पाली का अनोखा ‘जीरो-कॉस्ट’ मार्केट; महीने में एक दिन लगता है मेला, न किराया-न खर्च

पाली. क्या आपने कभी किसी ऐसे मार्केट के बारे में सुना है, जहां दुकान लगाने का न तो कोई किराया देना पड़ता है और न ही बिजली या मेंटेनेंस का कोई खर्च? जी हां, पाली में महीने में एक दिन ऐसा अनोखा बाजार सजता है, जहां बिना एक भी पैसा खर्च किए कोई भी अपनी दुकान लगा सकता है.
हर महीने जब यह मार्केट सजता है, तो माहौल किसी बड़े रंग-बिरंगे मेले जैसा नजर आता है. हम बात कर रहे हैं पाली के 10 तारीख को लगने वाले मिल गेट के उस मार्केट की, जहां कपड़े, हस्तशिल्प, घरेलू सामान से लेकर खाने-पीने के लजीज व्यंजनों तक, यहां सब कुछ एक ही जगह मिल जाता है. खास बात यह है कि इस बाजार का लुत्फ उठाने और खरीदारी करने के लिए सिर्फ शहर ही नहीं, बल्कि पूरे पाली जिले से लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है.
किफायती दाम और बड़ा बाजार
कपड़े, घरेलू सामान, बॉडी केयर प्रोडक्ट्स से लेकर रोजमर्रा की हर जरूरत की चीजें यहां बेहद किफायती दरों पर उपलब्ध होती हैं. पैंट, शर्ट और अन्य कपड़े मात्र 5 से 50 रुपये तक की शुरुआती कीमत में मिल जाते हैं. दिल्ली के बाजारों जैसी रंगत वाला राजस्थान में अपनी तरह का यह अनूठा बाजार है, जहां खरीदारी का माहौल दिल्ली के प्रसिद्ध स्ट्रीट मार्केट्स जैसा महसूस होता है.
मध्यम और मजदूर वर्ग का सहाराकम आय वाले परिवारों और मजदूर वर्ग के लिए यह मेला बजट-फ्रेंडली शॉपिंग का बड़ा जरिया है. मेले का विस्तार एक छोर से दूसरे छोर तक होता है. अगर 10 तारीख को रविवार पड़ जाए, तो खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है, जिसे संभालने में पुलिस प्रशासन को भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है.
शहर की अटूट परंपरासालों से चला आ रहा यह मेला अब पाली की एक सांस्कृतिक परंपरा बन चुका है. यह बाजार न केवल आम जनता को कम बजट में गुणवत्तापूर्ण सामान उपलब्ध कराता है, बल्कि छोटे विक्रेताओं को रोजगार देकर उनकी आर्थिक स्थिति को भी संबल प्रदान करता है. यह बाजार केवल खरीदारों के लिए किफायती सामान का केंद्र नहीं है, बल्कि छोटे व्यापारियों और पटरी विक्रेताओं के लिए आजीविका का बड़ा सहारा भी है. बिना किसी किराए और मेंटेनेंस शुल्क के दुकान लगाने की सुविधा से उन छोटे विक्रेताओं को सीधा लाभ मिलता है, जिनके पास बड़े बाजारों में दुकान लेने का बजट नहीं होता. महीने में एक दिन मिलने वाला यह अवसर कई परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाता है और पाली की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करता है.



