305 निकायों में मेयर की जंग तेज, बीकानेर में कांग्रेस की बगावत, अजमेर-भरतपुर में निर्दलीय गेमचेंजर

जयपुर. राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के बाद अब मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद की कुर्सी के लिए सियासी जोड़-तोड़ तेज हो गई है. प्रदेश के 305 निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी हो गई. चुनाव परिणामों में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने वाले निकायों में अब निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है. खासतौर पर अजमेर, अलवर, पाली और भरतपुर जैसे शहरों में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही बहुमत का आंकड़ा जुटाने की कोशिश में लगे हैं.
वहीं, बीकानेर में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बावजूद मेयर पद के नामांकन के दौरान पार्टी के भीतर बगावत सामने आ गई. पूर्व मंत्री बीडी कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला ने कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल किया, लेकिन कांग्रेस पार्षद नवरत्न डागा ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया. इससे कांग्रेस के लिए अपने ही बोर्ड में मेयर का चुनाव आसान नहीं रहा.
बीकानेर में बहुमत के बावजूद कांग्रेस में बगावत
प्रदेश की 10 नगर निगमों में कांग्रेस को सिर्फ बीकानेर नगर निगम में बहुमत मिला है. यहां कांग्रेस के अनिल कल्ला ने मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल किया. इसी दौरान कांग्रेस पार्षद नवरत्न डागा ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल कर पार्टी के सामने चुनौती खड़ी कर दी. अब कांग्रेस को अपने पार्षदों को एकजुट रखने के साथ मेयर चुनाव में क्रॉस वोटिंग रोकने की चुनौती है.
अजमेर में कांग्रेस की बाड़ेबंदी, भाजपा भी जुटी
अजमेर नगर निगम में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. ऐसे में मेयर की कुर्सी के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही निर्दलीय पार्षदों के समर्थन को लेकर सक्रिय हैं. कांग्रेस ने अपने पार्षदों को बंगलुरु ले जाकर बाड़ेबंदी की है. दूसरी तरफ भाजपा भी बहुमत का आंकड़ा जुटाने के लिए संपर्क और रणनीति में जुटी है. अजमेर में मेयर चुनाव का परिणाम निर्दलीय पार्षदों के रुख से प्रभावित हो सकता है.
अलवर में रिंकल गर्ग ने बढ़ाई कांग्रेस की टेंशन
अलवर नगर निगम में भी मेयर पद को लेकर मुकाबला दिलचस्प हो गया है. कांग्रेस पार्षद रिंकल गर्ग के निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरने से पार्टी के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है. यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए अपने पार्षदों के साथ-साथ निर्दलीय पार्षदों को साधना महत्वपूर्ण होगा.
भरतपुर में निर्दलीयों की भूमिका अहम
भरतपुर नगर निगम में भी भाजपा और कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है. यहां दोनों दलों के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी भी मेयर पद की दौड़ में हैं. खास बात यह है कि भरतपुर में निर्दलीय पार्षदों की संख्या भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों से भी अधिक है. ऐसे में मेयर चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है.
पाली में कांग्रेस खेमे में मारपीट
पाली में मेयर पद के नामांकन के दौरान विवाद सामने आया. कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी का चुनाव चिन्ह जमा करवाकर लौट रहे कांग्रेस विधायक भीमराज भाटी के भाई लक्ष्मण भाटी के साथ मारपीट की घटना सामने आई. इस घटनाक्रम ने नामांकन प्रक्रिया के दौरान स्थानीय सियासी तनाव को और बढ़ा दिया.
भीलवाड़ा और उदयपुर में भाजपा की स्थिति मजबूत
भीलवाड़ा और उदयपुर नगर निगम में चुनाव परिणामों के बाद भाजपा का मेयर बनना तय माना जा रहा है. दोनों शहरों में भाजपा के पास मेयर पद के लिए जरूरी समर्थन मौजूद है. इसके उलट अजमेर, अलवर, पाली और भरतपुर में बहुमत का आंकड़ा स्पष्ट नहीं होने के कारण राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं.
छह नगर पालिकाओं में निर्विरोध चुनाव का रास्ता साफ
मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के नामांकन के दौरान छह नगर पालिकाओं में भाजपा प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता भी साफ हो गया है. इन निकायों में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा प्रत्याशियों के सामने कोई प्रभावी प्रतिद्वंद्वी नहीं रहने से चुनाव की औपचारिकता बाकी रह गई है. अब निगाहें नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद होने वाले अंतिम मुकाबले पर हैं. जहां बहुमत स्पष्ट नहीं है, वहां अगले कुछ दिन भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए अपने पार्षदों को एकजुट रखने और निर्दलीयों का समर्थन जुटाने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगे. अध्यक्ष, सभापति और मेयर पद के चुनाव में अब पार्षदों की संख्या के साथ उनकी एकजुटता भी अहम होगी.



