बीकानेर के महाजन में भारत-अमेरिका युद्धाभ्यास शुरू, 1200 जवान शामिल

Last Updated:September 16, 2026, 09:16 IST
India US Yudh Abhyas 2026: बीकानेर के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत और अमेरिका का संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ शुरू हुआ. इसमें दोनों देशों के 600-600 कुल 1200 सैनिक भाग ले रहे हैं. अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दुश्मन के इलाके में सटीक प्रहार करने की रणनीति को मजबूत बनाना है. युद्धाभ्यास में उन्नत ड्रोन, आधुनिक हथियार और स्वायत्त प्रणालियों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है. पर्वतीय व अर्ध-पर्वतीय क्षेत्रों में साझा युद्ध कौशल बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है. यह अभ्यास दोनों सेनाओं के रणनीतिक तालमेल को नई मजबूती देगा.
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India US Yudh Abhyas 2026: बीकानेर के महाजन में भारत-अमेरिका युद्धाभ्यास शुरू
Bikaner: राजस्थान के बीकानेर स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज से रक्षा क्षेत्र की एक बेहद अहम खबर सामने आई है. भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच द्विपक्षीय सैन्य सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ का औपचारिक आगाज हो चुका है. रेगिस्तान की तपती रेत के बीच दोनों देशों की सेनाएं एक साथ मिलकर व्यापक सामरिक रणनीति और युद्ध कौशल का प्रदर्शन कर रही हैं. यह संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों वैश्विक शक्तियों के बीच गहरे होते रणनीतिक संबंधों और आपसी तालमेल का एक सशक्त उदाहरण पेश करता है.
इस सैन्य अभ्यास का मुख्य केंद्र बिंदु आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान आक्रामक कार्रवाई को अंजाम देना है. दोनों देशों के सैन्य दल दुश्मन को उसी के इलाके में घेरने और सटीक प्रहार करने की रणनीति पर सघन अभ्यास कर रहे हैं. इसके तहत त्वरित प्रतिक्रिया दल तैयार करना, खुफिया इनपुट के आधार पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसी रणनीतियां बनाना और किसी भी आपात स्थिति में सटीक निशाना साधना शामिल है. दोनों सेनाएं एक-दूसरे के बेहतरीन सामरिक अनुभवों, तकनीकों और युद्ध पद्धतियों को साझा कर रही हैं ताकि वैश्विक स्तर पर किसी भी साझा मिशन के दौरान दोनों बल पूरी तरह से तैयार रहें.
1200 जवानों की संयुक्त टुकड़ियां मैदान मेंमहाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित इस बड़े युद्धाभ्यास में दोनों देशों के लगभग 1200 सैनिक भाग ले रहे हैं. इसमें भारतीय सेना के 600 जांबाज जवान और अमेरिकी सेना के 600 कुशल सैनिक शामिल हैं. दोनों टुकड़ियां पूरी मुस्तैदी के साथ विभिन्न प्रकार के कठिन युद्धाभ्यास सत्रों में हिस्सा ले रही हैं. जवानों को वास्तविक युद्ध जैसी जटिल और तनावपूर्ण परिस्थितियों में काम करने का अभ्यास कराया जा रहा है, जिससे दोनों पक्षों के बीच आपसी विश्वास और ऑपरेशनल समन्वय में और अधिक बढ़ोतरी हो सके.
ड्रोन, उन्नत हथियार और स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमालआधुनिक दौर का युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं है, इसलिए इस अभ्यास में अत्याधुनिक रक्षा तकनीक को विशेष रूप से शामिल किया गया है. युद्धाभ्यास के दौरान सर्विलांस ड्रोन, आधुनिक असॉल्ट राइफलें, भारी आर्टिलरी और कई ऑटोनॉमस (स्वायत्त) प्रणालियों का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है. ड्रोन तकनीक की मदद से दुश्मन के ठिकानों की टोह लेने और बिना किसी नुकसान के सटीक हवाई हमलों का अभ्यास किया जा रहा है. नई पीढ़ी के हथियारों और डिजिटल युद्ध प्रणालियों का यह एकीकरण सैनिकों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तकनीकी रूप से सक्षम बनाता है.
पर्वतीय और अर्ध-पर्वतीय क्षेत्रों में युद्ध क्षमता बढ़ाने पर जोरइस अभ्यास का एक बड़ा हिस्सा पर्वतीय और अर्ध-पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों में युद्ध क्षमताओं को निखारने पर केंद्रित है. कठिन और विषम भौगोलिक संरचनाओं में सैनिकों की आवाजाही, संचार व्यवस्था बनाए रखना और दुर्गम इलाकों में लॉजिस्टिक्स सपोर्ट सुनिश्चित करने के तरीकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. दोनों देशों के विशेषज्ञ अधिकारी जवानों को विपरीत परिस्थितियों में जीवित रहने और मुकाबला जीतने की बारीकियों से अवगत करा रहे हैं. यह अभ्यास सीमा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Bikaner,Bikaner,Rajasthan
First Published :
September 16, 2026, 09:16 IST



