धर्मेंद्र को टक्कर देने वाला सुपरस्टार, जिसके परिवार पर था खौफनाक श्राप, खुद की थी अपनी मौत की भविष्यवाणी

Last Updated:September 09, 2026, 19:39 IST
हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि वे सिर्फ पर्दे पर किरदार नहीं निभा रहे हैं बल्कि उसे पूरी तरह जी रहे हैं. 70 के दौर में ऐसा ही स्टार था जिसने अपने अभिनय से हर किसी पर काफी गहरा छाप छोड़ा था. इस हीरो के सामने इंडस्ट्री में कई चुनौतियां थीं. उनके सामने धर्मेंद्र जैसे सुपरस्टार का स्टारडम था, अमिताभ बच्चन का उभरता हुआ दौर था और दिलीप कुमार जैसे अभिनेता की विरासत थी. लेकिन संजीव कुमार ने अपनी पहचान किसी की नकल करके नहीं, बल्कि अपने अभिनय के दम पर बना.
नई दिल्ली. मौसमी चटर्जी, रेखा, हेमा मालिनी के साथ काम कर चुके सुपरस्टार संजीव कुमार ने अपने करियर के दौरान कई तरह के रोल अदा किए थे. धर्मेंद्र को पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में टक्कर देने वाले इस सुपरस्टार ने उस दौर में भी बुजुर्ग लोगों के किरदार अदा किए थे जिस वक्त कोई हीरो पिता का रोल अदा करने को भी राजी नहीं होता था.
जब हीरो पर्दे पर हमेशा जवान दिखना चाहते थे, उस वक्त संजीव कुमार ने शोले में ‘ठाकुर’ का रोल अदा कर एक मिसाल कायम की थी. संजीव कुमार कम उम्र में ही बुजुर्ग किरदार निभाने से नहीं डरते थे. शायद इसकी वजह उनकी जिंदगी से जुड़ा वो डर था, जो हमेशा साये की तरह उनका पीछा करता था.
संजीव कुमार का असली नाम हरीहर जेठालाल जरीवाला था. 9 जुलाई 1938 को सूरत में जन्मे इस कलाकार ने थिएटर से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की और बाद में एक्टिंग स्कूल से प्रशिक्षण लिया. धीरे-धीरे फिल्मों में छोटे किरदारों से शुरुआत करने वाला यह कलाकार हिंदी सिनेमा के सबसे सम्मानित अभिनेताओं में शामिल हो गया.
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संजीव कुमार की जिंदगी में एक ऐसा डर था जो ताउम्र उनके साथ रहा. इस डर का असर कुछ ऐसा हुआ कि इसका प्रभाव उनके रोल्स के चयन पर भी पड़ने लगा. 22 साल की उम्र से संजीव कुमार पर्दे पर बुजुर्ग लोगों का किरदार अदा करने लगे थे.
संजीव कुमार की खासियत यह थी कि वह उम्र को अभिनय की सीमा नहीं बनने देते थे. ‘शोले’ में ठाकुर का किरदार हो या ‘आंधी’, ‘मौसम’, ‘कोशिश’, ‘खिलौना’ और ‘अंगूर’ जैसी फिल्मों में उनके शानदार अभिनय की. हर भूमिका में वह अलग नजर आए. फिल्म ‘नया दिन नई रात’ में उन्होंने नौ अलग-अलग किरदार निभाकर अपनी रेंज का ऐसा उदाहरण पेश किया, जिसे आज भी हिंदी सिनेमा के यादगार प्रयोगों में गिना जाता है.
दरअसल, संजीव कुमार से एक इंटरव्यू में पूछा गया था कि वो इतने कम उम्र में पर्दे पर उम्रदराज रोल्स क्यों निभाते हैं. इसका जवाब देते हुए एक्टर ने कहा था कि उनके परिवार पर एक श्राप है. संजीव कुमार का मानना था कि उनके परिवार में कोई पुरुष 50 साल से ज्यादा नहीं जीता था.
संजीव कुमार ने कहा था कि वो पर्दे पर उम्रदराज किरदार अदा करते हैं क्योंकि फिल्मों के जरिए वो बुढ़ापे को महसूस कर सकते हैं. एक्टर का मानना था कि वो बुढ़ापे नहीं देख पाएंगे. उनके परिवार में कोई पुरुष 50 साल से ज्यादा नहीं जीता था.
संजीव कुमार का ये डर सही साबित हुआ था. महज 47 साल की उम्र में एक्टर का हार्ट अटैक से निधन हो गया था. संजीव कुमार ने बहुत पहले ये भविष्यवाणी की थी कि वो 50 साल तक नहीं जी पाएंगे. संजीव कुमार अपनी पूरी जिंदगी तन्हा ही रहे. उन्हें किसी का प्यार और साथ कभी नसीब नहीं हुआ.
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September 09, 2026, 19:39 IST



