Rajasthan

कभी राजाओं की शान था ये वाद्य… अब गिनती के लोग ही जानते हैं इसकी धुन, जानें क्या है खास

Last Updated:April 27, 2026, 22:42 IST

What Is Mashak Baja Of Rajasthan: राजस्थान का पारंपरिक वाद्य मशक बाजा विलुप्ति के कगार पर, भीलवाड़ा के शाहपुरा निवासी ईश्वर पीढ़ियों से इसे बजा रहे, नई पीढ़ी को सिखाकर परंपरा बचाने की कोशिश में. भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा निवासी ईश्वर ने बताया कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से मशक बाजा बजाने का काम करता आ रहा है. इसे आम बोलचाल में पाइप बैंड या मशक बैंड भी कहा जाता है. यह वाद्य यंत्र काफी पुराना है और पहले के समय में शादियों व शाही दावतों में बजाया जाता था.

ख़बरें फटाफट

भीलवाड़ा. आज के आधुनिक दौर में नए-नए म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स के आने से प्राचीन वाद्य यंत्र धीरे-धीरे लुप्त होते जा रहे हैं. इसी कड़ी में राजस्थान का एक पारंपरिक वाद्य यंत्र मशक बाजा भी अब विलुप्ति के कगार पर पहुंच गया है. यह वाद्य यंत्र कभी राजा-महाराजाओं के दरबारों और शाही आयोजनों की शान हुआ करता था. समय के साथ म्यूजिक इंडस्ट्री में आए बदलाव के कारण इसका चलन कम होता गया, लेकिन आज भी कुछ पारंपरिक शादियों में इसकी धुन सुनाई दे जाती है.

भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा निवासी ईश्वर ने बताया कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से मशक बाजा बजाने का काम करता आ रहा है. इसे आम बोलचाल में पाइप बैंड या मशक बैंड भी कहा जाता है. यह वाद्य यंत्र काफी पुराना है और पहले के समय में शादियों व शाही दावतों में बजाया जाता था. जब शाहपुरा एक रियासत हुआ करता था, तब उनके पूर्वज इस वाद्य यंत्र को बजाते थे. अब बहुत कम लोग बचे हैं जो इसे बजाना जानते हैं, जिसके कारण यह कला धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है. वे जहां भी जाते हैं, लोगों को इस वाद्य यंत्र के बारे में बताते हैं और इसकी परंपरा को जीवित रखने की कोशिश करते हैं. साथ ही अपनी अगली पीढ़ी को भी इसे सिखा रहे हैं, ताकि यह विरासत आगे बढ़ सके.

कैसा होता है मशक बाजा

ईश्वर बताते हैं कि मशक बाजा एक खास तरह का वाद्य यंत्र होता है, जिसमें एक बड़ा थैला लगा होता है और उससे कई पाइप जुड़े होते हैं. इसे बजाने के लिए पहले थैले में हवा भरी जाती है, ठीक वैसे ही जैसे बांसुरी में फूंक मारकर आवाज निकाली जाती है. इसके बाद हाथ और मुंह की मदद से अलग-अलग सुर निकाले जाते हैं. पुराने समय में यह वाद्य यंत्र सांस्कृतिक कार्यक्रमों में खास स्थान रखता था. इसे गले में टांगकर बजाया जाता है और इससे निकलने वाली धुनें माहौल को अलग ही रंग दे देती हैं.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

न्यूजलेटर

अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज

खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में

सबमिट करें

Location :

Bhilwara,Bhilwara,Rajasthan

First Published :

April 27, 2026, 22:42 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj