मानसून में पालक-पत्तागोभी खाना पड़ सकता है भारी, जानें किन सब्जियों से करें परहेज

मिर्जापुर: बारिश के मौसम में अगर आप पत्तेदार सब्जियों का सेवन करते हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. बरसात के दिनों में पत्तेदार सब्जियां खाने से इंफेक्शन फैलने और बीमार पड़ने का खतरा बढ़ सकता है. मिट्टी के संपर्क में रहने वाली सब्जियों में कीटाणु और परजीवी पाए जाने की आशंका अधिक रहती है, जो सामान्य तरीके से धोने के बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं होते हैं. ऐसे में कोशिश करनी चाहिए कि बारिश के मौसम में पत्तेदार सब्जियों का सेवन कम या पूरी तरह बंद कर दें.
पत्तेदार सब्जियों से क्यों बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा?
मंडलीय अस्पताल की डाइटीशियन डॉ. ज्योति सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में पत्तागोभी, पालक, चौराई जैसी पत्तेदार सब्जियों से परहेज करना चाहिए. इसके अलावा, जो सब्जियां जमीन की सतह पर उगती हैं और जिनका मिट्टी से सीधा संपर्क होता है, उनमें भी संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है.
उन्होंने बताया कि घर लाकर सब्जियों को कितनी भी अच्छी तरह धो लिया जाए, फिर भी उनमें कुछ कीटाणु या परजीवी रह सकते हैं. यही वजह है कि बारिश के मौसम में हरी पत्तेदार सब्जियों से दूरी बनाना बेहतर होता है. धनिया जैसी पत्तेदार चीजों से बनी चटनी का सेवन भी इस मौसम में सावधानी से करना चाहिए. भले ही ये सब्जियां घर के गमले में उगाई गई हों, फिर भी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है.
मिट्टी में मौजूद परजीवी बन सकते हैं परेशानी का कारण
डॉ. ज्योति सिंह के अनुसार, मिट्टी में मौजूद कुछ परजीवी बारिश के मौसम में आसानी से खाने के संपर्क में आ सकते हैं और शरीर में पहुंच सकते हैं. इस दौरान इनके सक्रिय होने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे परजीवी शरीर में पहुंचकर पोषक तत्वों की कमी समेत अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं.
उन्होंने बताया कि जो भी सब्जियां पकाने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं, उन्हें अच्छी तरह धोना चाहिए. सब्जियों को धोते समय पानी में थोड़ा नमक या सिरका डालकर साफ किया जा सकता है. हालांकि, सब्जियों की स्वच्छता के लिए अच्छी तरह धोना और उचित तरीके से पकाना सबसे जरूरी है.
लौकी, नेनुआ और भिंडी को डाइट में करें शामिल
डॉ. ज्योति सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में सभी सब्जियों से परहेज करने की जरूरत नहीं है. लौकी, नेनुआ, भिंडी और करेला जैसी सब्जियां, जो जमीन की सतह से ऊपर या बेल पर उगती हैं, उन्हें डाइट में शामिल किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में सब्जियों की उपलब्धता कम हो जाती है. ऐसे में पारंपरिक व्यंजनों को भी डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है. चने या दाल की सब्जी, बेसन-गट्टे की सब्जी और कोफ्ते जैसे व्यंजन इस मौसम में अच्छे विकल्प हो सकते हैं.
सुरन खाने से भी करें परहेज
डॉ. ज्योति सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में सब्जियों की उपलब्धता कम होने के कारण कई लोग सूरन यानी जिमीकंद का सेवन शुरू कर देते हैं. हालांकि, जमीन के अंदर उगने वाली सब्जियों में भी मिट्टी के संपर्क के कारण संक्रमण का खतरा हो सकता है. इसलिए इस मौसम में सूरन के सेवन से भी बचना बेहतर है.
अगर कोई व्यक्ति इसका सेवन करता है, तो उसे अच्छी तरह साफ करना चाहिए. काटने के बाद भी इसे अच्छी तरह धोना जरूरी है. हालांकि, सब्जियों को काटने के बाद बार-बार धोने से कुछ पोषक तत्व कम हो सकते हैं, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में सब्जियों को काटने से पहले अच्छी तरह धोना बेहतर माना जाता है.
बारिश में साफ-सफाई का रखें विशेष ध्यान
डाइटीशियन ने बताया कि बारिश के मौसम में सब्जियों के साथ-साथ हाथों की साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए. सब्जियां काटने से पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह धोना जरूरी है. किसी भी तरह का संक्रमण गंदे हाथों के जरिए शरीर में पहुंच सकता है.
इसलिए बारिश के मौसम में भोजन बनाने से लेकर सब्जियों की सफाई तक स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. सही तरीके से साफ की गई और अच्छी तरह पकाई गई सब्जियों का सेवन करके संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सकता है.



