फेस वॉश, सनस्क्रीन को भूल जाओ… गर्म हवाओं से बचने का ये है नायाब देसी जुगाड़!

Last Updated:May 01, 2026, 22:31 IST
Garmi Me Desi Jugaad: भीषण गर्मी में ग्रामीण इलाकों में सूती फंटा लू से बचाव का सस्ता और भरोसेमंद साधन है. यह किसान, मजदूर, राहगीर और शादियों में पगड़ी के रूप में भी लोकप्रिय है. राहगीर महेंद्र बताते हैं कि फंटा गांवों में लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा है और लू से बचने के लिए यह सबसे कारगर उपायों में से एक है. उन्होंने कहा कि जब भी महिलाएं, बच्चे या बुजुर्ग घर से बाहर निकलते हैं, तो सिर पर फंटा बांधकर ही निकलते हैं.
जोधपुर. भीषण गर्मी और लू के प्रकोप के बीच ग्रामीण इलाकों में आज भी पारंपरिक ‘फंटा’ लोगों के लिए राहत का बड़ा सहारा बना हुआ है. सिर और माथे को ढकने के लिए इस्तेमाल होने वाला फंटा गर्म हवाओं से बचाने के साथ शरीर को ठंडक देने में भी मददगार माना जाता है. खासतौर पर गांवों में किसान, मजदूर और राहगीर इसका ज्यादा उपयोग करते हैं. सूती कपड़े से बना यह फंटा सफेद, हरा, बैंगनी समेत कई रंगों में मिलता है और गर्मी से बचाव का आसान व असरदार साधन माना जाता है.
गर्मी से बचाव का आसान और असरदार तरीकाराहगीर महेंद्र ने बताया कि फंटा गांवों में लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा है और लू से बचने के लिए यह सबसे कारगर उपायों में से एक है. उन्होंने कहा कि जब भी महिलाएं, बच्चे या बुजुर्ग घर से बाहर निकलते हैं, तो सिर पर फंटा बांधकर ही निकलते हैं, जिससे तेज धूप और गर्म हवा का असर काफी कम हो जाता है. खेतों में काम करने वाले लोगों के लिए भी यह बेहद उपयोगी है, क्योंकि सिर ढका रहने से गर्मी का असर कम महसूस होता है.
परंपरा और पहचान से जुड़ा है फंटाजय सिंह चारण ने बताया कि फंटा केवल गर्मी से बचाव का साधन नहीं, बल्कि हमारी परंपरा और पहचान का भी हिस्सा है. अलग-अलग क्षेत्रों में इसे अलग नामों से जाना जाता है, जैसे हरियाणा में गमछा और राजस्थान में फंटा या साफा. उन्होंने कहा कि यह लू से बचाव के साथ-साथ कान और सिर की सुरक्षा भी करता है. शादियों और खास मौकों पर यही फंटा पगड़ी के रूप में सम्मान और शान का प्रतीक बन जाता है.
विशेषज्ञों के अनुसार सिर को ढककर रखने से लू लगने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है. ग्रामीणों का मानना है कि आधुनिक दौर में छाते और अन्य साधन जरूर आ गए हैं, लेकिन फंटा आज भी सबसे भरोसेमंद उपाय बना हुआ है. तेज गर्मी के बीच पारंपरिक ज्ञान और घरेलू उपायों की उपयोगिता आज भी बरकरार है और फंटा इसका एक सशक्त उदाहरण है.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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