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राजस्थान में प्रसूताओं के मौत की जांच में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को लेकर संदेह, जैक्सन लैबोरेट्रीज़ के लाइसेंस किए रद्द

Last Updated:June 26, 2026, 20:51 IST

Oxytocin Injections: केंद्र सरकार ने ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन से जुड़े मामले में बड़ा कदम उठाते हुए जैक्सन लैबोरेट्रीज़ की पंजाब और हिमाचल प्रदेश स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं. CDSCO और राज्य ड्रग रेगुलेटर की संयुक्त जांच में GMP मानकों में गंभीर खामियां सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई. राजस्थान में प्रसूताओं की मौत के मामलों से जुड़े इस प्रकरण की जांच तेज कर दी गई है, जबकि केंद्र ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि दवा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा और जांच अभी जारी है.राजस्थान केस से बढ़ा विवाद, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पर केंद्र का बड़ा एक्शनZoom

जयपुर. ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन से जुड़े कथित अनियमितता और गुणवत्ता में कमी के मामले में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. जैक्सन लैबोरेट्रीज़ की पंजाब और हिमाचल प्रदेश स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं. यह कार्रवाई केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और राज्य ड्रग रेगुलेटर की संयुक्त जांच के बाद की गई है.

जांच रिपोर्ट में दवा निर्माण के दौरान गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (GMP) से जुड़े कई नियमों के उल्लंघन और गंभीर खामियां पाए जाने का दावा किया गया है. इन्हीं आधारों पर कंपनी की यूनिट्स पर यह कठोर कदम उठाया गया है. सरकार का कहना है कि दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा.

राजस्थान में मातृ मृत्यु मामलों से जुड़ाव

यह मामला तब और गंभीर हो गया जब राजस्थान में कुछ प्रसूताओं (माताओं) की मौत के मामलों में इस्तेमाल किए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को लेकर कंपनी का नाम सामने आया. इसके बाद राज्य और केंद्र स्तर पर जांच प्रक्रिया तेज कर दी गई. हालांकि, अभी यह स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि मौतों का सीधा कारण यही दवा थी या नहीं. केंद्र सरकार ने राजस्थान सरकार से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. फिलहाल जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की गहन समीक्षा कर रही हैं ताकि वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा

इस मामले को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी भारत सरकार से जानकारी मांगी है. हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि WHO द्वारा जानकारी मांगना एक सामान्य अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया है और अभी तक किसी भी पक्ष को दोषी नहीं ठहराया गया है. फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है. केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर रिपोर्टों का इंतजार किया जा रहा है. अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि आगे और गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो सख्त कार्रवाई और भी की जा सकती है.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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