25 निकायों में निर्विरोध चुने गए BJP के प्रमुख, पूरे भरतपुर और डीग जिले में पार्टी का ‘क्लीन स्वीप’

जयपुर. राजस्थान के निकाय चुनाव में पार्षदों के नतीजे आने के बाद अब मेयर, सभापति और अध्यक्ष की कुर्सियों पर तस्वीर तेजी से साफ हो रही है. कई जगह बहुमत का गणित काम कर रहा है तो कई निकायों में निर्दलीय पार्षदों के रुख ने पूरा खेल बदल दिया है. इसी बीच बीजेपी ने 25 निकायों में अपने चेयरमैन, सभापति और अध्यक्ष निर्विरोध बनवाने में सफलता हासिल की है. इनमें भरतपुर और भीलवाड़ा के नगर निगम भी शामिल हैं.
इन दोनों जगहों का सियासी महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला है, जबकि भीलवाड़ा में बीजेपी ने निकाय चुनाव में साफ बहुमत हासिल किया था. भरतपुर में हालांकि कहानी थोड़ी अलग रही. यहां नगर निगम के चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस से ज्यादा सीटें निर्दलीयों ने जीती थीं. इसके बावजूद मेयर चुनाव के लिए खड़ी निर्दलीय प्रत्याशी ने अपना नाम वापस ले लिया और बीजेपी प्रत्याशी अनुराधा सिंह के लिए निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया.
भरतपुर में निर्दलीयों का दबदबा, फिर भी बीजेपी का मेयरभरतपुर नगर निगम में कुल 65 वार्ड हैं. हालिया निकाय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों ने सबसे ज्यादा 36 वार्डों में जीत दर्ज की. बीजेपी के 20, कांग्रेस के 7, बीएसपी के एक और आरएलपी के एक पार्षद चुनाव जीते थे. यानी संख्या के हिसाब से निर्दलीय सबसे बड़ा समूह बनकर सामने आए थे.
शुरुआत में मेयर पद के लिए निर्दलीय पार्षदों की तरफ थी निगाहेंमेयर पद के लिए शुरुआत में मुकाबला बनने की स्थिति थी. बीजेपी ने अनुराधा सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि वार्ड नंबर 17 से निर्दलीय पार्षद विचित्रा सिंह ने भी नामांकन दाखिल किया था. उस समय यह सवाल था कि सबसे ज्यादा निर्दलीय पार्षदों वाले भरतपुर में आखिर मेयर की कुर्सी किसके पास जाएगी. लेकिन 18 सितंबर को तस्वीर बदल गई. निर्दलीय विचित्रा सिंह ने अपना नामांकन वापस ले लिया. इसके बाद बीजेपी की अनुराधा सिंह के निर्विरोध महापौर चुने जाने का रास्ता साफ हो गया.
सीएम के गृह जिले में बीजेपी के लिए अहम तस्वीरभरतपुर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला माना जाता है. ऐसे में यहां नगर निगम की सत्ता का समीकरण बीजेपी के लिए खास महत्व रखता है. चुनाव परिणाम के बाद हालांकि यहां बीजेपी के सामने सीधा बहुमत नहीं था. निर्दलीयों की संख्या सबसे ज्यादा होने के कारण मेयर चुनाव में उनका समर्थन जरूरी हो गया था. अब निर्दलीय प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने के बाद मुकाबला ही खत्म हो गया. बीजेपी प्रत्याशी अनुराधा सिंह का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया.
भीलवाड़ा में भी बीजेपी की जसवंत कंवर निर्विरोध
भीलवाड़ा में स्थिति भरतपुर से अलग थी. यहां बीजेपी के पास पहले से ही मजबूत संख्याबल था. 70 वार्ड वाले नगर निगम में बीजेपी ने 45 सीटें जीतीं और स्पष्ट बहुमत हासिल किया. कांग्रेस के खाते में 10 और निर्दलीयों के खाते में 15 सीटें गईं. बीजेपी ने वार्ड नंबर 9 से जीतीं जसवंत कंवर को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया. उन्होंने नामांकन दाखिल किया. शुरुआत में निर्दलीय संतोष कंवर भी मैदान में थीं, लेकिन उन्होंने 17 सितंबर को अपना नाम वापस ले लिया. कांग्रेस ने भी मेयर पद के लिए उम्मीदवार नहीं उतारा. इसके बाद जसवंत कंवर निर्विरोध महापौर चुन ली गईं.
25 निकायों में निर्विरोध अध्यक्ष बनाने का दावा
बीजेपी की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक पार्टी ने राजस्थान के 25 निकायों में अपने चेयरमैन, सभापति और अध्यक्ष निर्विरोध बनवाने में सफलता हासिल की है. इसका मतलब यह है कि इन निकायों में मतदान से पहले ही अध्यक्ष पद की तस्वीर साफ हो गई. राजस्थान के 309 शहरी निकायों के चुनाव में बीजेपी 148 निकायों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी, जबकि कांग्रेस 104 निकायों में आगे रही थी.
भरतपुर में बहुमत का गणित नहीं, समर्थन का खेल चलाभरतपुर का मामला इस पूरे चुनाव की अलग तस्वीर दिखाता है. यहां बीजेपी के पास 20 पार्षद थे, जबकि निर्दलीयों की संख्या 36 थी. कांग्रेस सिर्फ 7 सीटों पर थी. ऐसे में किसी एक पार्टी के पास अपने दम पर मेयर बनाने की स्थिति नहीं थी. लेकिन मेयर पद पर मुकाबला आखिर मतदान तक पहुंचा ही नहीं. निर्दलीय उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने के बाद बीजेपी उम्मीदवार के सामने कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा. इस तरह यहां संख्या का खेल समर्थन के खेल में बदल गया.
21 सितंबर को बाकी निकायों की तस्वीर होगी साफभरतपुर और भीलवाड़ा जैसे नगर निगमों में मतदान से पहले ही तस्वीर साफ होने से पार्टी को राहत मिली है. लेकिन राजस्थान के बाकी निकायों में कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. कहीं बहुमत है, कहीं बागी उम्मीदवार हैं और कहीं निर्दलीय पार्षद पूरे समीकरण की चाबी बने हुए हैं. ऐसे में 21 सितंबर का दिन कई नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के लिए सबसे अहम रहने वाला है.



