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भीलवाड़ा के श्मशान में दीपावली पर अनोखा अनुष्ठान, सिर पर खप्पर रखकर होती है कपाल पूजा

Last Updated:November 07, 2026, 11:24 IST

Bhilwara News: भीलवाड़ा के पंचमुखी मोक्ष धाम स्थित मसाणिया भैरवनाथ मंदिर में दीपावली पर 20 सालों से श्मशान भूमि में कपाल पूजा और खप्पर साधना की अनूठी परंपरा निभाई जा रही है. पुजारी रवि खटीक के अनुसार साधक सिर, पीठ व सीने पर जलता खप्पर रखकर सर्वकल्याण व विश्व शांति के लिए देर रात तक साधना करते हैं.

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भीलवाड़ा में 20 साल पुरानी परंपरा, श्मशान में होती है खप्पर साधनाZoomभीलवाड़ा के श्मशान में दीपावली पर अनोखा अनुष्ठान, सिर पर खप्पर रखकर होती है कपाल पूजा

भीलवाड़ा. दीपावली का पावन पर्व पूरे देश में घरों और मंदिरों में रंग-बिरंगे दीप जलाकर सुख-समृद्धि की कामना के साथ मनाया जाता है. वहीं, वस्त्रनगरी भीलवाड़ा शहर के पंचमुखी मोक्ष धाम स्थित मसाणिया भैरवनाथ मंदिर में दीपावली मनाने की परंपरा बिल्कुल अनूठी और अद्भुत है. जहां आम लोग रात के समय श्मशान भूमि में जाने से भी डरते हैं, वहीं इस मंदिर में साधक दीपावली की देर रात श्मशान के बीच बैठकर तंत्र-मंत्र और विशेष कपाल पूजा व खप्पर साधना करते हैं.

मसाणिया भैरवनाथ मंदिर में दीपावली के अवसर पर श्मशान भूमि में कपाल पूजा और खप्पर साधना का यह विशेष अनुष्ठान पिछले 20 वर्षों से लगातार बिना किसी रुकावट के किया जा रहा है. यह साधना दीपावली से करीब 10 दिन पूर्व ही विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ शुरू हो जाती है. देर रात तक चलने वाले मंत्रोच्चार, श्मशान की शांति और भैरवनाथ की तंत्र-मंत्र साधना का यह दृश्य श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों के लिए हमेशा विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है.

सिर, पीठ और सीने पर खप्पर रखकर साधक करते हैं पूजाइस अनुष्ठान में प्रयुक्त होने वाले विशेष खप्पर में कपूर, शुद्ध देशी घी, पंचधूप और नारियल सहित कई प्रकार की तांत्रिक व धार्मिक पूजन सामग्रियों से अग्नि प्रज्वलित की जाती है. इसके बाद साधक जलते हुए अंगारों से युक्त खप्पर को अपने मस्तिष्क (कपाल), हाथों, पीठ या सीने पर रखकर कठिन साधना करते हैं. इस साधना की खासियत यह है कि इसमें प्रतिदिन साधक बदलते हैं और अलग-अलग तांत्रिक व धार्मिक विधियों से भैरवनाथ की आराधना पूरी की जाती है.

लोक कल्याण और विश्व शांति के लिए की जाती है साधनामंदिर के पुजारी रवि खटीक ने इस अनूठी परंपरा के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जहां आम लोग अपने-अपने घरों को दीपों से रोशन कर सुख-समृद्धि मांगते हैं, वहीं वे और उनके साधक श्मशान की इस तपोभूमि पर बैठकर सर्वकल्याण और विश्व शांति की कामना करते हैं. इस अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य यह है कि सभी परिवार सकुशल रहें, समाज में शांति बनी रहे, किसी भी परिवार पर आने वाली बलाएं और बाधाएं दूर हों तथा पूरे राजस्थान प्रदेश व विश्व में खुशहाली आए.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Bhilwara,Bhilwara,Rajasthan

First Published :

November 07, 2026, 11:24 IST

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