World

सुमात्रा के जंगलों में चमत्कार! जब ओरांगुटान ने पार किया इंसानी पुल तो झूम उठे वैज्ञानिक, देखिए दुर्लभ वीडियो

Orangutan Uses Bridge To Cross Road: इंडोनेशिया के सुमात्रा में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता मिली है. यहां के पकपक भारत जिले में एक बेहद दुर्लभ सुमात्रा ओरांगुटान को पहली बार इंसानों द्वारा बनाए गए कैनोपी ब्रिज (पेड़ों के ऊपर बना पुल) को पार करते हुए फिल्माया गया है. यह पहली बार है जब कैमरे ने इस प्रजाति को किसी वन्यजीव पुल का उपयोग करते हुए पकड़ा है. दरअसल यह पुल लगान-पगिंदर रोड के ऊपर बनाया गया था. यह सड़क स्थानीय लोगों के लिए तो बहुत जरूरी थी, लेकिन जंगल के इन असली मालिकों के लिए एक बड़ी रुकावट बन गई थी. संरक्षणवादियों को डर था कि अगर ओरांगुटान सड़क पार नहीं कर पाए, तो उनकी आबादी अलग-थलग पड़कर खत्म हो सकती है. अब इस वीडियो के सामने आने के बाद वैज्ञानिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने राहत की सांस ली है.

इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही टीम के लिए यह पल भावुक कर देने वाला था. सुमात्रा ओरांगुटान सोसाइटी (SOS) की चीफ एग्जीक्यूटिव हेलेन बकलैंड ने बताया कि जब टीम ने वीडियो देखा, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. करीब दो साल से कैमरे की फुटेज पर नजर रखी जा रही थी.

वैज्ञानिक बस इसी पल का इंतजार कर रहे थे कि कब कोई ओरांगुटान इस पुल पर पहला कदम रखेगा. इस पुल को टाहुकाह (TaHuKah) नामक संस्था की मदद से साल 2024 में तैयार किया गया था. सड़क बनने के बाद से जानवरों के लिए जंगल के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाना लगभग नामुमकिन हो गया था.

सुमात्रा ओरांगुटान ने पहली बार पार किया कैनोपी ब्रिज. (Image Courtesy: Sumatran Orangutan Society)

सड़क बन गई थी ओरांगुटान के कुनबे के लिए काल

इस इलाके में करीब 350 ओरांगुटान रहते हैं. सड़क ने इनके घर को दो हिस्सों में बांट दिया था. एक तरफ सिरंगगास वन्यजीव रिजर्व था और दूसरी तरफ सिकुलापिंग सुरक्षा वन. हेलेन बकलैंड का कहना है कि ओरांगुटान बहुत धीरे-धीरे अपनी संख्या बढ़ाते हैं.

अगर वे छोटे समूहों में ही फंसे रहते, तो उनमें इनब्रीडिंग यानी आपस में ही प्रजनन का खतरा बढ़ जाता. इससे उनकी जेनेटिक मजबूती खत्म हो जाती और वे धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच जाते. सड़क ने उनके बीच जो दूरी पैदा की थी, वह उनके भविष्य के लिए किसी बड़ी आपदा से कम नहीं थी.

वीडियो: पुल पर चढ़कर ओरांगुटान ने नीचे क्या देखा? 

कैमरे में कैद हुई फुटेज में एक युवा नर ओरांगुटान को बहुत सावधानी से पुल पर चलते देखा गया. वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा और पुल के ठीक बीच में जाकर रुक गया. वहां ठहरकर उसने पहले नीचे सड़क की तरफ देखा और फिर सीधे कैमरे की ओर नजर घुमाई. इसके बाद वह शांति से चलते हुए सिकुलापिंग के घने जंगल में ओझल हो गया.

इससे पहले ब्लैक जाइंट गिलहरी और लंबी पूंछ वाले बंदर इस पुल का इस्तेमाल कर चुके थे, लेकिन ओरांगुटान का आना सबसे बड़ी कामयाबी मानी जा रही है.

‘विकास और प्रकृति साथ-साथ चल सकते हैं’

ओरांगुटान दुनिया के सबसे बड़े पेड़ों पर रहने वाले स्तनधारी जीव हैं. वे अपना 90 परसेंट से ज्यादा समय पेड़ों की टहनियों पर ही बिताते हैं. उनकी याददाश्त बहुत तेज होती है और वे रास्तों के नक्शे अपने दिमाग में फिट कर लेते हैं.

पकपक भारत जिले के प्रमुख फ्रैंक बर्नहार्ड तुमांगोर ने कहा कि ओरांगुटान का इस पुल को पार करना इस बात का सबूत है कि हम विकास और प्रकृति में तालमेल बिठा सकते हैं. आधुनिकीकरण का मतलब विनाश नहीं होना चाहिए. दुनिया में अब केवल 14,000 सुमात्रा ओरांगुटान ही बचे हैं, ऐसे में यह छोटा सा पुल उनके अस्तित्व को बचाने की बड़ी उम्मीद बन गया है.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj