Pushkar Shakti Peeth: पर्वत की चोटी से तलहटी तक आईं माता, पुष्कर के इस शक्तिपीठ की कहानी है बेहद रहस्यमयी

Last Updated:October 04, 2026, 13:28 IST
Pushkar Shakti Peeth: अजमेर से महज 16 किलोमीटर दूर पुष्कर में स्थित राजराजेश्वरी पुरुहूता मणि वैदिक शक्तिपीठ माता सती से जुड़ी आस्था का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि यहां माता सती की कलाइयों का स्वरूप विराजमान है. 108 सिद्ध पीठों में 15वें इस शक्तिपीठ की कहानी ब्रह्मा जी के यज्ञ और एक भक्त की निस्वार्थ प्रार्थना से भी जुड़ी है, नवरात्रि में यहां विशेष पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं.
अजमेर. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है. इन दिनों भक्त देवी मंदिरों में दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं. अगर आप भी नवरात्रि के दौरान अजमेर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के दर्शन करने की योजना बना रहे हैं तो अजमेर से 16 किलोमीटर दूर ब्रह्मा नगरी पुष्कर में एक ऐसा प्राचीन शक्तिपीठ है जिसे माता सती से जुड़ा हुआ माना जाता है. पुरुहूता पर्वत पर स्थित राजराजेश्वरी पुरुहूता मणि वैदिक शक्तिपीठ को 108 सिद्ध पीठों में 15वां सिद्ध पीठ है. मान्यता है कि यहां माता सती की कलाइयों का स्वरूप विराजमान हुआ था. नवरात्रि के दौरान इस शक्तिपीठ में विशेष पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं.
पुजारी उमेंद्र पुरी बताते है कि आदिकाल में माता पर्वत शिखर पर पिंडी स्वरूप में विराजमान थी. एक भक्त नियमित रूप से पर्वत पर पहुंचकर माता की पूजा-अर्चना करता था. वृद्धावस्था आने पर भक्त ने माता से प्रार्थना की कि वे पर्वत की तलहटी में आकर विराजें ताकि उसके साथ-साथ आम श्रद्धालु भी आसानी से माता के दर्शन कर सकें. भक्त की निस्वार्थ प्रार्थना से प्रसन्न होकर माता ने तलहटी में आने का निश्चय किया.
ब्रह्मा जी के यज्ञ से जुड़ी है शक्तिपीठ की मान्यतापुजारी ने आगे बताया कि इस शक्तिपीठ की मान्यता का संबंध जगतपिता ब्रह्मा जी के यज्ञ से भी जुड़ा है. मंदिर में माता के स्वरूप को अलग-अलग नामों और मान्यताओं के साथ पूजा जाता है. यहां मां महाकाली और मां चामुंडा के स्वरूपों की आराधना की जाती है. मां लक्ष्मी और सरस्वती के संयुक्त स्वरूप को अम्बे-अम्बालिका नाम से पूजा जाता है जबकि मां गौरी के साथ गणेश जी का स्वरूप भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है. अजमेर पुष्कर के आस पास कई ऐसे धार्मिक मान्यता वाले मंदिर है जिन्हें लोग सदियों से मानते है आ रहे है, इनकी अलग ही मान्यता है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Ajmer,Rajasthan
First Published :
October 04, 2026, 13:28 IST



