राजस्थान निकाय चुनाव में बीजेपी की जीत, लेकिन निर्दलीय बने किंगमेकर, दिग्गजों के गढ़ में उलटफेर

जयपुर. राजस्थान के 309 नगरीय निकाय चुनावों में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अगुवाई में बीजेपी ने कांग्रेस को शिकस्त दी है, लेकिन चुनाव नतीजों की सबसे बड़ी कहानी निर्दलीयों की मजबूत मौजूदगी बनकर सामने आई है. कई नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में बीजेपी और कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से दूर हैं. ऐसे में बोर्ड बनाने से लेकर मेयर, सभापति और पालिका अध्यक्ष के चुनाव तक निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद अहम हो गई है. यानी बीजेपी भले ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो, लेकिन कई जगह सत्ता की चाबी निर्दलीयों के हाथ में है.
जयपुर स्थित बीजेपी कार्यालय में निकाय चुनाव में जीत का जश्न मनाया गया. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का मुंह मीठा कराया गया, उन्हें पगड़ी पहनाई गई और आतिशबाजी की गई. मुख्यमंत्री ने चुनाव की पूरी कमान संभाल रखी थी. रणनीति बनाने से लेकर रोड शो और प्रचार तक वे लगातार मैदान में सक्रिय रहे. ऐसे में इन चुनावों को मुख्यमंत्री के करीब ढाई साल के कामकाज पर शहरों में एक तरह का जनमत संग्रह भी माना जा रहा था. नतीजों के बाद बीजेपी ने इसे सरकार की नीतियों और नेतृत्व की जीत बताया.
बीजेपी के दिग्गजों के गढ़ में झटका
हालांकि बीजेपी के कई दिग्गज नेता अपने गृह क्षेत्र और प्रभाव वाले इलाकों में पार्टी को बहुमत नहीं दिला सके. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गृह क्षेत्र झालावाड़ में बीजेपी को झटका लगा. उनके बेटे और सांसद दुष्यंत सिंह के संसदीय क्षेत्र बारां-झालावाड़ में बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी ने 60 में से 31 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया. बीजेपी यहां तीसरे स्थान पर रही. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के गृह क्षेत्र अटरू में भी बीजेपी हार गई. प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में बीजेपी बहुमत से दूर रही. केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के संसदीय क्षेत्र बीकानेर में नगर निगम में कांग्रेस बहुमत में आ गई. केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के अलवर, गजेंद्र सिंह शेखावत के जोधपुर और कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी के संसदीय क्षेत्र अजमेर में भी बीजेपी बहुमत हासिल नहीं कर सकी.
कांग्रेस के कई दिग्गज भी नहीं बचा पाए गढ़
कांग्रेस की स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं रही. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने गृह क्षेत्र जोधपुर में कांग्रेस को अपने वार्ड तक में जीत नहीं दिला सके. हालांकि सचिन पायलट टोंक में कांग्रेस का परिषद बोर्ड बनाने में सफल रहे. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में भी नगर निगम में निर्दलीय बीजेपी और कांग्रेस से अधिक सीटें जीतकर आए हैं. यहां निर्दलीयों की भूमिका बोर्ड गठन में निर्णायक होगी.
निर्दलीय तय करेंगे कि मेयर और बोर्ड किस पार्टी का बनेगा
इन चुनावों में निर्दलीय पार्षद बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं. इनमें बड़ी संख्या बीजेपी और कांग्रेस के बागी उम्मीदवारों की बताई जा रही है. 10 नगर निगमों में चार पर बीजेपी और एक पर कांग्रेस को बहुमत मिला है, जबकि पांच निगमों में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला. ऐसे में यहां निर्दलीय तय करेंगे कि मेयर और बोर्ड किस पार्टी का बनेगा. 47 नगर परिषदों में भी 28 में किसी दल को बहुमत नहीं मिला. बीजेपी ने 12 और कांग्रेस ने 6 नगर परिषदों में जीत दर्ज की, जबकि बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी ने बहुमत हासिल किया. 252 नगर पालिकाओं में बीजेपी 149 पर जीतने में कामयाब रही, जबकि कांग्रेस ने 95 नगर पालिकाओं में जीत दर्ज की. आठ पालिकाओं में निर्दलीयों का दबदबा रहा.
2265 निर्दलीयों ने जीता चुनाव
अब तक 10,245 वार्डों में से 10,205 वार्डो के नतीजे घोषित हो चुके हैं. इनमें बीजेपी ने 4,167 और कांग्रेस ने 3,603 वार्ड जीते हैं, जबकि निर्दलीयों ने 2,265 वार्डों में जीत दर्ज की है. वहीं रालोपा ने ने 63 और आप पार्टी ने 42 सीटों पर कब्जा जमाया है. ऐसे में साफ है कि बीजेपी-कांग्रेस के बीच मुकाबले के बावजूद कई जगह बोर्ड की सत्ता निर्दलीयों के समर्थन से ही तय होगी. अब सभी की नजर 21 सितंबर पर है, जब मेयर, सभापति और पालिका अध्यक्ष के चुनाव होंगे. यही दिन तय करेगा कि चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टियां कितने बोर्ड अपने पक्ष में कर पाती हैं और निर्दलीय किसके साथ खड़े होते हैं.



