थार में गोडावण संरक्षण की बड़ी जीत, कैप्टिव ब्रीडिंग के 2 पक्षी आजाद, GPS से होगी निगरानी

Last Updated:October 04, 2026, 13:10 IST
Jaisalmer Great Indian Bustard Conservation: जैसलमेर के थार रेगिस्तान में गोडावण संरक्षण अभियान को बड़ी सफलता मिली है. डेजर्ट नेशनल पार्क की सूदासरी रेंज में पहली बार कैप्टिव ब्रीडिंग से तैयार दो गोडावणों को प्राकृतिक पर्यावास में फ्री रिलीज किया गया. दोनों गोडावणों को GPS टैग लगाया गया है, जिसके जरिए WII के वैज्ञानिक 24 घंटे उनकी उड़ान, भोजन, सुरक्षित ठिकानों और मूवमेंट पर नजर रखेंगे. रिलीज से पहले दोनों को 2 से 3 महीने तक री-वाइल्डिंग टनल में प्राकृतिक जीवन की ट्रेनिंग दी गई. केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और वन राज्य मंत्री संजय शर्मा इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने.जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क की सूदासरी रेंज में पहली बार कैप्टिव ब्रीडिंग से तैयार दो गोडावणों को रिलीज किया गया
जैसलमेर. राजस्थान के जैसलमेर के थार रेगिस्तान में गोडावण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है. डेजर्ट नेशनल पार्क की सूदासरी रेंज में पहली बार कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर में तैयार किए गए दो गोडावणों को उनके प्राकृतिक पर्यावास में फ्री रिलीज किया गया. दोनों गोडावणों को GPS टैग के साथ जंगल में छोड़ा गया है, जिससे भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख सकेंगे. गोडावणों की उड़ान, भोजन की तलाश, सुरक्षित ठिकानों और उनके मूवमेंट की 24 घंटे निगरानी की जाएगी. साथ ही हाईटेंशन बिजली तारों और संभावित शिकारियों से उन्हें बचाने पर भी विशेष फोकस रहेगा.
यह पहली बार है जब ब्रीडिंग सेंटर में कैप्टिव ब्रीडिंग के जरिए तैयार हुए गोडावणों को री-वाइल्डिंग प्रक्रिया के बाद सीधे प्राकृतिक पर्यावास में छोड़ा गया है. रिलीज से पहले दोनों गोडावणों को करीब 2 से 3 महीने तक री-वाइल्डिंग टनल में प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप जीवन जीने की ट्रेनिंग दी गई. इस दौरान उन्हें खुले वातावरण में उड़ान भरने, खुद भोजन तलाशने और प्राकृतिक परिस्थितियों में सुरक्षित रहने का अभ्यास कराया गया. स्वास्थ्य और व्यवहार से जुड़े परीक्षणों में दोनों गोडावणों को स्वस्थ पाए जाने के बाद उन्हें वाइल्ड में रिलीज करने का फैसला लिया गया.
रिलीज के दौरान केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव भी मौजूद रहे
गोडावणों के इस ऐतिहासिक फ्री रिलीज के दौरान केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव भी मौजूद रहे. वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने भी इस महत्वपूर्ण पल को देखा. इसके अलावा डीजी फॉरेस्ट संतोष तिवारी समेत वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे. अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इसे गोडावण संरक्षण अभियान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया. जीपीएस टैगिंग के बाद अब वैज्ञानिक दोनों गोडावणों की हर महत्वपूर्ण गतिविधि को ट्रैक कर सकेंगे. इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कैप्टिव ब्रीडिंग से तैयार गोडावण प्राकृतिक वातावरण में किस तरह व्यवहार करते हैं, कहां भोजन तलाशते हैं और किस तरह के इलाकों को सुरक्षित ठिकाने के रूप में चुनते हैं.
राजस्थान वन विभाग 10 साल से मेहनत कर रही है
गोडावण के मूवमेंट से बिजली की हाईटेंशन लाइनों जैसे खतरों की पहचान करने और भविष्य में संरक्षण की रणनीति तैयार करने में भी मदद मिलेगी. गोडावण संरक्षण के इस अभियान के पीछे भारतीय वन्यजीव संस्थानऔर राजस्थान वन विभाग की करीब 10 साल की मेहनत रही है. कैप्टिव ब्रीडिंग, बच्चों के पालन-पोषण, री-वाइल्डिंग और फिर प्राकृतिक पर्यावास में रिलीज तक की प्रक्रिया को विशेषज्ञों की निगरानी में आगे बढ़ाया गया. अब इन दोनों गोडावणों की प्राकृतिक पर्यावास में मौजूदगी से संरक्षण कार्यक्रम को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है. थार की धरती पर गोडावणों की आजादी की यह उड़ान संरक्षण अभियान में एक नए ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है.About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Jaisalmer,Jaisalmer,Rajasthan
First Published :
October 04, 2026, 09:56 IST



