दिल्ली चलो का नारा कितना काम आया, राहुल की रैली में कितने लोग आ रहे, रामलीला मैदान में क्या गजब होने वाला है?

SIR और वोट चोरी को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जन महाभियोग’ की मॉक ड्रिल क्या वाकई में विपक्ष का मास्टर स्ट्रोक साबित हुई है, क्या 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष की रैली, मोदी सरकार के खिलाफ गेमचेंजर साबित होने वाली है या फिर विपक्ष की एकता और दावों की पोल खुलने वाली है, इस सबके बीच रामलीला मैदान में होने वाली कांग्रेसी रैली से अगर दिल्ली के व्यापारियों को 10 हजार करोड़ का नुकसान होता है, तो क्या इस भीषण आर्थिक नुकसान पर किसी की जवाबदेयी तय होगी या नहीं, कांग्रेस के लिए चुनौती है कि वो विरोध का अधिकार इस्तेमाल करते हुए व्यापारियों की चिंता का जवाब भी दे… इधर प्रधानमंत्री मोदी कह चुके हैं कि वे आखिरी सांस तक देश की सेवा करेंगे, ये जवाब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की बाप से जुड़ी विवादित टिप्पणी के बाद आया… कांग्रेस अब SIR और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोल चुकी है… लेकिन सवाल ये है कि क्या वोटर लिस्ट के आरोपों पर जनता का भरोसा कांग्रेस के साथ है, या फिर इन आरोपों का जवाब चुनावी नतीजों और ठोस सबूतों से ही तय होगा
CEC के खिलाफ जन महाभियोग’, खरगे के घर क्या हुआ?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जन महाभियोग’ की मॉक ड्रिल में इंडी गठबंधन ने बड़ा मुद्दा और चुनावी हथियार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इंडी गठबंधन के लगभग 19 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने इस महाभियोग प्रस्ताव में हिस्सा लिया. अधिकतर दलों के नेताओं को अपनी बात रखने के लिए 5-5 मिनट दिए गए, जबकि समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के लिए 10-10 मिनट निर्धारित किए गए. राजनीतिक नेताओं के अलावा सिविल सोसाइटी के सदस्यों और ऐसे आम नागरिकों को भी बोलने का अवसर दिया गया, जिनके नाम वोटर लिस्ट से कटने का दावा किया गया था.
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के 10 राजाजी मार्ग स्थित आवास पर आयोजित जन महाभियोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मोदी सरकार पर जमकर आरोप लगाए गए. खरगे ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को तुरंत हटाया जाए, SIR की प्रक्रिया रद्द करो, 2023 का कानून रद्द करो. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इस सांकेतिक कार्यवाही के अध्यक्ष की भूमिका निभाई.
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्या-क्या आरोप?
आप ये भी जान लीजिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जन महाभियोग’की मॉक ड्रिल में क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जन महाभियोग’ में 6 आरोप लगाए गए हैं…
CEC की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर सवाल, चुनावों में धांधली की साजिश रचने का आरोप
SIR के दौरान 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने का आरोप
संसद की निगरानी या जानकारी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव करने का आरोप
ECINET के जरिए मतदाता सूचियों पर नियंत्रण हासिल करने का आरोप
अन्य दो चुनाव आयुक्तों को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखने का आरोप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के इशारे पर काम करने का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ‘मैं प्रस्ताव रखता हूं ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाया जाए, जो क्रिमिनल कांस्पीरेसी में शामिल हैं. उन्होंने कानून तोड़ा है. ज्ञानेश कुमार ने राष्ट्रद्रोह किया है. वो SIR के लिए सीधे ज़िम्मेदार हैं. 14 करोड़ वोटर डिलीट कर दिया. फॉर्म 6 के लिए ज्ञानेश कुमार ज़िम्मेदार हैं. ज्ञानेश कुमार को मोदी द्वारा 2023 में जो आजीवन प्रोटेक्शन मिला है, वह इनको देश के ख़िलाफ़ क्रिमिनल चार्ज से बचाता है. उसको ख़त्म करना होगा. ज्ञानेश कुमार को कानून का सामना करना होगा. मैं ये प्रस्ताव अब पेश करता हूं.’
इसके जवाब में बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, ‘फॉर्म सिक्स अमेंड नहीं हुआ. खरगे जी, आप बिल्कुल ध्यान से सुनिए गलती सिर्फ आपकी इतनी है कि आप आपको जो ट्यूशन दे रहा है, वो खुद पढ़ा नहीं है.’ वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘जिस प्रकार राहुल गांधी, कांग्रेस और उनके मित्र दलों ने देश को झूठे प्रचार से भ्रमित करने की कोशिश की है तो यहां के लोग उन्हें एक मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं. शायद कांग्रेस इतनी बड़ी संख्या में पूरे देश से लोग नहीं इकट्ठे कर पाएगी. चुनाव आयोग का काम है कि वे शुद्ध मतदाता सूची बनाए.’
वहीं राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने आरोपों को दोहराया और उनके तुरंत इस्तीफे की मांग की. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक और निष्पक्ष जिम्मेदारी निभाने के बजाय सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रहा है. उन्होंने इसे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला करार दिया, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने का आरोप लगाया है.
रामलीला मैदान को लेकर वार-पलटवार
एक तरफ इंडी गठबंधन CEC के ख़िलाफ़ जन महाभियोग के जरिए देश में वोट चोरी और SIR को लेकर माहौल बनाने में जुटा है, तो वहीं दूसरी तरफ 1 नबवंर को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेसी रैली को लेकर वार और पलटवार शुरू हो चुके हैं. इस रैली से पहले जिस तरह से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अभद्र टिप्पणी की है, उससे सियासी माहौल बेहद गरमा गया है.
एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वो चट्टानी संकल्प है, जो साफ-साफ कह चुके हैं कि जब तक शरीर में आखिरी सांस है, तब तक 140 करोड़ देशवासियों की सेवा करूंगा. ये सीधा और करारा जवाब है, कांग्रेस के उस पूरे इकोसिस्टम को, जो मोदी से नफरत करते-करते अब स्तर गिराकर परिवार और बाप तक पहुंच जाता है.
बीजेपी ने कांग्रेस के वार पर पलटवार शुरू कर दिया है. बीजेपी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से वीडियो पोस्ट कर कहा- ‘मोदी कहीं नहीं जाने वाले हैं, और देश उनके नेतृत्व में आगे बढ़ता रहेगा.’ पार्टी ने खरगे से माफी की मांग की है
लेकिन दूसरी तरफ हैं राहुल गांधी और उनका इंडी गठबंधन… हार दर हार का स्वाद चखने के बाद भी राहुल गांधी का नैरेटिव बदलने का नाम नहीं ले रहा है. कल यानी 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक बार फिर विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन होने जा रहा है. लेकिन इस रैली से पहले ही दिल्ली की सड़कों पर घमासान छिड़ चुका है. चौंकाने वाली बात ये है कि इस बार विपक्ष के इस घमासान से केवल भारतीय जनता पार्टी नहीं टकरा रही, बल्कि दिल्ली की रीढ़ कहे जाने वाले व्यापारी सड़क पर उतर आए हैं. 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस के नेतृत्व में INDIA गठबंधन की रैली प्रस्तावित है. विपक्ष इसे वोट चोरी और वोटर अधिकारों की लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है.
कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली ‘INDIA’ गठबंधन की रैली पर कहा, हम भीड़ जुटाने की तैयारी नहीं कर रहे हैं, बल्कि भीड़ जुट रही है. क्योंकि लोग स्वयं आ रहे हैं. हमने किसी पार्टी की ओर से कोई साधन उपलब्ध नहीं कराया है.’
वहीं सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, ‘बहुत ऐतिहासिक रैली होगी. यह रैली देश की जनता की भावनाओं के अनुसार होगी. संदेश जाएगा कि वर्तमान सरकार में देश की जनता तबाही और परेशानी की हालत में है. हमारा युवा, जो हमारी दौलत है, बेरोजगार है.’
दिल्ली पुलिस की कैसी तैयारी?
रामलीला मैदान में मंच से थोड़ा दूर दिल्ली पुलिस ने एक सीसीटीवी कंट्रोल रूम बनाया है, जिसमें 200 से 250 सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड मॉनिटर की जाएगी. रामलीला मैदान में होने वाली रैली में मैदान अगर खाली मैदान की बात करे तो इसकी कैपेसिटी 45 से 50 हजार लोगों की है. लेकिन अगर कुर्सियां, मंच के हिसाब से देखा जाए तो 25 से 30 हजार लोगों के लिए ऑर्गेनाइजर्स से बात चल रही है. पुलिस का कहना है कि इतनी कपैसिटी रखे, ताकि कोई एमरजेंसी सिचुएशन हो तो परेशानी न हो.
दिल्ली पुलिस के अलावा रामलीला ग्राउंड में पैरामिलिट्री फोर्स लगाई जाएगी. अलग-अलग गेट पर ऑर्गेनाइजर भी वॉलिंटियर्स लगाए जाएंगे.
200 से ढाई सौ सीसीटीवी कैमरों से पूरे मैदान को कवर किया जाएगा, एक सीसीटीवी कंट्रोल रूम बनाया गया है.
