चीन से तनाव के बीच जापान ने बदली विश्व युद्ध के बाद वाली नीति, अब धड़ल्ले से चलेगा रूस-अमेरिका की राह

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जापान ने बदली विश्व युद्ध के बाद वाली नीति, अब रूस-अमेरिका की राह चलेगा मुल्क
Last Updated:April 21, 2026, 14:58 IST
Japan Changes Defense Policy: जापान ने दशकों पुरानी रक्षा नीति बदलकर हथियार निर्यात की राह खोल दी है. यह मुल्क अब मिसाइल और डेस्ट्रॉयर भी बेच सकेगा. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान ने अपनी यह अहम नीति बदली है.
जापान दशकों पुरानी अपनी रक्षा नीति में बड़ा बदलाव किया हगै. वह अपना खुद का फाइटर जेट भी बना रहा है.
Japan Changes Defense Policy: एशिया की सुरक्षा राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. जापान ने अपनी दशकों पुरानी रक्षा नीति में अहम संशोधन करते हुए अब हथियारों के निर्यात का रास्ता खोल दिया है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में चीन के साथ तनाव लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक भू-राजनीतिक संतुलन तेजी से बदल रहा है. जापान सरकार ने डिफेंस इक्विपमेंट और टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर के तीन सिद्धांतों में बदलाव करते हुए उन नियमों को खत्म कर दिया है, जो अब तक रक्षा उपकरणों के निर्यात को केवल पांच गैर-लड़ाकू श्रेणियों तक सीमित रखते थे. पहले जापान केवल रेस्क्यू, ट्रांसपोर्ट, निगरानी और माइंसवीपिंग जैसे उपकरण ही निर्यात कर सकता था, लेकिन अब नई नीति के तहत हथियारों को वेपन्स और नॉन-वेपन्स में बांट दिया गया है.
इस बदलाव के बाद जापान अब मिसाइल, डेस्ट्रॉयर जैसे घातक हथियार भी उन देशों को बेच सकेगा, जिनके साथ उसका रक्षा तकनीक और गोपनीय जानकारी साझा करने का समझौता होगा. हालांकि, सरकार ने यह शर्त रखी है कि सक्रिय युद्ध में शामिल देशों को हथियार नहीं बेचे जाएंगे, लेकिन विशेष परिस्थितियों में इस नियम में छूट भी दी जा सकती है.
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की नीति में बड़ा बदलाव
यह फैसला जापान की उस ऐतिहासिक नीति से बड़ा विचलन माना जा रहा है, जिसे उसने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपनाया था. युद्ध में हार के बाद जापान ने अपने संविधान में शांति को सर्वोपरि रखा और सैन्य गतिविधियों को सीमित कर दिया था. जापान का संविधान, विशेष रूप से आर्टिकल 9 उसे युद्ध करने और सैन्य शक्ति के इस्तेमाल से लगभग रोकता है. इसी वजह से दशकों तक जापान ने खुद को शांतिप्रिय राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत किया और हथियारों के निर्यात पर सख्त प्रतिबंध बनाए रखा. लेकिन बदलते वैश्विक हालात, खासकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव ने जापान को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है.
क्या जापान भी अब बनेगा हथियार निर्यातक महाशक्ति?
नई नीति के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या जापान अब अमेरिका और रूस की तरह वैश्विक हथियार बाजार में उतर जाएगा? विशेषज्ञों का मानना है कि जापान के पास अत्याधुनिक तकनीक और रक्षा उद्योग की मजबूत क्षमता है. यदि वह बड़े पैमाने पर हथियारों का निर्यात शुरू करता है, तो वह वैश्विक रक्षा बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है. हालांकि, फिलहाल जापान ने इस प्रक्रिया को सीमित और नियंत्रित रखने की बात कही है. फिर भी नीति में विशेष परिस्थितियों जैसी लचीलापन भविष्य में बड़े बदलाव का संकेत देता है.
देश के भीतर विरोध और चिंता
इस फैसले को लेकर जापान के भीतर भी भारी विरोध देखने को मिल रहा है. राजधानी टोक्यो में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जहां लोगों ने हथियार निर्यात का विरोध और जापान को मौत का व्यापारी न बनने दो जैसे नारे लगाए. विपक्षी दलों ने भी इस नीति की आलोचना करते हुए कहा है कि संसद की मंजूरी के बिना ऐसे फैसले लेना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है. नई व्यवस्था के तहत हथियार निर्यात का फैसला नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल करेगी और संसद को बाद में केवल सूचना दी जाएगी. जापान का यह कदम केवल एक नीतिगत बदलाव नहीं, बल्कि उसकी वैश्विक भूमिका में संभावित परिवर्तन का संकेत है. जहां एक ओर यह देश की सुरक्षा और रणनीतिक ताकत को बढ़ा सकता है, वहीं दूसरी ओर यह उसकी शांतिप्रिय छवि को भी चुनौती देता है.About the Authorसंतोष कुमार
न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें
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First Published :
April 21, 2026, 14:42 IST



