कोटा का अनोखा चमत्कार: 100 साल पुराना मंदिर जहां ‘एसी वाले गणेश जी’ की पूजा के लिए चलता है एयर कंडीशन!

कोटा. देश के विभिन्न हिस्सों में कई ऐसे मंदिर हैं, जो अपनी अनोखी पहचान के कारण प्रसिद्ध हैं. कहीं ‘व्हिस्की देवी’ मशहूर हैं, तो कहीं ‘बुलेट बाबा’, कहीं ‘वीजा मंदिर’ है तो कहीं ‘चाइनीज काली मंदिर’. लेकिन राजस्थान के कोटा शहर में भी एक ऐसा ही अनोखा मंदिर है, जिसका नाम सुनकर हर कोई चौंक जाता है. यह मंदिर है—‘एसी वाला गणेश मंदिर’, जहां लोग भगवान गणेश को प्यार से ‘एसी वाले गणेश जी’ कहते हैं.
यह अनोखा मंदिर कोटा शहर के दादाबाड़ी क्षेत्र में स्थित है और अपनी अलग पहचान के कारण न केवल कोटा बल्कि आसपास के इलाकों में भी काफी प्रसिद्ध है. जैसे ही गर्मी का मौसम शुरू होता है, यहां भगवान गणेश के लिए एयर कंडीशन (एसी) चालू कर दिए जाते हैं. इसी विशेष परंपरा के कारण इस मंदिर का नाम ‘एसी वाला गणेश मंदिर’ पड़ गया.
100 साल से भी ज्यादा पुराना मंदिर
मंदिर के पुजारी के अनुसार यह सिद्धिविनायक गणेश मंदिर लगभग 100 वर्षों से भी अधिक पुराना है. शुरुआत में यह स्थान एक साधारण धार्मिक स्थल था, लेकिन समय के साथ इसकी प्रसिद्धि बढ़ती गई. धीरे-धीरे यह मंदिर कोटा के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हो गया और आज इसकी पहचान ‘एसी वाले गणेश जी’ के रूप में देशभर में हो चुकी है. इस मंदिर की सबसे खास और चमत्कारी बात यह है कि यहां भगवान गणेश की प्रतिमा एक धोबड़े के पेड़ पर अपने आप उभरी हुई थी. स्थानीय लोगों के अनुसार जब यह प्रतिमा दिखाई दी, तो इसे एक दिव्य संकेत माना गया. इसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर यहां एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया. तभी से इस स्थान पर श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ती चली गई. आज भी मंदिर में केवल गणेश जी की प्रतिमा ही नहीं, बल्कि उस मूल पेड़ की भी पूजा की जाती है, जिस पर गणेश जी की आकृति उभरी थी. श्रद्धालु मानते हैं कि इस पेड़ में भी दिव्य शक्ति का वास है.
गर्मी में भगवान के लिए चलता है एसी
कोटा की भीषण गर्मी को देखते हुए मंदिर समिति हर साल गर्मियों की शुरुआत से पहले ही मंदिर में एसी की व्यवस्था कर देती है. भक्तों का मानना है कि जैसे इंसान को गर्मी में आराम की जरूरत होती है, वैसे ही भगवान को भी शीतल वातावरण देना सेवा का ही एक रूप है. इसी भावना के चलते यहां वर्षों से भगवान के लिए एसी चलाया जा रहा है. इस मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, विशेष रूप से बुधवार और गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहां भारी भीड़ रहती है. विद्यार्थी, व्यापारी, नौकरीपेशा लोग और बाहर से आने वाले यात्री भी यहां माथा टेकने जरूर आते हैं, लोगों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है.
आस्था और आधुनिकता का अनोखा संगम
‘एसी वाला गणेश मंदिर’ आज कोटा में आस्था और आधुनिक तकनीक के अनोखे संगम का प्रतीक बन चुका है. एक ओर यह मंदिर सौ साल से भी ज्यादा पुराना है, वहीं दूसरी ओर यहां भगवान के लिए एसी जैसी आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, यही वजह है कि इस मंदिर की चर्चा दूर-दूर तक होती है. कोटा वैसे तो शिक्षा नगरी के रूप में पूरे देश में प्रसिद्ध है, लेकिन ‘एसी वाला गणेश मंदिर’ ने कोटा को धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर भी अलग पहचान दिलाई है. यहां आने वाले लोग इस मंदिर के अनोखे नाम और परंपरा को देखकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं और इसे अपनी यादों में हमेशा के लिए संजोकर ले जाते हैं.



