पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर जानिए कि उनके कार्यकाल में देश में क्या बदला, 12 साल में भारत का हुआ कायापलट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन. पिछले डेढ़ दशक से इस अवसर पर हमेशा कुछ न कुछ लिखता आया हूं. इस बार यह सोचने में लगा था कि इतना कुछ लिखा जा चुका है तो फिर थोड़ा अलग क्या हो सकता है. लक्ष्य वही हैं नीतियां भी वही हैं, पीएम मोदी की रफ्तार में जरा भी कमी नहीं आई है. फिर बदला क्या है? बदला तो देश है. बदली तो लोगों की सोच है. बदला तो दुनिया का भारत की तरफ देखने का नजरिया है. ब्रिक्स 2026 के सफल आयोजन ने साबित कर दिया है कि भारत अब दुनिया के अग्रणी देशों की कड़ी का हिस्सा हो चुका है, जिसे नजरअंदाज करके चलना शायद किसी भी देश के लिए आसान नहीं होगा.
अब बात करें 2014 से पहले के भारत की. वह भारत जहां पॉलिसी पैरालिसिस था. वह भारत जहां भ्रष्टाचार का बोलबाला था. वह भारत जहां पीएम से ज्यादा शक्तिशाली होते थे पीएम को चलाने वाले. ऐसी सरकार जिसने जनता का भरोसा खो दिया था. ऐसे माहौल में मोदी भरोसा का आगमन मानो देश और देश की जनता के लिए एक वरदान बन गया. मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने बतौर पीएम शपथ ली. जो तनख्वाह उन्हें सीएम के तौर पर मिली, वह पूरी रकम गुजरात की बालिकाओं की शिक्षा पर दान कर आए. उनके साथ गुजरात से सिर्फ दो सूटकेस आए थे. लेकिन साथ में थी किचन से लेकर उनकी दिनचर्या तक देखने वाली पुरानी टीम, जिसने दिल्ली में भी मोर्चा संभाल लिया था. मोदी भरोसा अपनी टीम पर भी था. पीएम मोदी की खासियत ही यही है कि एक बार जो उन्हें भा गया फिर वह उनके दिल से नहीं उतरता. यह बात देश भर के वे सभी नेता और कार्यकर्ता बता सकते हैं, जिन्होंने उनके साथ पिछले 50 सालों में काम किया.
ऐसा नहीं है कि पीएम मोदी को अपने शासनकाल में चुनौतियां नहीं झेलनी पड़ी हैं. 2014-19 के पहले कार्यकाल में सूटबूट की सरकार, बिहार जैसे राज्य में चुनावी हार, नोटबंदी जैसे फैसलों के बाद तो लगा था कि मानो सरकार के पैर ही उखड़ रहे हैं. लेकिन पीएम मोदी की नीयत और नीतियों पर देश की जनता ने भरोसा जताया और 2019 के नतीजों ने साबित कर दिया कि मोदी गारंटी पर भरोसा कितना बढ़ गया है. 2019-2024 यानी मोदी 2.0 में भी मुश्किलें कुछ कम नहीं आईं. शुरुआत धारा 370 हटाने, तीन तलाक को खत्म करने के कड़े फैसलों से शुरू हुई. लेकिन कोरोना ने मानो विकास की रफ्तार में बेड़ियां लगाने की कोशिश की. इससे भी पीएम मोदी ने उबार लिया. पहली बार भारत ने न सिर्फ दवा ईजाद की, बल्कि उस दवा को पूरे देश की जनता को मुफ्त में बांटा. दुनिया भर के देशों को कोरोना की दवा भेजी गई. इस संकट की घड़ी में दुनिया के सामने भारत एक दोस्त के रूप में उभरा.
बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल पूरे. (फाइल फोटो : रॉयटर्स)
पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में सूटबूट की सरकार और राफेल खरीद में भ्रष्टाचार जैसे आरोपों से सरकार घिर गई थी. फिर पीएम मोदी ने नोटबंदी का फैसला लिया. इस संकट में भी जनता का मोदी भरोसा बना रहा. मोदी 2.0 के दौरान भी शाहीन बाग से लेकर देश भर में प्रदर्शन शुरू हो गए थे. लेकिन पीएम मोदी के धैर्य और जनहित में किए जा रहे फैसलों ने एक बार फिर बाजी पलट दी. विपक्ष की बांटो और सत्ता पाओ की राजनीति भी मुंह के बल गिरी. 10 साल की एंटी इनकंबेंसी पर मोदी गारंटी भारी पड़ी. 2024 में बीजेपी को भले ही 240 सीटें आईं, लेकिन एनडीए गठबंधन को 290 से ज्यादा सीटें मिलीं. यह नंबर कहीं से पीएम मोदी की लोकप्रियता और जनता के उन पर भरोसे में कमी की ओर इशारा नहीं करते हैं. लोकसभा चुनावों के बाद महाराष्ट्र, बिहार और बंगाल की रिकॉर्ड तोड़ जीत ने मोदी भरोसे को और पुख्ता कर दिया है.
अब विपक्ष जेन जी के नाम पर पीएम मोदी विरोध को एक नया रूप देने की कोशिश कर रहा है. लेकिन पीएम मोदी ने भी छात्रों के बीच जाकर बताया है कि उनके कार्यकाल में अब तक क्या-क्या बदला है. पीएम मोदी खुद इंस्टाग्राम, सोशल और डिजिटल मीडियम पर खासे सक्रिय हो चुके हैं. पूरी पार्टी के साथ-साथ सरकार के मंत्रियों को भी निर्देश जा चुका है कि वक्त बदल रहा है, आप सब भी जनता के बीच जाकर उन्हीं की भाषा और शैली में संवाद करो. चुनावी राजनीति जैसी भी हो, लेकिन पीएम मोदी जानते हैं कि 15 साल की सत्ता के बाद 2029 की लड़ाई आसान नहीं है. इसलिए अपने जन्मदिन पर एक बार फिर कोई जश्न नहीं मना रहे, बल्कि पूरी पार्टी और सरकार 17 सितंबर से सेवा पखवाड़ा मनाएगी.
अब बतौर पीएम नरेंद्र मोदी 12 साल पूरे कर रहे हैं, तो यह बताना जरूरी है कि आखिर बदला क्या है.
हम बताते हैं कि देश में बदला क्या है. सबसे पहले तो कोरोना काल से ही देश की 80 करोड़ गरीब जनता को मुफ्त का राशन देने की योजना को मोदी सरकार गांव-गांव तक पहुंचा रही है. एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट योजना के तहत सवा सौ सबसे गरीब और पिछड़े जिलों की पहचान करके उनके उत्थान का काम अधिकारियों को सौंपा. सीमावर्ती गांवों में विकास की रोशनी पहुंचे, इसके लिए पीएम मोदी ने सभी मंत्रियों के लिए सीमा पर मौजूद एक गांव में प्रवास करने का निर्देश भी दिया. जन धन योजना के तहत गरीब जनता के बैंकों में खाते खोले गए. महिलाओं के खातों में सीधा पैसा पहुंचा. पीएम किसान सम्मान निधि के तहत पीएम मोदी ने एक बटन दबाकर करोड़ों किसानों के खाते में पैसे ट्रांसफर किए. बदला यही है 2014 के बाद, वह भी आजादी के 70 साल के बाद. कतार में खड़े आखिरी व्यक्ति तक न केवल सरकारी अनुदान, बल्कि योजनाओं का लाभ सीधा पहुंच रहा है.
बदली है महिलाओं की स्थिति. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा जन आंदोलन बन गया है. स्वच्छता अभियान के तहत गांवों में शौचालय बनाना अनिवार्य बना ताकि खुले में शौच से महिलाओं को मुक्ति मिले. उज्ज्वला योजना के तहत दूर-दराज के गांवों को मुफ्त सिलेंडर दिया गया, ताकि उन्हें धुएं से छुटकारा मिल सके. पीएम मोदी ने ऐलान किया था कि उन्होंने अपनी मां और बहनों को धुएं वाले चूल्हे पर खाना बनाते देखा है, उससे वह देश की गरीब माताओं और बहनों को छुटकारा दिलाना चाहते हैं. लखपति दीदी, ड्रोन दीदी जैसे नए प्रयोगों ने भी महिला शक्ति को आगे आने के लिए प्रेरित किया. सेना से लेकर सभी सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती चली गई. अब यह पीएम मोदी की खामोश वोटर ही अपने वोट की ताकत से बताएंगी कि देश में बदला क्या है.
बदला है भुगतान का तरीका. डिजिटल भुगतान, यूपीआई पेमेंट ने ग्रामीण और गरीब क्षेत्रों में भी लेन-देन को आसान बना दिया है. जो विकसित पश्चिमी देश इस पैमाने पर अब तक नहीं कर पाए, पीएम मोदी की पहल ने वह करिश्मा कर दिखाया है जो भारत में एक क्रांति लेकर आया है. एक बटन मात्र दबाकर पीएम मोदी अब करोड़ों गरीब जनता के खातों में सीधे पैसे डाल रहे हैं. अब छात्रों और जरूरतमंदों को गजेटेड अफसरों के हस्ताक्षर के लिए चक्कर नहीं काटने पड़ते. खुद के द्वारा ही सत्यापित सर्टिफिकेट अब सभी जगहों पर मान्य होते हैं. जनधन-आधार-मोबाइल के तहत तीनों को ऐसा लिंक किया है कि पूरे देश में पेपरलेस काम अबाध गति से बढ़ चला है. यहां तक कि आयकर भरना भी अब आम आदमी के लिए इतना आसान हो गया है कि इस विभाग के पास करदाताओं की संख्या सैकड़ों गुना बढ़ गई है.
