रात में BJP जॉइन, तड़के कांग्रेस का दुपट्टा, फिर मारी पलटी, पार्षद राईस खान का हाईवोल्टेज ड्रामा

जयपुर. राजस्थान नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद जयपुर में मेयर चुनाव से पहले पार्षदों को अपने पाले में करने की कोशिशों के बीच किशनगढ़ विधानसभा क्षेत्र के वार्ड-109 से निर्दलीय जीते राईस खान को लेकर शुक्रवार को दिनभर सियासी ड्रामा चलता रहा. एक रात पहले भाजपा में शामिल होने की तस्वीर और सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई, इसके कुछ घंटे बाद राईस खान ने खुद को भाजपा से अलग बताते हुए कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े होने का दावा कर दिया. इसके बाद शुक्रवार दोपहर उन्होंने एक और वीडियो जारी किया और भाजपा में शामिल होने की बात दोहराई. इस बार उन्होंने धमकियां मिलने और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. पूरे घटनाक्रम ने मेयर चुनाव से पहले जयपुर की स्थानीय राजनीति में चल रही जोड़-तोड़ को चर्चा के केंद्र में ला दिया है.
राईस खान ने वार्ड-109 से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीता है. उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी और किशनगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक अमीन कागजी के करीबी माने जाने वाले पूर्व पार्षद मोहम्मद अय्यूब को हराया. चुनाव परिणाम आने के बाद से ही राईस खान की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी. मेयर चुनाव में पार्षदों के समर्थन को लेकर चल रही कवायद के बीच गुरुवार रात भाजपा नेताओं ने उन्हें पार्टी में शामिल कराने की तस्वीरें और जानकारी सोशल मीडिया पर साझा कर दी.
प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ से दिलाई सदस्यता
गुरुवार रात करीब 8 बजे भाजपा नेताओं की ओर से राईस खान के भाजपा में शामिल होने की जानकारी सामने आई. भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने उन्हें पार्टी का दुपट्टा पहनाया और सदस्यता दिलाई. किशनगढ़ विधानसभा से भाजपा के प्रत्याशी रहे चंद्र मनोहर बटवाड़ा भी इस दौरान मौजूद थे. दोनों नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट से राईस खान के भाजपा में शामिल होने की पोस्ट शेयर की गई. चंद्र मनोहर बटवाड़ा ने पोस्ट में वार्ड-109 में करीब 45 साल बाद भाजपा की जीत का जिक्र करते हुए राईस खान को बधाई दी. तस्वीरें सामने आने के बाद वार्ड में राजनीतिक हलचल बढ़ गई. राईस खान के भाजपा में जाने की खबर के बाद उनके समर्थकों की ओर से विरोध की बात सामने आई.
रात 3 बजे सामने आया पहला यू-टर्न
विरोध बढ़ने के बाद रात करीब 3 बजे राईस खान का एक वीडियो सामने आया. इसमें उन्होंने कांग्रेस का दुपट्टा पहनकर भाजपा में शामिल होने से इनकार किया. राईस खान ने कहा कि उन्होंने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ से मुलाकात की थी और उन्हें भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया. उन्होंने अपनी विचारधारा कांग्रेस से जुड़ी होने की बात कही. इस मामले के बाद कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने भी राईस खान को लेकर प्रतिक्रिया दी और भाजपा पर निशाना साधा. कागजी ने पार्षद को भाजपा की कठपुतली तक बताया. इसके बाद मामला और ज्यादा राजनीतिक हो गया.
सोशल मीडिया पोस्ट ने गर्म किया सियासी पारा
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. शुक्रवार को राईस खान ने एक और वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. इस वीडियो में उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने उन्हें भाजपा की सदस्यता दिलाई थी. इसके बाद उन्हें धमकियां मिलने लगीं. राईस खान ने परिवार की जान को खतरा बताते हुए प्रदेशाध्यक्ष से सुरक्षा की मांग किए जाने की बात कही. नए वीडियो में राईस खान ने स्पष्ट किया कि वे भाजपा में ही हैं. इस तरह कुछ ही घंटों के भीतर उनके भाजपा में शामिल होने, फिर इससे इनकार करने और दोबारा भाजपा के साथ रहने की बात सामने आने से वार्ड-109 का मामला चर्चा में आ गया.
भाजपा नेता ने भी धमकी का किया दावा
भाजपा नेता चंद्र मनोहर बटवाड़ा ने भी राईस खान के शुक्रवार को जारी वीडियो का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि पार्षद ने खुद वीडियो में बताया है कि भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें धमकियां मिल रही थीं. राईस खान ने अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और प्रदेशाध्यक्ष से सुरक्षा की मांग की है. बटवाड़ा के मुताबिक राईस खान भाजपा में हैं.
मेयर चुनाव से पहले बढ़ी हलचल
जयपुर नगर निगम के मेयर चुनाव से पहले निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है. ऐसे में वार्ड-109 के पार्षद राईस खान को लेकर सामने आए मामले ने स्थानीय राजनीति में चर्चाओं को और हवा दे दी है. एक तरफ भाजपा की ओर से उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाए जाने की तस्वीरें सामने आईं, वहीं दूसरी तरफ उनका कांग्रेस के पक्ष में वीडियो और फिर भाजपा में रहने का नया दावा सामने आया. भाजपा इसे अपने साथ पार्षद के जुड़ने के तौर पर पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस की ओर से इसे दबाव और धमकी से जोड़कर सवाल उठाए जा रहे हैं. राईस खान की ओर से भी धमकी मिलने और परिवार की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया है. ऐसे में वार्ड-109 का यह मामला अब केवल एक पार्षद के दल बदलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जयपुर के मेयर चुनाव से पहले चल रही सियासी गतिविधियों का बड़ा हिस्सा बन गया है.



