Rajasthan

पाली का टेक्सटाइल हब क्यों हुआ खामोश… 10 हजार मजदूरों पर आया रोजी का संकट

पाली. राजस्थान के औद्योगिक मानचित्र पर चमकने वाला पाली का टेक्सटाइल हब, जहां कभी मशीनों की आवाज ही शहर की पहचान थी, वहां आज सन्नाटा पसरा है. औद्योगिक क्षेत्र के प्रथम और द्वितीय चरण की 48 टेक्सटाइल इकाइयां पिछले एक महीने से बंद पड़ी हैं. यह सिर्फ फैक्ट्रियों के बंद होने की खबर नहीं है, बल्कि उन करीब 10 हजार श्रमिकों की कहानी है, जिनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ा है.

रोज काम पर जाने वाले हाथ आज खाली हैं और परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहराता जा रहा है. उद्यमी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सीमित संसाधनों के चलते उत्पादन पूरी तरह ठप है. ऐसे में अब उम्मीद ‘ट्रीटमेंट प्लांट संख्या-7’ और 13.50 करोड़ रुपये के प्रस्तावित बजट से जुड़ी है, हालांकि सवाल यही है कि यह राहत जमीन पर कब नजर आएगी.

48 टेक्सटाइल इकाइयां बंद, व्यापार ठपपाली के औद्योगिक क्षेत्र में पिछले एक महीने से गतिविधियां लगभग थम सी गई हैं. 48 टेक्सटाइल इकाइयों के बंद होने से व्यापार पूरी तरह प्रभावित हुआ है. इसके साथ ही हजारों श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. अब इन उद्योगों का भविष्य और उनसे जुड़े परिवारों की उम्मीदें राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हुई हैं.

ठप हुई रफ्तार, श्रमिकों में बढ़ी चिंताप्रथम और द्वितीय चरण की इकाइयों के बंद होने से पूरे क्षेत्र की आर्थिक रफ्तार रुक गई है. फैक्ट्रियों में सन्नाटा पसरा है और वहां काम करने वाले श्रमिक अपने परिवार के पालन-पोषण को लेकर चिंतित हैं. कई मजदूर वैकल्पिक काम की तलाश में भटक रहे हैं. कुछ उद्यमी दूसरी इकाइयों से कपड़ा प्रोसेस करवाकर काम चलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सीमित क्षमता के कारण बाजार में आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है.

पाइपलाइन प्रोजेक्ट से जुड़ी उम्मीदबंद पड़ी इकाइयों को दोबारा शुरू करने के लिए हाल ही में जयपुर में रीको की बैठक में एक सहमति बनी है. उद्यमियों ने ट्रीटमेंट प्लांट संख्या-7 के निर्माण पर सहमति जताई है. अब सरकार से मिलने वाले 13.50 करोड़ रुपये के बजट पर सबकी नजर टिकी है, जिससे ट्रीटमेंट प्लांट संख्या-6 तक करीब 15 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जानी है. इस पाइपलाइन के जरिए फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी प्लांट तक पहुंचाकर उसका उपचार किया जाएगा.

सालों से अटका प्रोजेक्ट, निवेश भी फंसापाइपलाइन का यह प्रयास नया नहीं है. उद्यमियों ने साल 2017 में ही इसके लिए पहल की थी और सीईटीपी के लिए करीब 1.5 करोड़ रुपये भी जमा करवाए थे. इसके बावजूद प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से योजना आगे नहीं बढ़ पाई. अब उद्योगों पर आए संकट के बाद इस पुराने प्रोजेक्ट के फिर से शुरू होने की उम्मीद जगी है.

कंसेंट बहाली भी बनी बड़ी चुनौतीइकाइयों के बंद होने के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने उनकी पुरानी संचालन अनुमति भी निरस्त कर दी थी. अब उद्यमी इसे फिर से बहाल कराने में जुटे हैं. अगर पुरानी अनुमति वापस नहीं मिलती है, तो हर इकाई को नई कंसेंट लेने के लिए करीब 3 लाख रुपये खर्च करने होंगे. यह प्रक्रिया जयपुर स्थित प्रदूषण नियंत्रण मंडल से ही पूरी होगी, जो समय और खर्च दोनों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण है.

क्या है पूरा पाइपलाइन प्लानप्रस्तावित योजना के तहत नई पाइपलाइन को औद्योगिक क्षेत्र के प्रथम और द्वितीय चरण के नालों के सहारे निकाला जाएगा. रेलवे ट्रैक के पास भी मौजूदा नालों का उपयोग किया जाएगा. इसके बाद पाइपलाइन आरटीओ कार्यालय और पुनायता गांव होते हुए प्लांट नंबर छह तक पहुंचेगी. आगे इसे पुनायता औद्योगिक क्षेत्र की मौजूदा पाइपलाइन से जोड़ा जाएगा, जिससे प्रदूषण निस्तारण की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके.

सरकारी मंजूरी का इंतजारपाली औद्योगिक क्षेत्र प्रथम और द्वितीय चरण के सचिव विकास चौधरी के अनुसार, पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव उद्योग विभाग को भेजा जा चुका है. विभाग ने इसे स्वीकृत भी कर दिया है, लेकिन अंतिम मंजूरी के लिए फाइल फिलहाल सरकार के पास लंबित है. अब आने वाले समय में सरकार का फैसला ही तय करेगा कि बंद पड़ी इकाइयों में फिर से रौनक लौटेगी या नहीं.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj