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योग करते समय न करें ये 5 गलतियां, वरना नहीं मिलेगा पूरा फायदा! आयुष मंत्रालय ने बताए जरूरी नियम

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को फिट और स्वस्थ रखने के लिए बड़ी संख्या में लोग योग का सहारा ले रहे हैं. कोई वजन कम करने के लिए योग करता है, तो कोई तनाव दूर करने और मानसिक शांति पाने के लिए. हालांकि, योग का मतलब सिर्फ मुश्किल आसन करना या शरीर को अलग-अलग मुद्राओं में मोड़ना नहीं है. यह शरीर और मन के बीच बेहतर तालमेल बनाने की एक प्रक्रिया है. इसके लिए नियमित अभ्यास के साथ धैर्य और अपने शरीर की क्षमता को समझना भी जरूरी है. आयुष मंत्रालय ने योग अभ्यास से जुड़े कुछ ऐसे सिद्धांत बताए हैं, जिन्हें अपनाकर आप इसका बेहतर लाभ उठा सकते हैं.

1. योग को प्रतियोगिता न समझें

कई लोग योग करते समय दूसरों को देखकर खुद को बेहतर साबित करने की कोशिश करते हैं. किसी को मुश्किल आसन करते देखकर वे भी वैसा ही करने लगते हैं. लेकिन योग कोई प्रतियोगिता नहीं है, जिसमें आपको दूसरों से आगे निकलना हो. इसका उद्देश्य अपने शरीर और मन को समझना है. इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति की क्षमता से अपनी तुलना करने के बजाय अपनी प्रगति पर ध्यान दें.

2. रोजाना अभ्यास करना है जरूरी

योग का फायदा तभी मिलता है, जब आप इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाते हैं. कभी-कभार घंटों योग करने की बजाय रोजाना अपनी सुविधा के अनुसार कुछ समय अभ्यास करना बेहतर है. शुरुआत में आसान आसनों से शुरुआत करें और धीरे-धीरे अभ्यास का समय बढ़ाएं. नियमितता से शरीर को योग की आदत डालने में मदद मिलती है.

3. अपनी शारीरिक क्षमता को समझें

हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है. किसी की मांसपेशियां ज्यादा लचीली होती हैं, तो किसी को कुछ आसन करने में परेशानी हो सकती है. ऐसे में सोशल मीडिया पर किसी को कठिन योगासन करते देखकर उसकी नकल करना सही नहीं है. अपनी उम्र, शारीरिक स्थिति और क्षमता के अनुसार ही आसनों का चुनाव करें. शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालने से चोट लग सकती है.

4. शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें

योग करते समय सिर्फ आसन पूरा करने पर ध्यान देना सही नहीं है. इस दौरान अपनी सांसों, शरीर में होने वाले खिंचाव और मानसिक स्थिति पर भी ध्यान दें. अगर किसी आसन को करते समय दर्द, चक्कर या असहजता महसूस हो, तो तुरंत रुक जाएं. दर्द को सहन करके आसन पूरा करने की कोशिश न करें. योग का अभ्यास आराम और जागरूकता के साथ करना चाहिए.

5. योग सिर्फ आसनों तक सीमित नहीं है

अक्सर लोग योग को केवल शारीरिक व्यायाम समझते हैं, जबकि इसका दायरा इससे कहीं बड़ा है. योग में यम और नियम को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है. यम दूसरों के प्रति सही व्यवहार, अहिंसा, सत्य और ईमानदारी जैसे सिद्धांत सिखाते हैं. वहीं नियम आत्म-अनुशासन, स्वच्छता, संतोष और नियमित अभ्यास को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देते हैं. इन सिद्धांतों का उद्देश्य व्यक्ति के व्यवहार और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाना है.

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