बदला है वीआईपी संस्कृति से जुड़ा भारत का मिजाज. पीएम मोदी ने लाल बत्ती संस्कृति पर कानून बनाकर रोक लगा दी. अब किसी नेता के लिए ट्रैफिक नहीं रोका जाता. सायरन बजाने का अधिकार सिर्फ एंबुलेंसों को रह गया है. आलम यह है कि दिल्ली में भी दूर यात्रा करनी हो तो पीएम खुद मेट्रो ट्रेन में जनता से संवाद करते हुए सफर करते हैं. वह दौर भी बदला है जब हर छुट्टी में मंत्री और अधिकारी विदेश की यात्रा पर होते थे. अब न कोई छुट्टी होती है और न ही कोई साप्ताहिक अवकाश मिलता है. पीएम ने साफ कर दिया है कि जनता की सेवा करने आए हैं तो जनता के बीच ही रहें तो बेहतर है. नौकरशाहों को पीएम मोदी ने शुरुआत से ही ऐसा साधा कि अब जनसेवा के अलावा उन्हें कुछ और नहीं सूझता. यहां तक कि सिविल सर्विस प्रतियोगिता में सफल अधिकारियों की मसूरी की ट्रेनिंग का पूरा ढांचा बदल गया है.
पॉलिसी पैरालिसिस से ग्लोबल पावर बनने तक, पीएम मोदी ने 12 साल में भारत को दी नई पहचान. (File Photo : Reuters)
योजनाओं की कोई कमी नहीं रही, लेकिन बदला है तो उन्हें जमीन तक पहुंचाना सुनिश्चित करने का तरीका. पीएमओ में काम करने वाले शीर्ष अधिकारी बताते हैं कि पीएम मोदी किसी भी योजना को तब तक मंजूरी नहीं देते, जब तक उसे जमीन पर क्रियान्वित करने की रूपरेखा उसके साथ न बताई गई हो. तभी तो हर योजना का लाभ सीधा गरीबों तक पहुंच रहा है और दूर-दराज के इलाकों में उनकी जिंदगी का कायाकल्प हो रहा है. यानी बदल रहा है लोगों का मिजाज और उनकी जिंदगी. पीएम किसान सम्मान निधि के तहत किसानों के खातों में सीधा पैसा डालना, उन्हें सीधा बाजार से जोड़ना, फसल के लिए बीमा योजना, सस्ते में उर्वरक देना- किसानों की जिंदगी भी मोदी राज में बदलाव से अछूती नहीं रही है.
बदला क्या है इसकी फेहरिस्त इतनी लंबी है कि चंद वाक्यों में खत्म नहीं होगी. लेकिन पीएम मोदी के जन्मदिन पर यह याद दिलाना भी जरूरी है कि उन्होंने ऐसे कितने कामों को अंजाम दे दिया है जिसका इंतजार पूरा देश ही क्या, पूरी दुनिया में बसे भारतवासी कर रहे थे. इसमें सबसे पहला काम तो मोदी 2.0 के दौरान लिया गया ऐतिहासिक फैसला स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा. यह था कश्मीर से धारा 370 हटाना. इतनी शांति के साथ इस काम को अंजाम दिया गया कि सब दंग रह गए. दूसरा काम जिसके कारण पीएम मोदी को इतिहास याद रखेगा, क्योंकि वह काम तो करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है. वह है कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण. तीन तलाक समाप्त करने का फैसला भी ऐतिहासिक रहा. बुलेट ट्रेन को पटरी पर लाने का काम भी तेजी से चल रहा है. जाहिर है ये इतिहास के पन्नों में दर्ज हो रहे हैं और आने वाली पीढ़ियां पीएम मोदी के इस योगदान को याद रखेंगी.
अंत में जन्मदिन के मौके पर यही लिखना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी, आपने चुनावी राजनीति के शीर्ष पर 25 साल पूरे कर लिए हैं. आपने इस दौरान काफी उतार-चढ़ाव भी देखे हैं. आपने मोदी गारंटी दे-देकर पूरी दुनिया में बसे भारतवासियों के मन में एक मोदी भरोसा कायम किया है. पीएम मोदी बार-बार यही कहते हैं कि अभी उनका लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है. जनता भी जानती है कि देश को आगे ले जाने का काम वह जिस मुकाम तक लेकर आए हैं, उन्हें पूरा करने के लिए और वक्त देना भी जरूरी है. पीएम मोदी के वोटर भी जानते हैं कि अगले चंद साल अब तक लिए फैसलों को अंजाम तक पहुंचाने के लिए जरूरी हैं. तभी तो पूरी पार्टी लगी है एक बार फिर मोदी के जन्मदिन पर सेवा पखवाड़ा मनाने में, ताकि नेता और कार्यकर्ता सब साथ आकर मोदी सरकार की अच्छी बातें जनता के सामने रखें. लड़ाई लंबी है और मुश्किल भी, लेकिन मोदी के शब्दकोश में असंभव शब्द नहीं है. यही बात है जिस पर भारत की जनता भरोसा करती है. यह भरोसा है कि ‘मोदी है तो मुमकिन है’.



