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सोशल मीडिया चैट से टूटी शादी, फैमिली कोर्ट का बड़ा फैसला, पति को दी तलाक की डिक्री, पढ़ें पूरी कहानी

Last Updated:May 01, 2026, 09:53 IST

Jaipur News : सोशल मीडिया पर की गई उल-जुलूल हरकत आपके शादी जैसे पवित्र रिश्ते पर भारी पड़ सकती है. ऐसा ही एक मामला जयपुर में सामने आया है. जयपुर की फैमिली कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में पति-पत्नी के तलाक को मंजूरी दे दी है. कोर्ट ने कहा कि विवाह में विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी सर्वोपरि हैं. इसका ख्याल रखा जाना चाहिए.अदालत ने डिजिटल युग में सावधानी बरतने की चेतावनी देते हुए कहा कि सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव वैवाहिक जीवन को खतरे में डाल रहा है. सोशल मीडिया चैट से टूटी शादी, पति को दी तलाक की डिक्री, पढ़ें पूरी कहानीZoomअदालत ने यह माना कि पत्नी पति पर उसके माता-पिता से अलग रहने का दबाव बना रही थी. कोर्ट ने इसे बिना उचित कारण मानसिक क्रूरता माना.

जयपुर. राजधानी जयपुर की फैमिली कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया है कि सोशल मीडिया पर किया गया व्यवहार वैवाहिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है. जयपुर के पारिवारिक न्यायालय क्रम संख्या (एक) की न्यायाधीश आरती भारद्वाज ने ऐसे ही एक मामले में अपने आदेश में कहा कि यदि कोई विवाहित महिला किसी अन्य पुरुष के साथ आपत्तिजनक फोटो खिंचवाकर उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करती है तो यह पति के प्रति मानसिक क्रूरता माना जाएगा. कोर्ट ने इसी आधार पर पति को तलाक की डिक्री दे दी है.

पीड़ित पति की ओर से पैरवी करने वाले न्यायमित्र डीएस शेखावत ने बताया कि यह मामला एक दंपति के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद से जुड़ा है. पति ने याचिका दायर कर पत्नी के व्यवहार को मानसिक उत्पीड़न बताते हुए तलाक की मांग की थी. पति का आरोप था कि पत्नी ने वैवाहिक जिम्मेदारियों की अनदेखी की और उसके आत्मसम्मान व सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई. अदालत ने साक्ष्यों और दस्तावेजों का अध्ययन कर पाया कि पति के आरोप निराधार नहीं हैं.

पत्नी पति पर उसके माता-पिता से अलग रहने का दबाव बना रही थीसुनवाई के बाद कोर्ट ने अपने फैसले में विशेष रूप से सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई तस्वीरों को गंभीर माना और कहा कि इस तरह का सार्वजनिक व्यवहार जीवनसाथी के लिए मानसिक पीड़ा का कारण बन सकता है. अदालत ने यह माना कि पत्नी पति पर उसके माता-पिता से अलग रहने का दबाव बना रही थी. कोर्ट ने इसे बिना उचित कारण मानसिक क्रूरता माना. इसके अलावा पत्नी की ओर से की गई गाली-गलौज और अपमानजनक भाषा के उपयोग को भी अदालत ने गंभीरता से लिया.

सोशल मीडिया पर पोस्ट मानसिक पीड़ा का कारण बनाइस पूरे मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि पहले दोनों ने आपसी सहमति से याचिका दायर की थी. लेकिन बाद में पत्नी ने बिना किसी ठोस कारण सहमति वापस ले ली. उसे भी अदालत ने अनुचित माना. सभी तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए तलाक मंजूर कर लिया. पारिवारिक न्यायालय ने अपने फैसले में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि पत्नी की ओर से अन्य पुरुष के साथ फोटो खिंचवाना और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करना पति के लिए मानसिक पीड़ा का कारण बना है.

विवाह संबंधों में विश्वास और निष्ठा सर्वोपरि होते हैंअदालत ने कहा कि विवाह एक ऐसा संबंध है जिसमें विश्वास और निष्ठा सर्वोपरि होते हैं. यदि कोई पक्ष ऐसा व्यवहार करता है जिससे दूसरे पक्ष की भावनाएं आहत होती हैं और समाज में उसकी प्रतिष्ठा प्रभावित होती है तो उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री का प्रभाव केवल निजी नहीं बल्कि सार्वजनिक होता है. इसलिए ऐसे मामलों में जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है.

About the AuthorSandeep Rathore

संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…और पढ़ें

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