अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने का महत्व

Last Updated:April 20, 2026, 11:34 IST
Why Buying Gold on Akshaya Tritiya is Auspicious: जालौर में अक्षय तृतीया का पर्व आस्था और निवेश के संगम के रूप में मनाया जा रहा है. “अक्षय” का अर्थ कभी खत्म न होने वाली समृद्धि है, इसलिए इस दिन सोना खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है. ज्वेलरी विक्रेता राकेश सोनी के अनुसार इस दिन छोटी खरीददारी भी सुख-समृद्धि लाती है. लोग इसे न केवल धार्मिक परंपरा बल्कि एक मजबूत निवेश के तौर पर भी देखते हैं. बिना किसी विशेष मुहूर्त के इस दिन शादी, नए काम और वाहन खरीददारी के लिए बाजारों में भारी भीड़ उमड़ रही है.
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Akshaya Tritiya 2026: राजस्थान के जालौर सहित पूरे प्रदेश में अक्षय तृतीया का पर्व अटूट आस्था और अपार उत्साह के साथ मनाया जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में आखा तीज के नाम से भी पुकारा जाता है. धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से इस दिन को साल के सबसे शुभ और अबूझ मुहूर्तों में प्रथम स्थान दिया गया है, जिसका सीधा मतलब यह है कि इस दिन किसी भी मांगलिक या नए कार्य को शुरू करने के लिए किसी ज्योतिषी से विशेष मुहूर्त निकलवाने की जरूरत नहीं पड़ती है. यही कारण है कि लोग नए व्यापार की नींव रखने, गृह प्रवेश करने और कीमती धातुओं की खरीददारी के लिए इस दिन का साल भर इंतजार करते हैं. जालौर के बाजारों में इस अवसर पर एक विशेष रौनक देखने को मिलती है, जहाँ हर उम्र के लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार कुछ न कुछ नया खरीदने के लिए घर से बाहर निकलते हैं और खुशियां मनाते हैं.
अक्षय तृतीया में शामिल “अक्षय” शब्द का अर्थ ही वह है जिसका कभी विनाश न हो, यानी जो हमेशा के लिए अमर और स्थिर बना रहे. इसी प्राचीन सोच के चलते इस दिन सोना खरीदने की परंपरा भारतीय समाज की जड़ों में गहराई से समाई हुई है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन जो भी मूल्यवान धातु घर लाई जाती है, वह परिवार में सुख और समृद्धि को स्थाई बना देती है. ज्वेलरी विक्रेताओं का अनुभव बताता है कि इस दिन ग्राहकों का उत्साह चरम पर होता है और लोग शगुन के तौर पर कम से कम एक सोने का सिक्का या छोटी ज्वेलरी जरूर खरीदते हैं. जालौर के सर्राफा बाजार में सुबह से ही ग्राहकों का आना शुरू हो जाता है, जहाँ दुकानदार भी इस दिन की भारी भीड़ को संभालने के लिए अतिरिक्त स्टाफ और नई डिजाइनों के साथ पूरी तरह तैयार रहते हैं.
आस्था और आर्थिक निवेश का अनूठा संगमअक्षय तृतीया पर होने वाली यह खरीददारी अब केवल धार्मिक रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक बहुत ही मजबूत आर्थिक निवेश का जरिया भी बन चुकी है. आज का जागरूक नागरिक सोने को केवल गहने के तौर पर नहीं बल्कि एक सुरक्षित संपत्ति के रूप में देखता है, जिसकी कीमत मुश्किल समय में हमेशा सहारा देती है. जालौर के स्थानीय ग्राहकों का मानना है कि शुभ दिन पर किया गया निवेश दुगना फल देता है, इसलिए लोग सोने के साथ-साथ अब जमीन-जायदाद और नई गाड़ियों की बुकिंग भी इसी दिन के लिए बचाकर रखते हैं. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अक्षय तृतीया पर होने वाला करोड़ों का कारोबार स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ी मजबूती प्रदान करता है, जिससे व्यापारियों के साथ-साथ आम जनता में भी जबरदस्त उत्साह बना रहता है.
बाजारों की स्थिति और सामूहिक उल्लासअक्षय तृतीया का दिन जालौर के व्यापारियों के लिए सबसे बड़े व्यापारिक अवसरों में से एक होता है. ज्वेलरी शोरूम से लेकर ऑटोमोबाइल सेक्टर तक हर जगह ग्राहकों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं. स्थानीय निवासी बाबूलाल जैन जैसे ग्राहकों का कहना है कि यह दिन परिवार के लिए कुछ नया और बेहतर करने का एक पवित्र अवसर होता है. दुकानदार भी इस मौके पर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विशेष छूट और आकर्षक ऑफर पेश करते हैं, जिससे खरीददारी का मजा और बढ़ जाता है. कुल मिलाकर अक्षय तृतीया आस्था, परंपरा और आधुनिक निवेश का एक ऐसा मेल है, जो समाज के हर वर्ग को खुशहाली और भविष्य की सुरक्षा का अहसास कराता है. यही कारण है कि हर साल इस दिन जालौर की गलियों में एक उत्सव जैसा माहौल बना रहता है और लोग इसे पूरे आनंद के साथ मनाते हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें
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Location :
Jalor,Jalor,Rajasthan
First Published :
April 20, 2026, 11:34 IST



