Rajasthan

टॉप दूध देने वाली नस्लें- जमुनापारी, बीटल, झकराना

Last Updated:November 22, 2025, 17:46 IST

बकरी पालन आज ग्रामीण कमाई का भरोसेमंद स्रोत बन गया है. जमुनापारी, बीटल, जाखराना, झालावाड़ी और सीरोज़ी जैसी देसी नस्लें कम खर्च में अधिक दूध देती हैं और स्थानीय मौसम में आसानी से ढल जाती हैं. अगर आप भी मुनाफ़ा और स्थिर आय चाहते हैं, तो इन टॉप दूध देने वाली बकरियों के बारे में जानना आपके लिए बेहद फायदेमंद होगा.bhilwara

ग्रामीण इलाकों में आज बकरी पालन लोगों की कमाई का मजबूत सहारा बनता जा रहा है. छोटे किसान हों या मजदूरी करने वाले परिवार, कम खर्च में अधिक लाभ देने वाला यह काम सभी के लिए आसान हो गया है. लेकिन जब बात दूध देने वाली बकरी चुनने की आती है, तो समझदारी सबसे जरूरी हो जाती है. कई ऐसी देसी नस्लें हैं जो अधिक दूध देती हैं, कम बीमार पड़ती हैं और स्थानीय मौसम में आसानी से ढल जाती हैं. यदि आप भी बकरी पालन शुरू करना चाहते हैं, तो इन टॉप दूध देने वाली नस्लों को जानकर आपका काम और भी आसान हो जाएगा.

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आमतौर पर बकरी पालन करने वाले पशुपालक के मन में सबसे पहले जमुनापारी नाम आता है. इसे दूध की रानी भी कहा जाता है. यह नस्ल सबसे ज्यादा पाली जाती है और अपने बड़े आकार तथा बेहतरीन दूध उत्पादन के लिए मशहूर है. जमुनापारी बकरी औसतन 1.5 से 2 लीटर तक प्रतिदिन दूध देती है, जबकि अच्छे खान-पान और देखभाल के साथ यह इससे भी अधिक दूध दे सकती है. इसकी खासियत यह है कि यह केवल दूध ही नहीं देती, बल्कि बच्चों की संख्या भी अधिक होती है, जिससे कमाई के और भी अवसर बन जाते हैं.

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वहीं, यदि बात की जाए तो बीटल (Beetal) पंजाब की उच्च स्तरीय डेयरी नस्ल मानी जाती है. बीटल बकरी का दूध काफी गाढ़ा और पौष्टिक होता है, और यह 2 से 3 लीटर तक प्रतिदिन दूध देने की क्षमता रखती है. कुछ बेहतरीन प्रबंधन वाले फार्मों में इसका उत्पादन 4 से 5 लीटर तक भी देखा गया है. इसके लंबे कान और मजबूत शरीर इसे पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में पालन के लिए उपयुक्त बनाते हैं.

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तीसरी नस्ल है जाखराना, जो राजस्थान में पाई जाती है, दूध उत्पादन के मामले में जाखराना भारत की शीर्ष डेयरी बकरियों में से एक है. यह नस्ल औसतन 2 से 3 लीटर दूध प्रतिदिन दे सकती है, इसकी खास पहचान इसका चमकदार काला रंग और लंबा शरीर है. यह नस्ल गर्म और शुष्क क्षेत्रों में भी आसानी से पाली जा सकती है.

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चौथी नस्ल है झालावाड़ी, जो मुख्य रूप से गुजरात में पाई जाती है, इसकी दूध उत्पादन क्षमता लगभग 1.5 से 2 लीटर प्रतिदिन होती है. यह नस्ल बीमारी प्रतिरोधक क्षमता और कम देखभाल में भी जीवित रहने की क्षमता के लिए जानी जाती है. यदि आप शुरुआत कर रहे हैं, तो यह एक आसान और मुनाफ़ा देने वाली नस्ल हो सकती है.

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पांचवीं और लोकप्रिय नस्ल है सीरोज़ी, यह राजस्थान की मजबूत नस्ल मानी जाती है. यह औसतन 1 से 1.5 लीटर प्रतिदिन दूध देती है, लेकिन इसकी खासियत इसकी सहनशीलता और कम खर्च में पालन की क्षमता है. यह गर्मी और सर्दी दोनों मौसम में आसानी से खुद को ढाल लेती है.

First Published :

November 22, 2025, 17:46 IST

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बकरियों की ये नस्ल है दूध की रानी जो देती है कम खर्च में ज्यादा मुनाफा!

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