जयपुर के विजय शर्मा की पाठशाला

Last Updated:April 19, 2026, 11:10 IST
Vijay Sharma Slum Education Jaipur: जयपुर के विजय शर्मा ने अपनी नौकरी छोड़कर झुग्गी-झोपड़ी के बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया है. हरि ज्ञान पाठशाला के जरिए वे कचरा बीनने वाले बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं और अब तक 25 बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला भी करवा चुके हैं. पिता के वाहन चालक होने और आर्थिक तंगी के बावजूद विजय अपने निजी खर्च से इन बच्चों के लिए किताबों और सामग्री का प्रबंध करते हैं. उनकी यह निस्वार्थ सेवा आज पूरे राजस्थान के लिए एक मिसाल बन चुकी है.
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Vijay Sharma Slum Education Jaipur: कहते हैं कि सेवा के लिए धन से अधिक धवल मन की आवश्यकता होती है. जयपुर के 26 वर्षीय विजय शर्मा ने इस बात को पूरी तरह चरितार्थ किया है. एक साधारण परिवार में जन्मे विजय के पिता वाहन चालक हैं और उनका बचपन अभावों व आर्थिक तंगी के बीच बीता है. कई निजी और वित्तीय समस्याओं का सामना करने के बावजूद विजय ने अपनी राह नहीं बदली. जहाँ विपरीत परिस्थितियों में अक्सर युवा भटक जाते हैं, वहीं विजय ने समाज के सबसे निचले तबके यानी झुग्गी-झोपड़ी के बच्चों की जिंदगी संवारने का कठिन रास्ता चुना. उन्होंने अपनी निजी टेलीकॉम कंपनी की नौकरी छोड़ दी ताकि अपना पूरा समय इन बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में लगा सकें.
विजय शर्मा पिछले तीन वर्षों से ‘हरि ज्ञान पाठशाला’ के माध्यम से उन बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं, जो पहले सड़कों पर कचरा बीनने का काम करते थे. विजय बताते हैं कि शुरुआत में इन बच्चों और उनके अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के बारे में समझाना एक बड़ी चुनौती थी. आज उनकी पाठशाला में करीब 40 से 50 बच्चे नियमित रूप से पढ़ने आते हैं. ये वे बच्चे हैं जिन्हें समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है, लेकिन विजय ने इनके हाथों से कचरे का थैला हटाकर किताबें थमा दी हैं. आज वही बच्चे अक्षरों की दुनिया से जुड़कर एक बेहतर कल का सपना देख रहे हैं.
सरकारी स्कूल तक का सफरविजय केवल पाठशाला में पढ़ाने तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने अब तक 20 से 25 बच्चों का नजदीकी सरकारी विद्यालयों में दाखिला भी करवाया है. वे सुनिश्चित करते हैं कि इन बच्चों को नियमित शिक्षा मिले और वे बीच में पढ़ाई न छोड़ें. बच्चों के लिए किताबें, ड्रेस और अन्य शिक्षण सामग्री का इंतजाम विजय अपने निजी खर्च और कुछ साथियों के छोटे-मोटे सहयोग से करते हैं. हालांकि उन्होंने कई बार स्थानीय प्रशासन और भामाशाहों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन अक्सर उन्हें ‘कार्यक्षेत्र से बाहर’ होने जैसी दलीलों के साथ खाली हाथ लौटना पड़ा.
मानवता के लिए प्रेरणाअपनी सीमित आय और संसाधनों के बावजूद विजय का जज्बा कम नहीं हुआ है. वे मानते हैं कि समाज सेवा के लिए किसी बड़े पद या बहुत अधिक धन की जरूरत नहीं है, बस एक नेक नीयत काफी है. आज विजय शर्मा के इस निस्वार्थ कार्य की पूरे जयपुर में सराहना हो रही है. उनका यह प्रयास न केवल इन बच्चों को साक्षर बना रहा है, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे रहा है कि यदि युवा पीढ़ी ठान ले, तो वह बदलाव की बड़ी लहर ला सकती है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें
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Location :
Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
April 19, 2026, 11:10 IST