कोई आपराधिक लोग न आ जाए इसको लेकर FRS कैमरे लगाए जाएंगे.
जीबी पंत, एलएनजेपी अस्पताल में आने वाले लोगो को एम्बुलेंस को कोई दिक्कत न हो इसका ध्यान रखा जाएगा.
पैदल यात्रियों को कोई दिक्कत न हो, कमर्शियल वाहन, बसों को लेकर सिचुएशन के हिसाब से रूट डाइवर्जन किए जाएंगे.
सुबह 10 से 5 का समय है रैली का, अगर लोग ज्यादा आएंगे तो बाहर सड़क, फुटपाथ के हिसाब से व्यवस्था देखी जाएगी.
5 बजे तक की परमिशन है. इसमें कोई बदलाव होगा या आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे तो ऑर्गेनाइजर से उस हिसाब से प्लान किया जाएगा.
व्यापारियों के काम मे कोई बाधा न आए इसका ध्यान रखा जाएगा.
व्यापारियों का रामलीला मोर्चा?
Chamber of Trade and Industry यानी CTI ने कांग्रेस नेतृत्व से रैली को 10 नवंबर यानी भाई दूज के बाद कराने या किसी दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने की मांग की है. व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के सीजन में दिल्ली के बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और कारोबार बेहद महत्वपूर्ण है. रैली के कारण बैरिकेडिंग, सड़क बंद होने, ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग की समस्या पैदा हो सकती है. CTI ने दावा किया है कि रामलीला मैदान के आसपास और पुरानी दिल्ली के करीब 21 बाजार प्रभावित हो सकते हैं. इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, करोल बाग और दरियागंज जैसे बाजार शामिल बताए गए हैं.
रैली की तारीख त्योहार के बाद क्यों नहीं तय कर रहे हैं. आप ये भी जान लीजिए कि व्यापारी संगठन कह रहे हैं कि 10 अक्टूबर को हुए पहले प्रदर्शन में 2000 करोड़ रुपये और 13 से 16 अक्टूबर के बीच सेंट्रल दिल्ली में हुई नाकाबंदी, मेट्रो बंदी और सेंट्रल पार्क बंद होने से अतिरिक्त 1000 करोड़ का नुकसान पहले ही हो चुकी है.
अगर दिल्ली में जारी धरना प्रदर्शन दीपावली तक जारी रहे तो ये नुकसान 10,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को भी पार कर सकता है. क्या व्यापारी, क्या बाकी पब्लिक, सब इनके एजेंडे को समझ रही है. इनके नैरेटिव से कोई कनेक्ट नहीं कर रहा है.
अमित शाह का इंडी गठबंधन को चैलेंज
उधर अमित शाह ने इंडी गठबंधन को चैलेंज कर दिया कि अगर बात करनी है तो संसद के स्पेशल सेशन में आकर चर्चा कर लो.. वहां दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा. अमित शाह ने कहा कि ये लोग मैच हारने पर मेहनत नहीं करते बल्कि अंपायर पर ही उंगली उठाते रहते हैं.
अमित शाह ने कहा, ‘बंगाल के बाद इनको मालूम पड़ा है कि भई चुनावों में तो जीत नहीं सकती. तो कोई भी टीम जब मैच में हार जाती है, खेल में हार जाती है तो बैठकर ज़्यादा प्रैक्टिस करती है. यही होता है ना भाई, यही करना चाहिए ना, मगर राहुल बाबा अलग मिट्टी से बने हैं, इंडी अलायंस के अखिलेश वग़ैरह जो उनके साथ हैं वो भी अलग मिट्टी के बने हैं, मैच हारने के बाद वो अंपायर पर ही आरोप करना शुरू कर दिए कि अंपायर ने चीटिंग करी. वो कहते हैं कि वोट चोरी हुई है, राहुल बाबा मैं आज यहां से अखिलेश यादव जी को और राहुल गांधी को चुनौती देकर जाता हूं कि भारतीय जनता पार्टी संसद में इसकी चर्चा करने के लिए तैयार है, हमें कुछ नहीं छिपाना है, एक बार आ जाइए, स्पेशल संसद सत्र बुलाते हैं, मगर वो संसद में बोलना नहीं चाहते हैं.’
कुल मिलाकर, दिल्ली और देश की राजनीति में जबरदस्त गहमागहमी शुरू हो चुकी है. देखना होगा इंडी गठबंधन का संदेश खरगे के घर लेकर रामलीला के मैदान तक जनता पर क्या असर डालते हैं. फिलहाल मोदी सरकार, बीजेपी और एनडीए विपक्ष की हर चुनौती पर जबरदस्त पलटवार कर रहे हैं.



