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Cotton Sowing Advisory | कपास बुवाई एडवाइजरी खैरथल-तिजारा | Khairthal-Tijara Cotton Sowing Targets and Farmers Advisory

Last Updated:May 01, 2026, 08:07 IST

Alwar Agriculture News: खैरथल-तिजारा जिले में 15 अप्रैल से कपास की बुवाई शुरू हो गई है, जिसका लक्ष्य इस बार 6000 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है. सहायक कृषि निदेशक राजेंद्र बसवाल ने किसानों को उन्नत किस्म के बीजों का उपचार कर डिबलिंग विधि से बुवाई करने की सलाह दी है. बेहतर उत्पादन के लिए खेतों की गहरी जुताई, गोबर की खाद का उपयोग और पूर्व-पश्चिम दिशा में कतारें रखने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही, दीमक और कीट नियंत्रण के लिए विशेष कीटनाशकों के प्रयोग की एडवाइजरी जारी की गई है.

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Alwar Agriculture News: खैरथल-तिजारा जिले में कपास की बुवाई का कार्य 15 अप्रैल से प्रारंभ हो चुका है, जो मई माह के अंतिम सप्ताह तक निरंतर जारी रहने की संभावना है. इस बार कृषि विभाग ने जिले में 6000 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास बोने का लक्ष्य निर्धारित किया है. यदि पिछले सीजन की तुलना करें, तो विभाग ने 10,000 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा था, जिसके विरुद्ध 8594 हेक्टेयर में ही वास्तविक बुवाई हो सकी थी. सहायक कृषि निदेशक राजेंद्र बसवाल के अनुसार, कपास का रकबा लगातार घटने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं, जिनमें किसानों को बाजरा और प्याज के बेहतर दाम मिलना, पानी की भारी कमी और फसलों में रोगों का बढ़ता प्रकोप शामिल है.

बेहतर पैदावार सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग ने किसानों को उन्नत किस्म के बीजों का चयन करने और उन्हें उपचारित करने की सलाह दी है. बुवाई से पहले खेतों की गहरी जुताई करना अनिवार्य बताया गया है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है. साथ ही, खेत में देशी गोबर की खाद का उपयोग करना फसल के लिए अत्यंत फायदेमंद रहता है. दीमक की समस्या वाले क्षेत्रों में विशेषज्ञों ने प्रति किलो बीज को 10 एमएल क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी और 10 एमएल पानी के मिश्रण से उपचारित करने का निर्देश दिया है. इस प्रक्रिया के बाद बीज को अच्छी तरह मिलाकर करीब 30-40 मिनट तक छाया में सुखाकर ही बुवाई करनी चाहिए.

उन्नत बुवाई तकनीक और सिंचाई प्रबंधनपैदावार बढ़ाने के लिए विभाग ने डिबलिंग विधि से बुवाई करने की विशेष सलाह दी है. इसमें कतार से कतार की दूरी 108 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 60 सेमी रखने का सुझाव दिया गया है. एक रोचक तथ्य यह भी साझा किया गया है कि पूर्व से पश्चिम दिशा की कतारों में बोई गई कपास, उत्तर से दक्षिण दिशा की तुलना में अधिक उत्पादन देती है. सिंचाई के संबंध में बताया गया है कि फसल के बेहतर विकास के लिए पहली सिंचाई बुवाई के ठीक 15 दिन बाद कर देनी चाहिए.

उर्वरक और कीट नियंत्रणकपास की फसल में उर्वरक और कीट प्रबंधन के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए गए हैं:

उर्वरक: प्रति बीघा 37.5 किलोग्राम नत्रजन के साथ बुवाई के समय 10 किलोग्राम पोटाश और फॉस्फोरस का प्रयोग करें.
दीमक नियंत्रण: दीमक लगने की स्थिति में क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी दवा को 4-5 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोलकर जड़ों के पास ड्रेंचिंग करनी चाहिए.
रोग नियंत्रण: ब्लाइट जैसे रोगों के लिए 30-32 ग्राम मैंकोजेब दवा को 15 लीटर पानी की टंकी में मिलाकर छिड़काव करें.
रस चूसक कीट: जेसिड और एफिड जैसे कीटों के लिए कुनाल फोर्स 25 ईसी का 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी के हिसाब से उपयोग करें.
About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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