न सड़क, न आसान रास्ता; जंजीरों के सहारे उतरते हैं श्रद्धालु, अरावली में छिपा है तिलकेश्वर महादेव मंदिर

Last Updated:August 27, 2026, 18:54 IST
Tilkeshwar Mahadev Mandir: अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित तिलकेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनोखी भौगोलिक बनावट और दुर्गम रास्ते के कारण आकर्षण का केंद्र है. मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पत्थरों से बनी सीढ़ियों और जगह-जगह लगी जंजीरों का सहारा लेकर नीचे उतरना पड़ता है. प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह शिवधाम धार्मिक आस्था के साथ रोमांच का अनुभव भी कराता है. यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु इस अनोखे सफर को यादगार मानते हैं.
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पाली. अगर आप इस मानसून सीजन में आस्था के साथ-साथ किसी रोमांचक और एडवेंचर से भरी खूबसूरत जगह पर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो अरावली की पहाड़ियों में बसा यह मंदिर आपकी लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए. हम बात कर रहे हैं बाली उपखंड की सीमा और मेवाड़ के मठ गांव के पास स्थित तिलकेश्वर महादेव टेंपल की. घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसा यह मंदिर किसी पाताल लोक से कम नहीं लगता.
मानसून के दौरान यहां की हरी-भरी वादियां कश्मीर जैसा मनोरम दृश्य पेश करती हैं और चारों तरफ बहते झरने इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं. लेकिन इस मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं है. गर्भगृह तक जाने के लिए श्रद्धालुओं को प्राकृतिक पत्थरों से बनी बेहद संकरी सीढ़ियों से उतरना पड़ता है और संतुलन बनाने के लिए लोहे की मजबूत जंजीर थामनी पड़ती है.
पाली और उदयपुर की सीमा पर बना है यह मंदिरबाली उपखंड की सीमा पर अरावली की दुर्गम और बीहड़ पहाड़ियों के बीच स्थित प्रसिद्ध ‘तिलकेश्वर महादेव मंदिर’ में सावन के महीने में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है. पाली जिले के बाली तहसील की सीमा और उदयपुर जिले के मेवाड़ क्षेत्र के ‘मठ’ गांव के समीप स्थित यह शिवालय इन दिनों प्राकृतिक सौंदर्य और अध्यात्म का अद्भुत केंद्र बना हुआ है. भीमाणा गांव से लगभग 20 किलोमीटर दूर एकांत में बसा यह धार्मिक स्थल मानसून के दौरान हरियाली की चादर ओढ़ लेता है, जिससे यहां की वादियों में कश्मीर जैसा मनोरम दृश्य दिखाई देता है.
पाताल लोक जैसा गर्भगृह और रोमांचक मार्गतिलकेश्वर महादेव मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण इसका प्राकृतिक गर्भगृह और वहां बहता शीतल जलप्रपात (झरना) है. गर्भगृह का नजारा पाताल लोक की भांति प्रतीत होता है. हालांकि, यहां तक पहुंचने की यात्रा अत्यंत चुनौतीपूर्ण और रोमांच से भरी है. श्रद्धालुओं को संकरी, प्राकृतिक पत्थरों से बनी सीढ़ियों और लोहे की जंजीर को पकड़कर सावधानीपूर्वक नीचे उतरना पड़ता है.
झरने से होता है भक्तों का स्वागतशिवलिंग और महादेव की प्रतिमा के दर्शन के लिए अदम्य साहस और आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है. जो श्रद्धालु नीचे उतरने में असमर्थ होते हैं, वे ऊपरी भाग से ही महादेव को नतमस्तक होकर लौट जाते हैं. वहीं, हिम्मत जुटाकर नीचे पहुंचने वाले भक्तों का स्वागत झरने के निरंतर प्रवाहित जल से होता है, जो प्राकृतिक रूप से शिवलिंग का जलाभिषेक करता है.
दूर-दराज से पहुंच रहे श्रद्धालु, शाम 5 बजे बाद आवाजाही बंदतिलकेश्वर महादेव के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा है. सावन के सोमवार सहित पूरे महीने यहां गुजरात, उदयपुर, पाली, सिरोही, जालोर, जोधपुर और बीकानेर से हजारों की संख्या में दर्शनार्थी पहुंच रहे हैं. भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा के मद्देनजर स्थानीय परंपरा के अनुसार शाम 5 बजे के बाद पहाड़ियों में आवाजाही पूर्णतः बंद कर दी जाती है. दुर्गम रास्ता होने के बावजूद भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां खिंचे चले आते हैं.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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August 27, 2026, 18:54 IST



