कार पर लिखा ’12 लाख का गधा’… नई गाड़ी से परेशान परिवार लेकर Tata शोरूम पहुंचा अधिकारी, दोपहर तक कंपनी को लौटाने पड़े पैसे

Last Updated:October 07, 2026, 09:01 IST
Alwar News: राजस्थान के अलवर जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां रैणी एसडीएम कार्यालय में कार्यरत अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी दीपक शर्मा अपनी नई कार की रोज-रोज की खराबियों से तंग आ गए. उन्होंने अपनी 12 लाख की टाटा टियागो कार पर ’12 लाख का गधा’ लिखा और परिवार के साथ शोरूम के बाहर धरने पर बैठ गए. बैटरी और एसी की लगातार दिक्कतों से परेशान अधिकारी ने जब यह अनोखा विरोध किया, तो कंपनी प्रबंधन तुरंत हरकत में आया. दोपहर तक कंपनी ने कार वापस ले ली और पूरे 12 लाख रुपये लौटाकर विवाद को शांत किया.
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Tata Tiago EV Protest: कार पर ’12 लाख का गधा’ लिख परिवार संग धरने पर बैठा अधिकारी, कंपनी ने लौटाए पैसे
अलवर: राजस्थान के अलवर जिले से उपभोक्ता असंतोष का एक बेहद दिलचस्प और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक ग्राहक अपनी कार की रोज-रोज की तकनीकी खराबियों से इस कदर परेशान हो गया कि उसने अपना विरोध दर्ज कराने का एक अनोखा और कड़ा तरीका खोज निकाला. इस हताश ग्राहक ने अपनी 12 लाख रुपये की महंगी गाड़ी पर बड़े-बड़े अक्षरों में ’12 लाख का गधा’ लिख दिया. इतना ही नहीं, वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ कार शोरूम के बाहर धरने पर बैठ गया. इस घटना ने न सिर्फ सड़क से गुजरने वाले लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी यह चर्चा का विषय बन गई.
यह पूरा विवाद अलवर शहर के हनुमान चौराहा स्थित टाटा क्लासिक मोटर्स शोरूम के बाहर देखने को मिला. रैणी एसडीएम कार्यालय में अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात दीपक शर्मा ने यह सख्त कदम उठाया था. प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार की सुबह दीपक शर्मा अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर टाटा टियागो कार से शोरूम पहुंचे थे. उन्होंने अपनी विवादित गाड़ी को शोरूम के मुख्य द्वार के ठीक सामने खड़ा कर दिया और पूरे परिवार के साथ वहीं जमीन पर धरने पर बैठ गए. उनके इस अप्रत्याशित कदम से शोरूम के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया.
कार पर लिखा तीखा संदेशअपनी भारी नाराजगी जाहिर करने के लिए दीपक शर्मा ने कार के बोनट और शीशे पर एक बड़ा सा बैनर लगा दिया था. इस बैनर पर लिखा गया संदेश वहां मौजूद हर शख्स का ध्यान अपनी ओर खींच रहा था. अधिकारी ने कार पर लिखा था कि टाटा की कार खरीदने से कहीं ज्यादा बढ़िया है एक गधा खरीद लेना, कम से कम वह वजन तौलने के तो काम आएगा. उन्होंने आगे यह भी स्पष्ट रूप से लिखा कि टाटा क्लासिक मोटर्स अलवर से यह गधा मैंने 12 लाख रुपये में लिया है. इस तीखे तंज के जरिए उन्होंने कंपनी की आफ्टर-सेल्स सर्विस और गाड़ी की बिल्ड क्वालिटी पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया.
ढाई साल से कार बनी हुई थी बड़ा सिरदर्ददीपक शर्मा ने वहां मौजूद लोगों को अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उन्होंने करीब तीन साल पहले इसी अधिकृत शोरूम से अपनी यह टाटा टियागो कार खरीदी थी. इस गाड़ी को खरीदने के लिए उन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई के 12 लाख रुपये खर्च किए थे. लेकिन कार खरीदने के कुछ ही महीनों बाद से उनका सुकून पूरी तरह छिन गया. गाड़ी में लगातार कोई न कोई नई तकनीकी समस्या पैदा होने लगी. कभी कार की महंगी बैटरी अचानक काम करना बंद कर देती, तो कभी तेज गर्मी के मौसम में गाड़ी का एयर कंडीशनर (एसी) जवाब दे जाता. इसके अलावा कार की अन्य एसेसरीज में भी आए दिन कोई न कोई बड़ी खराबी आती ही रहती थी.
कई शिकायतों के बाद भी नहीं मिला स्थायी समाधानपरेशान अधिकारी दीपक शर्मा का आरोप है कि उन्होंने गाड़ी में आ रही इन तमाम गंभीर दिक्कतों को लेकर दर्जनों बार शोरूम प्रबंधन और सर्विस सेंटर में अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. हर बार सर्विस सेंटर के कर्मचारी गाड़ी को ठीक करने का बड़ा दावा करते, लेकिन कुछ ही दिनों में कार फिर से वैसी ही स्थिति में लौट आती. समस्या का कोई भी स्थायी और संतोषजनक समाधान नहीं निकाला जा रहा था. करीब ढाई साल तक सर्विस सेंटर के चक्कर काटने और भारी मानसिक प्रताड़ना झेलने के बाद अंततः उनका धैर्य पूरी तरह जवाब दे गया.
दबाव में आई कंपनी और तुरंत लौटाए ग्राहक के पूरे पैसेमंगलवार सुबह 9 बजे से शुरू हुआ यह अनोखा धरना दोपहर तक लगातार जारी रहा. दीपक शर्मा इस बात पर अड़े हुए थे कि कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी खुद उन्हें इन लगातार आ रही खराबियों का स्पष्ट जवाब दें और उनकी परेशानी का तुरंत कोई ठोस समाधान निकालें. शोरूम के बाहर हंगामा बढ़ता देख और अपनी ब्रांड इमेज को खराब होता देख आखिरकार कंपनी प्रबंधन को अपनी गलती माननी पड़ी. दोपहर करीब डेढ़ बजे कंपनी के वरिष्ठ कर्मचारियों ने दीपक शर्मा से लंबी बातचीत की. स्थिति को शांत करने के लिए कंपनी ने एक बड़ा फैसला लिया. शोरूम ने दीपक शर्मा की उस खराब कार को हमेशा के लिए वापस ले लिया और उन्हें उनकी पूरी रकम यानी 12 लाख रुपये उसी वक्त वापस कर दिए. अपनी पूरी रकम मिलने और सालों पुरानी समस्या का समाधान होने के बाद दीपक शर्मा ने राहत की सांस ली और अपना धरना समाप्त कर दिया.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Alwar,Alwar,Rajasthan
First Published :
October 07, 2026, 09:01 IST



