बॉलीवुड के 2 खन्ना, 1 का अमिताभ बच्चन ने छीना सिंहासन, दूसरे के 1 बड़े फैसले ने बिग बी को बना दिया सदी का महानायक

Last Updated:September 14, 2026, 17:29 IST
70 और 80 के दशक में बॉलीवुड के इतिहास में स्टारडम में कुछ सबसे बड़े बदलाव देखे गए. यह वह दौर था जब दो ‘खन्ना'(राजेश खन्ना और विनोद खन्ना) बॉलीवुड में छाए हुए थे. हालांकि, अमिताभ बच्चन के आने से इंडियन सिनेमा का माहौल पूरी तरह बदल गया. जहां ‘एंग्री यंग मैन’ की लहर ने पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना का सिंहासन हिला दिया, उनका नंबर वन का ताज छीन लिया. वहीं विनोद खन्ना के अपने करियर के पीक पर अचानक रिटायर होने के फैसले ने अमिताभ बच्चन की सफलता का रास्ता बनाया और उन्हें ‘सदी का महानायक’ बना दिया.
नई दिल्ली. 1960 के दशक के आखिर और 1970 के दशक की शुरुआत में राजेश खन्ना का जादू पूरे देश में छाया हुआ था. लगातार 15 सोलो सुपरहिट के साथ, वह इंडियन सिनेमा के पहले ऑफिशियल ‘सुपरस्टार’ बन गए. फैंस उनकी एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़ते थे और उनके रोमांटिक अंदाज ने दर्शकों का दिल जीत लिया.
1973 की फिल्म ‘जंजीर’ ने बॉलीवुड में एक नए दौर की शुरुआत की. अमिताभ बच्चन में दर्शकों को एक ऐसा हीरो मिला जो स्क्रीन पर सिस्टम के खिलाफ बोलता था. देश के युवा अमिताभ के सॉफ्ट रोमांटिक इमेज के बजाय उनके अग्रेसिव और बागी रवैये से ज्यादा जुड़ने लगे, जिससे राजेश खन्ना की जगह हिलने लगी.
जब अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना ने ‘आनंद’ (1971) और ‘नमक हराम’ (1973) में साथ काम किया, तो सिनेमाई स्टारडम में एक ऐतिहासिक बदलाव आया. ‘नमक हराम’ के रिलीज होने पर क्रिटिक्स और दर्शकों दोनों ने अमिताभ के परफॉर्मेंस की तारीफ की. इस फिल्म ने साफ इशारा कर दिया था कि बॉलीवुड की गद्दी का अगला वारिस कौन बनेगा.
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1970 के दशक के आखिर तक, जब राजेश खन्ना की पॉपुलैरिटी कम होने लगी थी, विनोद खन्ना एक नए एक्शन हीरो के तौर पर उभरे. ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘परवरिश’, ‘अमर अकबर एंथनी’ और ‘हेरा फेरी’ जैसी मल्टी-स्टारर फिल्मों में विनोद खन्ना ने अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर की और अपनी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से बिग बी को बॉक्स ऑफिस पर कड़ी टक्कर दी.
1970 के दशक के आखिर और 1980 के दशक की शुरुआत में विनोद खन्ना अकेले ऐसे एक्टर थे जो स्टारडम और फीस के मामले में अमिताभ बच्चन को टक्कर दे सकते थे. फिल्म ट्रेड पंडितों का भी मानना था कि विनोद खन्ना में अमिताभ को पछाड़ने और बॉलीवुड के नए नंबर 1 बनने का टैलेंट और करिश्मा था.
1982 में अपने करियर के पीक पर विनोद खन्ना ने एक ऐसा कदम उठाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. उन्होंने अचानक ग्लैमरस फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया और रूहानी शांति की तलाश में USA के ओरेगन में ओशो (आचार्य रजनीश) के आश्रम चले गए. इस फैसले ने पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया.
विनोद खन्ना के अचानक रिटायरमेंट ने अमिताभ बच्चन से सबसे बड़ी और मजबूत चुनौती हमेशा के लिए छीन ली. इसके बाद, अमिताभ बच्चन ने 1980 के दशक में बॉक्स ऑफिस पर अपना पूरा दबदबा बनाया. उन्हें कोई चुनौती नहीं दे पाया और इस दौर की ब्लॉकबस्टर फिल्मों ने उन्हें सफलता की ऊंचाई पर पहुंचा दिया, जहां से वे ‘सदी के सुपरस्टार’ बने.
इन दो खन्ना का जिक्र किए बिना बॉलीवुड का इतिहास अधूरा है. जहां अमिताभ बच्चन ने अपने टैलेंट और ‘एंग्री यंग मैन’ की लहर से राजेश खन्ना से सुपरस्टारडम का ताज छीन लिया, वहीं विनोद खन्ना के ओशो आश्रम जाने के फैसले ने अमिताभ के सुपरस्टार बनने की राह की सबसे बड़ी रुकावट को दूर कर दिया.
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September 14, 2026, 17:29 IST



