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राजस्थानी महिलाओं का आभूषण टणका | Traditional Tanka Ornament Rajasthan Nagaur

Last Updated:December 22, 2025, 09:06 IST

Traditional Tanka Ornament Rajasthan Nagaur: राजस्थानी संस्कृति में ‘टणका’ केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि मर्यादा और लोक-संस्कृति का प्रतीक है. नागौर सहित पूरे राजस्थान में चांदी से बना यह भारी आभूषण महिलाओं के श्रृंगार का अभिन्न हिस्सा है, जो आज भी अपनी पहचान बनाए हुए है.
आभूषण टणका

राजस्थान की धरती केवल रेत, किले और रंग-बिरंगी पोशाकों के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यहाँ के पारंपरिक आभूषण भी इसकी सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं. इन आभूषणों में राजस्थानी महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला ‘टणका’ एक ऐसा आभूषण है, जो सुंदरता के साथ-साथ परंपरा, मर्यादा और लोक-संस्कृति का प्रतीक माना जाता है. टणका एक पारंपरिक पांव का आभूषण है, जिसे टखने या एड़ी के पास पहना जाता है. यह मुख्य रूप से चांदी से बनाया जाता है, क्योंकि चांदी को राजस्थानी परंपरा में पवित्र और स्वास्थ्यवर्धक माना गया है. इसकी बनावट और पहनने का ढंग इसे विशिष्ट बनाता है.

आभूषण टणका

टणका साधारण से लेकर नक्काशीदार डिज़ाइन में मिलता है. कई टणकों में छोटे-छोटे घुंघरू लगे होते हैं, जो चलते समय मधुर ध्वनि उत्पन्न करते हैं. यह ध्वनि केवल आभूषण की आवाज़ नहीं, बल्कि राजस्थान की लोक-जीवन शैली की पहचान है. घाघरा-चोली और ओढ़नी के साथ टणका महिलाओं के पांवों की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देता है.

आभूषण टणका

राजस्थानी समाज में टणका केवल श्रृंगार का साधन नहीं है, बल्कि इसे सौभाग्य और विवाहित जीवन का प्रतीक माना जाता है. विवाह, गणगौर, तीज, करवा चौथ और अन्य पारंपरिक त्योहारों पर टणका पहनना शुभ समझा जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी मिले टणका को संभालकर रखती हैं, जो भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक हैं.

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टणका

राजस्थान के लोकनृत्यों और सांस्कृतिक आयोजनों में टणका एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. घूमर, कालबेलिया जैसे नृत्यों में जब नर्तकियाँ थिरकती हैं, तब टणका की झंकार नृत्य की लय को और जीवंत बना देती है. यह आभूषण लोक-संगीत और नृत्य के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है.

टणका

आज के आधुनिक समय में भी टणका अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है. डिज़ाइनरों द्वारा इसे नए रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे युवा पीढ़ी भी इस पारंपरिक आभूषण की ओर आकर्षित हो रही है. फैशन शो और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में टणका राजस्थान की पहचान बनकर उभर रहा है.

टणका

टणका केवल चांदी से बना एक आभूषण नहीं, बल्कि यह राजस्थानी महिलाओं के जीवन, संस्कृति और आत्मसम्मान की झलक है. यह आभूषण समय के साथ बदलती दुनिया में भी अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है और राजस्थान की समृद्ध परंपरा को जीवित रखने का काम करता है. टणका, पांवों में बसी राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर है.

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December 22, 2025, 09:06 IST

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राजस्थानी महिलाओं का पारंपरिक आभूषण ‘टणका’, आज भी जीवित है पांवों में पहनने…

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