Rajasthan

टावर निर्माण में मिट्टी ढही, 13 साल के बच्चे की मौत, 7 मजदूर दबे, FIR दर्ज

नागौर: राजस्थान के नागौर जिले में एक बार फिर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. शनिवार को खींवसर क्षेत्र के पांचौड़ी गांव में हाई टेंशन लाइन के बिजली टावर निर्माण के दौरान बड़ा हादसा हो गया. गड्ढे की खुदाई के समय अचानक मिट्टी ढह गई, जिसमें 7 मजदूर दब गए. इस दुर्घटना में एक नाबालिग (13 वर्षीय किशोर) की मौत हो गई, जबकि अन्य मजदूरों को किसी तरह बाहर निकाला गया. घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों और प्रशासन में हड़कंप मच गया.

हादसा तब हुआ जब पांचौड़ी क्षेत्र में हाई टेंशन विद्युत लाइन के टावर खड़े करने के लिए गड्ढे खोदे जा रहे थे. निर्माण कार्य के दौरान गड्ढे की दीवारें अचानक भरभराकर ढह गईं और वहां काम कर रहे मजदूर मिट्टी के ढेर में दब गए. मृतक नाबालिग से ही इस खतरनाक कार्य को करवाया जा रहा था, जो बाल श्रम की गंभीर समस्या को उजागर करता है.

ठेकेदार ने नाबालिग का लिखवा रखा था गलत उम्र

ठेकेदार द्वारा अस्पताल में शव की उम्र 19 वर्ष लिखवाई गई, जबकि परिजनों का आरोप है कि बच्चा मात्र 13 साल का था और नाबालिग होने के बावजूद उसे काम पर लगाया गया था. घटना के बाद मृतक का शव खींवसर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया. परिजन मोर्चरी के बाहर धरना देकर बैठ गए हैं और उचित मुआवजा, दोषी ठेकेदार पर कार्रवाई तथा परिवार को सरकारी सहायता की मांग कर रहे हैं. सभी प्रभावित मजदूर और मृतक बारा जिले के निवासी बताए जा रहे हैं. वे काम की तलाश में नागौर आए हुए थे.

नागौर के पांचौड़ी गांव में हुआ हादसा

दरअसल, पांचौड़ी गांव में बिजली विभाग की हाई टेंशन लाइन विस्तार परियोजना चल रही थी. टावर के लिए बड़े गड्ढे खोदे जा रहे थे, जिनकी गहराई काफी थी. सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किए जाने के कारण मिट्टी ढह गई. स्थानीय लोगों के अनुसार, गड्ढे में कोई सेफ्टी सपोर्ट या दीवार मजबूती नहीं लगाई गई थी. नाबालिग बच्चे को भी इस कार्य में शामिल किया गया था, जो श्रम कानूनों का सीधा उल्लंघन है.

राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू किया गया. स्थानीय पुलिस, राजस्व अधिकारी और ग्रामीणों ने मिलकर मिट्टी हटाकर मजदूरों को बाहर निकाला. एक बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. अन्य मजदूरों को चोटें आई हैं, जिनमें से कुछ को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ का इलाज चल रहा है.

मृतक के परिजनों की 20 लाख मुआवजा देने की मांग

मोर्चरी के बाहर बैठे परिजन गुस्से में हैं. उन्होंने कहा कि ठेकेदार ने बाल श्रम का इस्तेमाल किया और सुरक्षा उपायों की पूरी तरह अनदेखी की. मृतक के परिवार ने कम से कम 20 लाख रुपये का मुआवजा, नौकरी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है. परिजनों का कहना है कि “बच्चे को काम पर लगाकर ठेकेदार ने उसकी जिंदगी से खिलवाड़ किया. अब उम्र बढ़ाकर लिखवा रहे हैं ताकि बाल श्रम का मामला न बने.”

प्रशासनिक स्तर पर शुरू हुई कार्रवाई

नागौर जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. पुलिस ने ठेकेदार और संबंधित कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है. बाल श्रम निषेध अधिनियम, फैक्ट्री एक्ट और निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा से संबंधित कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया है. मजदूर विभाग की टीम भी मौके पर पहुंचकर जांच कर रही है. जिला कलेक्टर ने कहा कि दोषी पाए जाने पर ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और परिवार को तत्काल राहत राशि उपलब्ध कराई जाएगी. उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि पूरी परियोजना में सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों. इस दर्दनाक हादसे में एक नाबालिग की जान चली गई, कई परिवार सदमे में हैं.

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