पति ने की गद्दारी, वीरांगना ने सुहाग से पहले चुनी मातृभूमि की रक्षा; किस्सा वीर क्षत्राणी हीरादे का

Last Updated:October 20, 2026, 16:43 IST
Jalore Veerangana Hirade Story : जालौर में राष्ट्रधर्म के लिए वीरांगना हीरादे ने गद्दारी करने वाले अपने पति वीका दहिया का सिर काट दिया था. यह घटना संवत 1368 की है, जब अलाउद्दीन खिलजी की नजर जालौर पर थी. हीरादे का यह त्याग आज भी मिसाल है. इतिहासकार बंशीलाल सोनी ने लोकल 18 को बताया कि हीरादे के सामने उस समय सबसे बड़ा सवाल अपने परिवार का नहीं, बल्कि जालौर और मातृभूमि की सुरक्षा का था.
ख़बरें फटाफट
जालौर. जालौर के इतिहास में वीरता और बलिदान की कई कहानियां सुनने को मिलती हैं, लेकिन वीर क्षत्राणी हीरादे की कहानी अपने आप में बहुत अलग है. यह कहानी उस समय की है, जब मातृभूमि की रक्षा का सवाल एक महिला के सामने उसके अपने रिश्ते से भी बड़ा बनकर खड़ा हुआ. मान्यता है कि हीरादे ने राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि मानते हुए ऐसा कठोर फैसला लिया, जिसकी चर्चा आज भी जालौर की वीरगाथाओं में होती है.
कहानी संवत 1368 यानी ईस्वी सन 1311 की बताई जाती है. उस समय जालौर पर सोनगरा चौहान शासक कान्हड़देव का शासन था और अलाउद्दीन खिलजी की सेना की नजरें जालौर पर टिकी थीं. इसी दौर में जालौर दुर्ग के एक घर में हीरादे अपने पति वीका दहिया की प्रतीक्षा कर रही थीं.
पति ने खिलजी के सेनापति को दी थी दुर्ग की जानकारी
रात के समय वीका दहिया घर लौटा. उसके पास धन और आभूषणों से भरी एक गठरी थी. हीरादे ने जब उससे धन के स्रोत के बारे में पूछा, तो पति ने पहले बात टालने की कोशिश की. लेकिन बाद में उसने स्वीकार किया कि वह अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति कमालदीन को जालौर दुर्ग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दे चुका है. इसके बदले उसे धन मिला था. इतिहासकार बंशीलाल सोनी ने लोकल 18 को बताया कि हीरादे के सामने उस समय सबसे बड़ा सवाल अपने परिवार का नहीं, बल्कि जालौर और मातृभूमि की सुरक्षा का था. यही कारण है कि उनकी कहानी को राष्ट्रधर्म और त्याग की मिसाल के रूप में याद किया जाता है.
मातृभूमि की रक्षा के लिए लिया कठोर फैसलापति ने हीरादे को समझाने की कोशिश की कि जालौर पर खिलजी का कब्जा होने के बाद उसे बड़ा पद और ऐश्वर्य मिल सकता है. लेकिन हीरादे ने इस सोच को स्वीकार नहीं किया. उनके लिए धन और सुख से ज्यादा महत्वपूर्ण अपनी मातृभूमि के प्रति निष्ठा थी. कहा जाता है कि हीरादे ने पहले अपने पति को गलती स्वीकार करने और महाराजा कान्हड़देव के सामने जाने के लिए समझाया. लेकिन जब वह अपने निर्णय से पीछे नहीं हटा, तो हीरादे ने बेहद कठोर कदम उठाया और अपने पति का सिर धड़ से अलग कर दिया. इसके बाद वह स्वयं महाराजा कान्हड़देव के सामने पहुंचीं और पूरी घटना बताई. लोककथा के अनुसार, हीरादे ने अपने पति का वध इसलिए किया, क्योंकि उसने जालौर दुर्ग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दुश्मन को दी थी.
वीरता और त्याग की मिसाल बनी हीरादे की कहानीहीरादे की कथा यह बताती है कि उस दौर में मातृभूमि के प्रति निष्ठा को कितना महत्वपूर्ण माना जाता था. निजी रिश्ते से ऊपर राष्ट्रधर्म को रखना ही इस कहानी का सबसे बड़ा संदेश है. जालौर की इस वीरांगना की कथा आज भी यही संदेश देती है कि देश और अपनी मिट्टी के प्रति निष्ठा इंसान को कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ रहने की प्रेरणा दे सकती है. यही वजह है कि हीरादे का नाम जालौर की वीरता और त्याग की कथाओं में आज भी सम्मान के साथ लिया जाता है.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Jalor,Jalor,Rajasthan
First Published :
October 20, 2026, 16:43 IST



