Rajasthan

बच्चों के लिए रास्ता या मौत का जाल? प्रतापगढ़ में पानी के बीच तने पर चलकर स्कूल पहुंच रहे बच्चे

Last Updated:August 24, 2026, 07:35 IST

Pratapgarh Dangerous School Route: प्रतापगढ़ के अरनोद उपखंड क्षेत्र में ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल तस्वीर सामने आई है. चिकली और उदिया खेड़ी गांव के बीच बारिश के बाद रास्ते में पानी भर जाने से स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ रहा है. सामने आए वीडियो में बच्चे पीठ पर स्कूल बैग और हाथों में किताबें लेकर पेड़ के तने पर संतुलन बनाते हुए पानी से भरा रास्ता पार करते दिखाई दे रहे हैं. नीचे पानी होने के कारण जरा सी चूक से हादसा हो सकता है. बताया जा रहा है कि दोनों गांवों के बीच करीब 20 से 25 घरों की आबादी है और यही रास्ता ग्रामीणों के साथ बच्चों के आवागमन का प्रमुख मार्ग है. ग्रामीणों का कहना है कि समस्या की जानकारी पूर्व विधायक रामलाल मीणा और वर्तमान राजस्व मंत्री हेमंत मीणा को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ. ग्रामीणों ने पक्की सड़क या पुलिया बनाने की मांग की है.

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पानी के बीच पेड़ का तना बना पुल, ऐसे स्कूल जा रहे प्रतापगढ़ के बच्चेZoomप्रतापगढ़ में बच्चे जान जोखिममें डालकर पेड़ के तने पकड़कर पानी से भरा रास्ता पार कर स्कूल जाते हैं

प्रतापगढ़. राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के अरनोद उपखंड क्षेत्र से ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल तस्वीर सामने आई है. चिकली और उदिया खेड़ी गांव के बीच स्कूली बच्चों को बारिश के दौरान पानी से भरे रास्ते को पार करने के लिए पेड़ के तने का सहारा लेना पड़ रहा है. सामने आए वीडियो में बच्चे पीठ पर स्कूल बैग और हाथों में किताबें लेकर एक के पीछे एक पेड़ के तने पर संतुलन बनाते हुए रास्ता पार करते दिखाई दे रहे हैं. रास्ते के नीचे पानी भरा होने के कारण जरा सी चूक होने पर बच्चे पानी में गिर सकते हैं और गंभीर हादसा हो सकता है.

यह स्थिति केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि इस रास्ते से आने-जाने वाले ग्रामीणों के लिए भी परेशानी का कारण बनी हुई है. बताया जा रहा है कि चिकली और उदिया खेड़ी के बीच करीब 20 से 25 घरों की आबादी है. यह रास्ता स्थानीय लोगों के दैनिक आवागमन के साथ बच्चों के स्कूल आने-जाने का प्रमुख मार्ग है. बारिश के दिनों में रास्ते पर पानी भरने से आवाजाही मुश्किल हो जाती है. ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से यहां स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है.

पेड़ के तने से रास्ता पार करते हैं बच्चे

बारिश के दौरान रास्ते में पानी भर जाने के बाद बच्चों के सामने स्कूल पहुंचना चुनौती बन जाता है. बच्चे स्कूल बैग और किताबें लेकर पेड़ के तने पर चलकर जाते हैं. एक-एक करके बच्चे तने के सहारे दूसरी तरफ पहुंचते हैं. नीचे पानी होने के कारण उन्हें बेहद सावधानी से कदम रखना पड़ता है. छोटे बच्चों के लिए यह जोखिम और भी ज्यादा है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार बच्चों के फिसलने या पानी में गिरने का खतरा बना रहता है.

चिकली और उदिया खेड़ी में 20 से 25 घरों की आबादी है

चिकली और उदिया खेड़ी के बीच करीब 20 से 25 घरों की आबादी बताई जा रही है. इस इलाके के लोगों के लिए यही रास्ता रोजमर्रा के आवागमन का प्रमुख माध्यम है. बारिश के दौरान पानी भरने से ग्रामीणों को भी परेशानी होती है. बच्चों को स्कूल भेजना अभिभावकों के लिए चिंता का कारण बन जाता है. ग्रामीण चाहते हैं कि यहां पक्की सड़क या पुलिया का निर्माण कराया जाए, ताकि बारिश के मौसम में भी आवागमन सुचारू रह सके.

जनप्रतिनिधियों को भी बताया, फिर भी समाधान नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी पूर्व विधायक रामलाल मीणा और वर्तमान राजस्व मंत्री हेमंत मीणा को भी दी जा चुकी है. इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है. ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से जल्द इस रास्ते का निरीक्षण कराकर आवश्यक निर्माण कार्य कराने की मांग की है. उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए.

विकास के दावों पर उठ रहे सवाल

एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर स्कूली बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए पेड़ के तने का सहारा लेना पड़ रहा है. यह तस्वीर ग्रामीण इलाकों में सड़क और पुलिया जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े करती है. ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिम्मेदार विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर जल्द कार्रवाई करेगा और बच्चों तथा ग्रामीणों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराया जाएगा.

Location :

Pratapgarh,Rajasthan

First Published :

August 24, 2026, 07:35 IST

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