26 चौके और 6 छक्के… 199 रन की पारी खेलकर आउट हुए प्रियांश आर्य, लूट ली पूरी महफिल

नई दिल्ली. प्रियांश आर्य बेशक एक रन से करियर का पहला दोहरा शतक चूक गए हों लेकिन उन्होंने पूरी महफिल लूट ली. रणजी ट्रॉफी एलीट ग्रुप सी मुकाबले के पहले दिन रनों का अंबार लग गया. इस मैच का मुख्य आकर्षण युवा बल्लेबाज प्रियांश आर्य रहे, जिन्होंने अपनी आक्रामक और परिपक्व बल्लेबाजी से महफिल लूट ली. हालांकि, वह अपने फर्स्ट क्लास करियर के पहले दोहरे शतक से महज एक रन से चूक गए, लेकिन उनकी इस ऐतिहासिक पारी ने दिल्ली को बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया है.
ऑस्ट्रेलिया ‘ए’ के खिलाफ भारत ‘ए’ की सीमित ओवरों की सीरीज में केवल एक मैच खेलने के बाद लाल गेंद के इस फॉर्मेट में लौटे प्रियांश आर्य (Priyansh Arya) ने बिना किसी अतिरिक्त समय के खुद को ढाल लिया. दिल्ली के कप्तान आयुष बडोनी (Ayush Badoni) ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया, जिसे उनके बल्लेबाजों ने पूरी तरह सही साबित कर दिया. पिच बल्लेबाजों के लिए बेहद अनुकूल थी, और प्रियांश ने इसका पूरा फायदा उठाया.
126 गेंदों में ठोका शतक, गाजा की गेंद पर पूरा किया सैकड़ाप्रियांश आर्य ने पारी की शुरुआत से ही गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा. उन्होंने अपनी शतकीय पारी तक पहुंचने के लिए केवल 126 गेंदों का सामना किया, जिसमें 15 शानदार चौके और दो गगनचुंबी छक्के शामिल थे. शतक पूरा करने का उनका अंदाज भी बेहद आश्वस्त करने वाला था, जब उन्होंने चिंतन गाजा की गेंद को डीप स्क्वायर लेग की ओर खेलकर तीन अंक के आंकड़े को छुआ. शतक के बाद भी उनकी एकाग्रता और आक्रमण में कोई कमी नहीं आई.
बडोनी के साथ 234 रनों की रिकॉर्ड साझेदारीपारी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट और मुख्य आकर्षण प्रियांश आर्य और कप्तान आयुष बडोनी के बीच हुई रिकॉर्ड साझेदारी रही. दोनों ने मिलकर चौथे विकेट के लिए 234 रनों की एक विशाल और मजबूत साझेदारी निभाई, जिसने गुजरात के गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा दीं. कप्तान बडोनी ने भी अपनी शानदार फॉर्म जारी रखते हुए 113 गेंदों में अपना शतक पूरा किया. यह उनके प्रथम श्रेणी करियर का पांचवां शतक है. दिन का खेल समाप्त होने तक बडोनी 149 गेंदों में 11 चौकों और दो छक्कों की मदद से 115 रन बनाकर क्रीज पर डटे हुए थे.
199 रन पर दर्दनाक अंत, महज एक रन से चूकेदूसरी ओर, प्रियांश आर्य इतिहास रचने के बिल्कुल करीब थे. जब वह अपने दोहरे शतक से महज एक रन दूर थे, तब दिल्ली का स्कोर 77वें ओवर में चार विकेट पर 376 रन था. उन्होंने कुल 220 गेंदों की मैराथन पारी खेली, जिसमें 26 चौके और छह छक्के जड़े. हर कोई उनके दोहरे शतक का इंतजार कर रहा था, लेकिन क्रिकेट की अनिश्चितता एक बार फिर सामने आई. मनन हींगराजिया की एक नीची रहती गेंद को प्रियांश समझ नहीं पाए और बोल्ड हो गए. 199 रन के निजी स्कोर पर आउट होने के बाद वह निराश होकर पवेलियन लौटे, लेकिन उनके इस प्रयास ने घरेलू क्रिकेट में उनके उज्ज्वल भविष्य का स्पष्ट संदेश दे दिया है.
पहले दिन का खेल खत्म होने तक मजबूत स्थिति में दिल्लीप्रियांश के आउट होने के बाद दिन का खेल खत्म होने तक दिल्ली की पहली पारी में 84 ओवर पूरे हो चुके थे और स्टंप्स के समय सुमित माथुर बिना खाता खोले कप्तान बडोनी का साथ निभा रहे थे. गुजरात की ओर से हर्षल पटेल सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने 66 रन देकर दो विकेट हासिल किए, लेकिन वह प्रियांश और बडोनी के तूफान को रोकने में नाकाम रहे.
दूसरे मुकाबले में गिरे 15 विकेट, चमके स्पिनरइस ग्रुप के एक अन्य मुकाबले में भी रोमांचक क्रिकेट देखने को मिला, जहां बंगाल और सेना के बीच खेले जा रहे मैच के पहले दिन ही 15 विकेट गिर गए. मोहम्मद शमी के बिना उतरी बंगाल की टीम पहली पारी में 186 रन पर सिमट गई, लेकिन उनके गेंदबाजों ने जोरदार वापसी करते हुए सेना के पांच बल्लेबाजों को पवेलियन भेज दिया. बंगाल के स्पिनरों प्रदीप्त प्रमाणिक और आमिर गनी के आगे विपक्षी बल्लेबाज संघर्ष करते नजर आए, जिससे दिन का खेल समाप्त होने तक सेना का स्कोर पांच विकेट पर 83 रन था और दिन के सभी 15 विकेट स्पिनरों के नाम रहे. हालांकि, इन सबके बीच पहले दिन की सुर्खियां पूरी तरह से प्रियांश आर्य की जादुई और ऐतिहासिक 199 रनों की पारी के नाम रहीं.



