़ा है, जिससे अक्सर दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीज के साथ आए बुजुर्ग, छोटे बच्चे या परिजन हड़बड़ी में एक-दूसरे से बिछड़ जाते हैं या रास्ता भटक जाते हैं. ऐसे समय में कंट्रोल रूम से कैमरों की रिकॉर्डिंग देखकर भटके हुए लोगों की अंतिम लोकेशन और आवाजाही की दिशा का तुरंत पता लगा लिया जाता है. अस्पताल प्रशासन के लिए यह व्यवस्था बिछड़े परिजनों को जल्द से जल्द उनके अपनों से मिलाने का एक बहुत ही संवेदनशील और महत्वपूर्ण जरिया बन चुकी है.

केंद्रीय कंट्रोल रूम से लगातार मॉनिटरिंग और प्रशासनिक समीक्षाअस्पताल में स्थापित सभी 450 कैमरों को एक केंद्रीय कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है, जहां सुरक्षाकर्मियों की टीम अलग-अलग स्क्रीन पर पूरे परिसर की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखती है.

अधीक्षक की सीधी नजर: अस्पताल अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित खुद कंट्रोल रूम पहुंचकर सीसीटीवी मॉनिटरिंग व्यवस्था और रिकॉर्डिंग तंत्र की लगातार समीक्षा करते हैं.
कर्मचारियों का अनुशासन: इस हाइटेक निगरानी व्यवस्था का एक बड़ा लाभ यह भी हुआ है कि डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, वार्ड बॉय और अन्य सफाई कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति और ऑन-ड्यूटी व्यवस्था को बेहतर बनाने में प्रशासनिक मदद मिल रही है.

पुलिस जांच में मील का पत्थर बन रही ‘तीसरी आंख’अस्पताल परिसर में होने वाले किसी भी कानून-व्यवस्था से जुड़े मामले, संदिग्ध वस्तु मिलने या आपराधिक घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और स्थानीय पुलिस के लिए सीसीटीवी फुटेज सबसे ठोस सबूत बनकर उभर रहे हैं. घटनास्थल से लेकर संदिग्धों के प्रवेश और निकास तक की पूरी समयरेखा (Timeline) इन फुटेज के जरिए आसानी से तैयार की जा सकती है. यही कारण है कि एमडीएम अस्पताल में लगी यह तीसरी आंख अब सिर्फ सामान्य सुरक्षा निगरानी का जरिया नहीं, बल्कि परिसर की समग्र सुरक्षा और अपराध अनुसंधान में एक मजबूत स्तंभ बन चुकी है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan

First Published :

August 29, 2026, 10:14 IST

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