Sikar News: राजस्थान की गौशालाओं के लिए नई योजना, 80% अनुदान से मिलेगी गो-काष्ठ मशीन, जानें पूरे नियम

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राजस्थान की गौशालाओं के लिए नई योजना, 80% अनुदान से मिलेगी गो-काष्ठ मशीन
Last Updated:August 29, 2026, 10:11 IST
Rajasthan Cow-Dung Log Scheme: राजस्थान में पंजीकृत गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई गो-काष्ठ योजना में सरकार ने मशीनों के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम तय किए हैं. योजना के तहत मशीन खरीद पर 80 प्रतिशत सरकारी अनुदान मिलेगा, जबकि 20 प्रतिशत राशि गौशाला को देनी होगी. अनुदान पर मिली मशीन को 10 साल से पहले बेचना या किसी अन्य को हस्तांतरित करना प्रतिबंधित रहेगा. मशीन की 10 दिन के भीतर जियो-टैगिंग अनिवार्य होगी. हर महीने मशीन के संचालन की निगरानी और हर तीन महीने में उत्पादन, बिक्री व आय का हिसाब देना होगा. नियम तोड़ने पर अनुदान बंद होने के साथ गौशाला का पंजीकरण भी रद्द किया जा सकता है.
राजस्थान की रजिस्टर्ड गौशालाओं की आय बढ़ाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए गो-काष्ठ योजना शुरू की गई है. इस योजना के तहत गो-काष्ठ मशीनों को खरीदने के लिए सरकार द्वारा अनुदान दिया जाता है. ऐसे में इन मशीनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं. पशुपालन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनुदान पर प्राप्त गो-काष्ठ मशीन को लाभार्थी गौशाला 10 साल पूरे होने से पहले न तो बेच सकेगी और न ही किसी दूसरी संस्था या व्यक्ति को हस्तांतरित कर सकेगी.
10 दिन में करानी होगी जियो-टैगिंग: गौशाला संचालकों को गो-काष्ठ मशीन की वास्तविक स्थिति और उसे कहां स्थापित इसके काम में लिया जा रहा है इसकी जानकारी पशुपालन विभाग को देनी होगी. यानी गो-काष्ठ मशीन की जियो-टैगिंग अनिवार्य की गई है. मशीन मिलने के 10 दिनों के भीतर संबंधित पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक को इसकी जियो-टैगिंग करनी होगी. इससे विभाग के पास मशीन के स्थान और उपयोग की जानकारी उपलब्ध रहेगी. इसके अलावा मशीन के दुरुपयोग पर निगरानी रखी जा सकेगी.
नियम तोड़े तो अनुदान और रजिस्ट्रेशन दोनों होंगे खत्म: योजना के नियमों का उल्लंघन करने वाली गौशालाओं पर विभाग सख्त कार्रवाई करेगा., यदि कोई लाभार्थी गौशाला 10 साल की निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले मशीन बेचती या किसी अन्य को हस्तांतरित करती है तो उसका सरकारी अनुदान बंद किया जा सकता है. साथ ही संबंधित गौशाला का पंजीकरण भी निरस्त किया जाएगा.
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हर महीने निगरानी, तीन महीने में देना होगा आय का हिसाब: योजना के तहत मशीनों के संचालन और गो-काष्ठ उत्पादन पर लगातार निगरानी रखी जाएगी. जिला स्तरीय गोपालन समिति को मासिक पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं लाभार्थी गौशालाओं को प्रत्येक तीन महीने में गो-काष्ठ के उत्पादन, बिक्री और उससे प्राप्त आय का पूरा विवरण विभाग को देना होगा. इससे योजना से होने वाली वास्तविक आय और मशीन के उपयोग की स्थिति की नियमित जानकारी मिल सकेगी.
सरकार देगी 80 प्रतिशत अनुदान, 20 प्रतिशत राशि गौशाला की: गो-काष्ठ योजना में मशीन की कुल लागत का 80 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार की ओर से अनुदान के रूप में दिया जाएगा, जबकि बाकी 20 प्रतिशत राशि संबंधित गौशाला को स्वयं जमा करनी होगी. मशीनों की खरीद गोपालन निदेशालय की ओर से की जाएगी. तैयार गो-काष्ठ की अनुमानित दर 8 रुपए प्रति किलोग्राम तय की गई है. गौशालाएं इसे विभिन्न स्थानों पर ईंधन के रूप में बेचकर अपनी आय बढ़ा सकेंगी.
मोक्ष धाम से होटल-ढाबों तक होगी बिक्री: गो-काष्ठ का उपयोग पारंपरिक लकड़ी के विकल्प के रूप में विभिन्न स्थानों पर किया जा सकेगा. गौशालाएं तैयार गो-काष्ठ को मोक्ष धाम, फैक्ट्रियों के बॉयलर, होटल-ढाबों तथा हवन-पूजन के लिए ईंधन के रूप में बेच सकेंगी. इससे प्राप्त पूरी आय गौशाला के खाते में जाएगी. यानी इससे गौशाला खुद अपनी आय अर्जित कर सकेंगी.
200 से अधिक गोवंश और 5 बीघा जमीन जरूरी: योजना का लाभ केवल उन्हीं गौशालाओं को मिलेगा जो पंजीकृत होने के साथ कम से कम तीन साल से नियमित रूप से संचालित हो रही हैं. गौशाला में 200 से अधिक गोवंश, न्यूनतम 5 बीघा जमीन और थ्री-फेज बिजली कनेक्शन होना आवश्यक है. जिन गौशालाओं के खिलाफ कोर्ट केस लंबित हैं या जिन्होंने वर्ष 2024-25 में योजना का लाभ लिया है, वे आवेदन नहीं कर सकेंगी. 100 से अधिक आवेदन आने पर अधिक गोवंश वाली संस्थाओं को प्राथमिकता मिलेगी.
First Published :
August 29, 2026, 10:11 IST



