Dairy Business : 15 भैंसों से शुरू हुई थी डेयरी, आज हर साल बिकता है 1.32 करोड़ का दूध

Last Updated:October 30, 2026, 23:23 IST
Dairy Business : दूध बेचकर करोड़ों का साम्राज्य बनाना किसी सपने जैसा लगता है, लेकिन इसे हकीकत में कर दिखाया है गुजरात के बनासाकांठा की रहने वाली नवलबेन चौधरी. उन्होंने 15 साल पहले महज 15 भैसों के साथ एक डेयरी शुरू की थी, जो आज एशिया की सबसे बड़ी डेयरियों में शुमार है. उनकी डेयरी से हर साल सवा करोड़ से भी ज्यादा का दूध बेचा जाता है.गुजरात की बनासकांठा डेयरी एशिया की टॉप डेयरियों में आती है.
नई दिल्ली. कहते हैं कोई भी काम छोटा नहीं होता और मेहनत व लगन से किया जाए तो छोटा काम भी आपको बड़ा बना सकता है. इसकी बानगी देखनी हो तो गुजरात की बनास डेयरी चलाने वाली नवलबेन चौधरी की कहानी जरूर पढ़नी चाहिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उन्होंने हाल में एक कार्यक्रम में अपने संघर्ष और सफलता की कहानी सुनाई. उन्होंने बताया कि कैसे सिर्फ 15 भैसों से शुरू की गई डेयरी से आज हर साल 1.32 करोड़ का दूध बेचा जा रहा है.
गुजरात के बनासकांठा जिले के नगाना गांव की रहने वाली नवलबेन चौधरी का कहना है कि आज उनकी डेयरी से रोजाना करीब 1,200 लीटर दूध निकलता है और हर महीने 11 लाख रुपये का दूध बेच रही हैं. नवलबेन ने बताया कि उनकी डेयरी से सालाना कमाई करीब 1.32 करोड़ रुपये पहुंच गई है. उन्होंने बनास डेयरी में भी एक साल तक काम किया और हर महीने 11 लाख रुपये का दूध बेचा. इसके लिए नवलबेन को पुरस्कार भी दिया गया.
पीएम मोदी ने दिया था इनामप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए तमाम योजनाएं शुरू की थी. नवलबेन का कहना है कि उन्होंने भी इन योजनाओं का जमकर लाभ उठाया और बनास डेयरी को एशिया की सबसे बड़ी डेयरी में शामिल कराया. इसके लिए तत्कालीन सीएम मोदी ने उन्हें पुरस्कार भी दिया था. नवलबेन का कहना है कि उन्हें मोदी के अलावा गृहमंत्री अमित शाह से भी पुरस्कार मिला है. इसके अलावा गुजरात के मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेन पटेल ने भी नवलबेन को अवार्ड दिया था.
डेयरी में काम करते हैं 5 परिवारबनास डेयरी के चेयरमैन शंकर चौधरी हैं. उन्होंने भी तीन बाद नवलबेन को सम्मानित किया है. उन्होंने बताया कि डेयरी पर 5 परिवारों के लोग काम करते हैं और हर 15 दिन पर खाते में 7 से 8 लाख रुपये आते हैं. इस लिहाज से उनकी सालाना कमाई सवा करोड़ से भी ज्यादा रहती है. उन्होंने बताया कि बनास डेयरी में काम करने वाले लोगों को भी लाखों की सैलरी दी जाती है, ताकि उनके परिवार की सभी जरूरतें पूरी हो सकें. यहां डेढ़ लाख रुपये तक हर महीने सैलरी मिलती है.
15 साल पहले शुरू की थी डेयरीनलवबेन चौधरी ने बनास डेयरी की शुरुआत 15 साल पहले 15 भैंसों के साथ शुरू की थी. आज मवेशियों की संख्या बढ़कर 250 हो चुकी है. उन्होंने कहा कि बाप-दादा भी दूध बेचने का काम करते थे. लिहाजा हमारा मन भी इस काम में लग गया और आज इसे बड़े पैमाने पर करने की ठानी. मवेशी और चारे का जुगाड़ करने के लिए शुरुआत में 20 लाख का निवेश किया और मुनाफा बढ़ा तो निवेश और बढ़ाया. हमने गुजरात की तमाम डेयरी से अच्छी नस्ल के मवेशी खरीदे. उनकी यह डेयरी आज महिला सशक्तीकरण की मिसाल है, क्योंकि पानी और हरे चारे की कमी के बावजूद सभी मवेशियों का ख्याल रखना किसी उपलब्धि से कम नहीं है.
About the AuthorPramod Kumar Tiwari
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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New Delhi,Delhi
First Published :
October 30, 2026, 23:23 IST



