दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट में पहुंचे CJP नेता अभिजीत दीपके, बोले- गलतफहमी से सम्मान कम नहीं होता

नई दिल्ली. दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपने बयानों को लेकर लगातार चर्चा में हैं. कुछ समय पहले एक छात्र आंदोलन पर उनके कॉमेंट से नाराज हुए लोगों में अब एक ऐसा शख्स भी उनके कॉन्सर्ट में पहुंचा, जिसने उस बयान से खुद को आहत बताया था. हालांकि, इस मुलाकात के पीछे नाराजगी नहीं, बल्कि पुराना सम्मान और अपनापन नजर आया. कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने दिल्ली में दिलजीत का कॉन्सर्ट देखा. इसके बाद उन्होंने सिंगर के नाम एक ओपन लेटर लिखा. इसमें उन्होंने अपनी नाराजगी भी जाहिर की और दिल की बात कहते हुए पुराने विवाद को पीछे छोड़ने की अपील भी की.
अभिजीत दीपके ने 30 अक्टूबर को दिल्ली में हुए दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट में हिस्सा लिया. दिलजीत दोसांझ की ‘मैं कलाकार हूं’ पर रिएक्ट करने के बाद उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर सिंगर के शो से एक सेल्फी भी शेयर की. इसके साथ ही उन्होंने दिलजीत के लिए एक ओपन लेटर लिखा. अभिजीत ने बताया कि जून में CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिलजीत के कॉमेंट से उन्हें दुख पहुंचा था. पंजाबी अंदाज में लिखा, ‘पाजी, छोटा भाई समझ के मिट्टी पाओ.’
अभिजीत दीपके ने बताई वजह
दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट से लौटने के बाद अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम पर सिंगर दिलजीत दोसांझ के नाम एक नोट शेयर किया. दिलजीत की आलोचना करने की वजह बताते हुए दीपके ने लिखा, ‘पाजी, जून में जब हम विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तब आपकी टिप्पणी से मुझे थोड़ा दुख हुआ था. ऐसा इसलिए नहीं था कि मेरी आपसे कोई व्यक्तिगत दुश्मनी थी, बल्कि इसलिए था क्योंकि मैंने हमेशा आपको एक ऐसे इंसान के रूप में देखा है जो सही मुद्दे के लिए आवाज उठाता है, जैसा कि आपने खुद भी कहा है.’
‘एक असहमति से सम्मान कम नहीं होता’
अपनी पोस्ट में CJP के संस्थापक ने इस साल की शुरुआत में दिलजीत के कॉन्सर्ट से अपनी एक तस्वीर भी शेयर की और कहा कि वे हमेशा से उनके फैंस रहे हैं. उन्होंने आगे लिखा, ‘अगर कुछ बदला भी है तो भी मैं हमेशा आपका फैन रहा हूं और यह आगे भी नहीं बदलेगा. मैं आज भी आपके गाने सुनता हूं. सच तो यह है कि भारत लौटने से ठीक पहले इसी साल मई में मैं शिकागो में आपके कॉन्सर्ट में आया था. सिर्फ आपके संगीत के लिए ही नहीं, बल्कि इसलिए भी क्योंकि एक इंसान के तौर पर मेरे मन में आपके प्रति बहुत सम्मान है. आपका साहस, आपका असली अंदाज और अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए भारत को ग्लोबल मंच पर ले जाने का आपका तरीका… ये ऐसी चीजें हैं जिनकी मैंने हमेशा सराहना की है. शायद इसीलिए आपकी उस टिप्पणी से थोड़ा दुख हुआ था, क्योंकि मैंने हमेशा आपको बहुत ऊंचे दर्जे पर रखा है. लेकिन एक असहमति या गलतफहमी आपके प्रति मेरे सम्मान और प्रशंसा को बदल नहीं सकती.
अभिजीत दीपके का पोस्ट.
‘छोटा भाई समझ के मिट्टी पाओ’
आखिर में दीपके ने खुद को दिलजीत का ‘छोटा भाई’ बताते हुए दीपके ने आगे लिखा, ‘बाकी पाजी, छोटा भाई समझ के मिट्टी पाओ.’ इसके बाद उन्होंने दिलजीत के गाने G.O.A.T. की एक लाइन लिखी, जिसमें दुश्मनों और दोस्तों दोनों के साथ शालीन रहने की बात कही गई है. उन्होंने लिखा, और अंत में मैं बस यह कहना चाहूंगा, ‘गबरू ता वैरी नू वी मिठा बोलदा, नी तू ता फेर जट दा प्यार गोरिए.’
क्या था ‘मैं कलाकार हूं’ वाला विवाद?
दरअसल, जून में दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में छात्र प्रदर्शन कर रहे थे. इसी दौरान एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन में दिलजीत से इस आंदोलन को लेकर सवाल किया गया था. जवाब में उन्होंने कहा था, ‘भाई, मुझे विरोध प्रदर्शनों और ऐसी चीजों से दूर रखो. मैं एक कलाकार हूं, राजनेता नहीं हूं.’ उन्होंने यह भी कहा था कि दुनिया में हर चीज हमेशा सही नहीं हो सकती. इस बातचीत के दौरान उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब की एक पंक्ति भी पढ़ी थी- ‘नानक दुखिया सब संसार, सो सुखिया जिस नाम आधार.’ दिलजीत ने कहा था कि उनका नाम अक्सर ऐसे मामलों में खींचा जाता है, लेकिन वह दोनों पक्षों के लिए अच्छा चाहते हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी नहीं है, इसलिए वह इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते.
बाद में छात्रों के समर्थन में बोले थे दिलजीत
दिलजीत की इस टिप्पणी से कई लोग निराश हुए थे. इसकी वजह यह भी थी कि वह पहले पंजाब से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखते रहे हैं. हालांकि, करीब एक महीने बाद 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के बाद उन्होंने छात्रों के समर्थन में पोस्ट किया था. उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की निंदा की और अधिकारियों से छात्रों की मांगें सुनने की अपील की. उन्होंने लिखा था, ‘लोगों की आवाज भगवान की आवाज है.’ दिलजीत ने यह भी बताया था कि किसानों के आंदोलन का समर्थन करने के बाद उन्हें कई बार ‘देश विरोधी’ कहा गया. उस दौरान उन्हें काफी आलोचना और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था.



