Rajasthan

राजस्थान निकाय चुनाव के बाद पार्षदों की बाड़ेबंदी पर घमासान, खैरथल में अपहरण का आरोप तो करौली में बदला बयान

जयपुर. राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद अब मेयर, सभापति और अध्यक्ष की कुर्सी के लिए पार्षदों की गिनती का खेल चल रहा है. इसी बीच पार्षदों की बाड़ेबंदी और उन्हें अपने पक्ष में रखने को लेकर कई जगह विवाद सामने आ रहे हैं. खैरथल में कांग्रेस के निर्वाचित पार्षद भगवान दास के कथित अपहरण का मामला सामने आया है. वहीं करौली में नवनिर्वाचित कांग्रेस पार्षद उस्मान खान के अपहरण का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई. पुलिस ने बाद में उस्मान खान को दस्तयाब कर लिया. लेकिन इसके बाद पार्षद ने वीडियो जारी कर अपहरण की बात को ही गलत बता दिया और कहा कि वह अपनी मर्जी से गया था.

खैरथल नगर परिषद के वार्ड नंबर 20 से कांग्रेस के निर्वाचित पार्षद भगवान दास को लेकर मामला सामने आया है. उनके बेटे नितिन कुमार ने खैरथल थाने में शिकायत दी है. शिकायत में ओमप्रकाश रोघा, गिरीश डाटा सहित अन्य लोगों पर भगवान दास को जबरन गाड़ी में बैठाकर ले जाने का आरोप लगाया गया है. परिवार की ओर से दी गई शिकायत के अनुसार, नगर निकाय चुनाव का परिणाम घोषित होने के बाद भगवान दास घर लौट रहे थे. इसी दौरान रास्ते में उन्हें कथित तौर पर जबरन गाड़ी में बैठा लिया गया. इसके बाद परिवार के लोगों ने अपने स्तर पर काफी तलाश की, लेकिन भगवान दास का पता नहीं चल सका. मामले की जानकारी मिलने के बाद भाजपा के पूर्व विधायक रामहेत सिंह यादव, भाजपा जिला अध्यक्ष महा सिंह चौधरी, प्रभारी बलवान सिंह यादव सहित बड़ी संख्या में लोग भगवान दास के परिवार के साथ खैरथल थाने पहुंचे. यहां मामले को लेकर पुलिस को शिकायत दी गई.

रोघा परिवार पर डराने-धमकाने के आरोप भी लगाएथाने पहुंचे लोगों की ओर से ओमप्रकाश रोघा और रोघा परिवार पर डराने-धमकाने और वोट लेने के आरोप भी लगाए गए. हालांकि ये आरोप शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से लगाए गए हैं. मामले की जांच के बाद ही इन आरोपों की पूरी तस्वीर सामने आएगी. परिजनों ने पुलिस से भगवान दास को सकुशल बरामद करने और मामले में कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. शिकायत खैरथल थाना अधिकारी और डीएसपी लाल सिंह यादव को दी गई है. पुलिस मामले में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है. खैरथल नगर परिषद के वार्ड नंबर 20 से जुड़े पार्षद की जानकारी राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है, हालांकि मौजूदा मामले से उस रिकॉर्ड का सीधा संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता.

करौली में पार्षद के अपहरण की FIR, तीन नामजदउधर करौली नगर परिषद में भी पार्षदों की बाड़ेबंदी को लेकर मामला पुलिस तक पहुंच गया. यहां नवनिर्वाचित कांग्रेस पार्षद उस्मान खान के कथित अपहरण को लेकर एफआईआर दर्ज कराई गई. एफआईआर हाजी रुखसार अहमद की ओर से दर्ज कराई गई. उन्होंने अपने छोटे भाई और नवनिर्वाचित पार्षद उस्मान खान के अपहरण का आरोप लगाया. मामले में पूर्व विधायक लाखन सिंह कटारिया समेत तीन लोगों को नामजद किया गया है. अमीनुद्दीन खान और वीर सिंह मीणा गढ़ी के खिलाफ भी मामला दर्ज होने की बात सामने आई है. शिकायत में आरोप लगाया गया कि पार्षद उस्मान खान को अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए बंधक बनाकर रखा गया. मामला सामने आने के बाद कोतवाली थाना पुलिस सक्रिय हुई और पार्षद उस्मान खान को दस्तयाब कर लिया. पुलिस की ओर से बताया गया कि नवनिर्वाचित पार्षद को दस्तयाब कर लिया गया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.

पुलिस ने दस्तयाब किया तो पार्षद ने जारी कर दिया वीडियोमामले में सबसे बड़ा मोड़ उस समय आया जब पार्षद उस्मान खान ने खुद एक वीडियो जारी किया. वीडियो में उन्होंने एफआईआर में लगाए गए अपहरण के आरोपों को गलत बताया. उस्मान खान ने कहा कि वह किसी के दबाव में नहीं हैं. उन्होंने खुद को कांग्रेस का प्रत्याशी बताया और कहा कि वह कांग्रेस में ही हैं और कांग्रेस के साथ रहेंगे. पार्षद ने यह भी कहा कि वह अपनी मर्जी से वापस आए हैं. उन्होंने खाली स्टांप और चेक पर साइन कराने की बात से भी इनकार किया. यानी जिस मामले में उनके भाई की शिकायत के आधार पर अपहरण की एफआईआर दर्ज हुई, उसी मामले में खुद पार्षद की ओर से जारी वीडियो में अलग तस्वीर सामने आई.

बाड़ेबंदी के बीच बढ़ी सियासी हलचलराजस्थान में इस समय नगर निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर पार्षदों की बाड़ेबंदी चल रही है. कई जगह पार्टियां अपने पार्षदों को एक साथ रखने में जुटी हैं. वजह साफ है. जिन निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां एक-एक पार्षद का समर्थन भी पूरा समीकरण बदल सकता है. इसी वजह से चुनाव परिणाम आने के बाद पार्षदों को लेकर खींचतान बढ़ गई है. एक तरफ पार्टियां अपने पार्षदों को साथ रखने की कोशिश कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बागी और निर्दलीय पार्षद भी अपने फैसले को लेकर अलग रास्ता अपना रहे हैं. खैरथल और करौली के दोनों मामले इसी माहौल में सामने आए हैं. लेकिन दोनों मामलों में तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है. खैरथल में परिवार की शिकायत के आधार पर जबरन ले जाने का आरोप लगाया गया है और पुलिस मामले की जांच कर रही है. वहीं करौली में एफआईआर के बाद पार्षद को पुलिस ने दस्तयाब किया, लेकिन पार्षद ने खुद वीडियो जारी कर अपहरण के आरोप को गलत बताया है.

आरोपों में कितनी सच्चाईअब दोनों मामलों में पुलिस जांच से यह साफ होगा कि असल घटनाक्रम क्या था और पार्षदों को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है. फिलहाल निकाय चुनाव के बाद चल रही सियासी खींचतान के बीच इन दोनों घटनाओं ने बाड़ेबंदी की राजनीति को फिर चर्चा में ला दिया है.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj