भूलना, सिरदर्द और पढ़ाई में मन न लगना.. बच्चों में दिखे ये संकेत, तो हो जाएं सावधान

फरीदाबाद: बच्चा अगर हमेशा पढ़ाई में अच्छा रहा हो और अचानक उसके नंबर गिरने लगें, याददाश्त कमजोर लगे या पढ़ाई में मन न लगे, तो माता-पिता अक्सर इसे मोबाइल, लापरवाही या तनाव से जोड़ देते हैं. लेकिन हर बार वजह इतनी सामान्य नहीं होती. कुछ मामलों में बच्चे के व्यवहार, ध्यान और सीखने की क्षमता में बदलाव किसी न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत भी हो सकता है. आखिर कौन-से बदलाव सामान्य हैं और किन संकेतों पर Pediatric Neurologist से सलाह लेनी चाहिए. यही जानना हर माता-पिता के लिए जरूरी है.
डॉक्टर ने बताया बच्चे के अचानक कमजोर होने का कारण
Local18 से बातचीत में डॉ. साक्षी ओझा बताती हैं कि मैं एक Pediatric Neurologist हूं. मैं बच्चों के दिमाग से संबंधित बीमारियों का इलाज करती हूं और वर्तमान में मैं अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद में कार्यरत हूं. अच्छा बच्चा अचानक पढ़ाई में कमजोर क्यों होने लगता है. इस पर साक्षी ओझा बताती हैं कि देखिए, बच्चा अगर अच्छा पढ़ने वाला बच्चा है और आपको अचानक पढ़ाई में कमजोर लगने लगता है, तो सबसे पहले एक पेरेन्ट्स के तौर पर आपको बच्चे के स्कूल टीचर या उसके ट्यूशन टीचर से संपर्क करना चाहिए. उनका ओपिनियन लेना चाहिए.
अगर जो आपका ओपिनियन है, वही ओपिनियन बच्चे के टीचर को भी लग रहा है, तो हमें पहले यह रूल आउट करना चाहिए कि कहीं बच्चा किसी तरह के इमोशनल स्ट्रेस या डिस्ट्रेस में तो नहीं है या बच्चे का स्क्रीन टाइम, मोबाइल टाइम बहुत ज्यादा तो नहीं बढ़ गया है या किसी और प्रकार की गतिविधि में उसकी रुचि ज्यादा तो नहीं बढ़ गई है, जिस वजह से वह पढ़ाई पर कम ध्यान देने लगा है. पहले स्टेप में हमें यही सब चीजें रूल आउट करनी चाहिए और मिलकर इस चीज के समाधान की तरफ आगे बढ़ना चाहिए.
मोबाइल तनाव के अलावा न्यूरोलॉजिकल कारण भी संभव
क्या मोबाइल और तनाव के अलावा न्यूरोलॉजिकल कारण भी हैं. इस पर साक्षी ओझा बताती हैं कि बिल्कुल हो सकता है. मोबाइल और तनाव के अलावा न्यूरोलॉजिकल कारण डेफिनेटली हो सकता है. यहां पर न्यूरोलॉजिकल कारण यूजुअली या तो अचानक स्टार्ट होंगे. एक्यूटली आपको ऐसा लगेगा कि अच्छा खासा पढ़ रहा था, अचानक अटेंशन में डिक्लाइन होने लगा है. टीचर्स की तरफ से भी सेम कंप्लेंट्स आने लगी हैं. बच्चा ध्यान नहीं दे पा रहा है. कुछ न्यूरोलॉजिकल और न्यूरो डेवलपमेंटल डिसऑर्डर्स होते हैं, जैसे ADHD, जिसमें इनअटेंशन होता है.
बच्चा चाहकर भी एक चीज पर फोकस नहीं कर पाता है, क्योंकि उसका दिमाग उस वक्त रेस्टलेस है. इधर-उधर भटक रहा है. किस तरह के बदलाव आने लगते हैं बच्चों में. आमतौर पर इसी तरीके से प्रेजेंट करते हैं कि बच्चा फोकस नहीं दे पा रहा है. क्लास में ज्यादा देर अटेंशन नहीं दे पाता है.
साक्षी ओझा बताती है कि कुछ टाइप की एपिलेप्सी और सीजर होते हैं, जिनको हम एब्सेंस सीजर कहते हैं, जो कि बेसिकली डे ड्रीमिंग एपिसोड जैसे होते हैं. बच्चा एक सेंटेंस सुनेगा, एक सेंटेंस नहीं सुनेगा, स्किप कर जाएगा. या फिर अगर कोई माइग्रेन की प्रॉब्लम चल रही हो, बच्चा लगातार हेडेक से परेशान है, जिस वजह से वह फोकस नहीं कर पा रहा है या दिखाई देने में प्रॉब्लम है. लास्ट बेंच पर बैठ रहे हैं. क्लास में बोर्ड पर क्या लिखा है, उनको दिखाई नहीं दे रहा है, सुनाई नहीं दे रहा है. इस वजह से उनका एकेडमिक परफॉर्मेंस खराब हो रहा है. तो कोई भी चीज अगर अचानक होती है और अगर वह पर्सिस्टेंट है, लगातार आप वो कमियां नोटिस कर रहे हैं, तो डेफिनेटली न्यूरोलॉजिकल या न्यूरो डेवलपमेंटल कॉज हो सकते हैं.
भूलना सिरदर्द और खोए रहना चेतावनी संकेत हैं
भूलना, खोए रहना, सिरदर्द चेतावनी संकेत हो सकते हैं. इस पर साक्षी ओझा बताती हैं कि बिल्कुल हो सकता है. बार-बार भूल जाना, पुरानी चीजें जो याद थीं, अचानक बच्चे को चीजें याद नहीं आ रही हैं. सिर में दर्द हो रहा है, स्पेशली सुबह-सुबह उठते के साथ बच्चा सिर में सीरियस पेन बता रहा है. हेडेक के साथ वोमिटिंग हो रही है. विजुअल प्रॉब्लम हो रही है. धुंधला दिख रहा है, एक का दो दिख रहा है. ये सब चीजें कहीं न कहीं आपको न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की तरफ का संकेत हैं.
इन संकेतों पर न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लें जरूर
बच्चे को न्यूरोलॉजिस्ट कब दिखाना जरूरी हो जाता है. इस पर साक्षी ओझा बताती हैं कि अगर ये संकेत अचानक दिखाई दें और लगातार बने रहें, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. हालांकि, एक दिन पढ़ाई में मन न लगना या खराब दिन होना चिंता की बात नहीं है. अगर ये चीजें अचानक हुई हैं और लगातार हो रही हैं, आपको भी नोटिस में आ रही हैं, स्कूल में टीचर्स को भी नोटिस में आ रही हैं.
साथ में इस टाइप के कुछ साइंस एंड सिम्टम्स नजर आ रहे हैं कि सिर दर्द होता रहता है, पूरा दिन रहता है, रात की नींद डिस्टर्ब हो गई है या बच्चा जिन चीजों में पहले रुचि लेता था, उन चीजों में रुचि नहीं ले पा रहा है. अब किसी चीज में इंटरेस्ट नहीं ले पा रहा है. ये सब कहीं न कहीं आपको ये इंडिकेट करता है कि या तो आप अपने पीडियाट्रिशियन से मिले और जरूरत पड़ने पर एक पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट से मिलें.



