Rajasthan

पैसे देकर पास होने का खेल बेनकाब… SOG ने पकड़ा डमी अभ्यर्थियों का गिरोह, तीन मामलों ने खोली पूरी सच्चाई

Last Updated:May 02, 2026, 18:58 IST

Jaipur Recruitment Exam Dummy Scandal: जयपुर में SOG ने भर्ती परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थी बैठाने वाले संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ कियाहै. इस मामले में पता चला कि तीन केस, जिनमें नौकरी दिलाने की बात कती गई थी. उसमें लाखों की डील हुई थी. मामले में कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. एसओजी की टीम पूरे मामले की जांच कर रही है. SOG ने साफ संकेत दिया है कि भर्ती परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.पैसे देकर पास होने का खेल बेनकाब... SOG ने पकड़ा डमी अभ्यर्थियों का गिरोह!Zoomराजस्थान में एसओजी की बड़ी कार्रवाई

जयपुर. जयपुर से आई इस खबर ने एक बार फिर भर्ती परीक्षाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामला छोटा नहीं है, बल्कि एक पूरे खेल की तरफ इशारा करता है, जिसमें पैसे देकर किसी और को अपनी जगह परीक्षा में बैठाया जा रहा था. स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप यानी SOG की कार्रवाई में तीन अलग-अलग मामलों का खुलासा हुआ है, लेकिन तरीका लगभग एक जैसा ही निकला. यहां असली अभ्यर्थी खुद ही डमी को लाते थे और लाखों रुपये देकर पेपर दिलवाते थे.

जांच में जो बात सामने आई, वो थोड़ा चौंकाने वाली है. कई अभ्यर्थियों को खुद पर भरोसा नहीं था, इसलिए उन्होंने तैयारी करने की जगह शॉर्टकट चुना. ज्यादा पढ़े-लिखे या तैयार लोग ढूंढे गए और उन्हें पैसे देकर परीक्षा में बैठा दिया गया. इस पूरे खेल में सिर्फ दो लोग नहीं, बल्कि बीच में डील कराने वाले भी शामिल थे. SOG के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने साफ कहा कि यह संगठित नेटवर्क की तरह काम कर रहा था.

तीन केस, एक जैसा तरीका, लाखों का खेलपहला मामला राजस्थान लोक सेवा आयोग की प्राध्यापक हिन्दी परीक्षा-2022 से जुड़ा है. जालौर के मनोहर लाल ने देराम नाम के अभ्यर्थी की जगह परीक्षा दी. जांच में पता चला कि करीब 5 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था. देराम को अपनी तैयारी पर भरोसा नहीं था, इसलिए उसने यह रास्ता चुना. दोनों की पहचान जोधपुर की एक कोचिंग में हुई थी. मनोहर लाल ने एडमिट कार्ड में फोटो बदलकर और उपस्थिति पत्रक में हेरफेर कर परीक्षा दी. फिलहाल मनोहर लाल गिरफ्तार हो चुका है, जबकि देराम अभी फरार बताया जा रहा है.

दूसरा मामला भी इसी परीक्षा से जुड़ा हुआ है. यहां फलौदी के अशोक जानी को डमी अभ्यर्थी के रूप में पकड़ा गया. असली अभ्यर्थी रामूराम, जो भूतपूर्व सैनिक है, उसने कम मेरिट का फायदा लेने की योजना बनाई. उसने करीब 7.5 लाख रुपये में अशोक जानी से डील की. इस केस में भी एडमिट कार्ड और दस्तावेजों में फोटो और साइन बदले गए. रामूराम को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था और उसके खिलाफ चालान भी पेश किया जा चुका है.

तीसरा मामला राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की शारीरिक शिक्षक भर्ती-2022 परीक्षा से सामने आया. यहां जालौर के सुनील ने विमल कुमार पाटीदार की जगह परीक्षा दी. इस पूरे सौदे में जयपुर में रहने वाला अनिल विश्नोई अहम कड़ी बना. करीब 6 लाख रुपये में डील तय हुई थी, जिसमें 1.5 लाख रुपये एडवांस दिए गए. SOG ने सुनील और अनिल विश्नोई दोनों को गिरफ्तार कर लिया है.

तकनीक से पकड़ा गया खेल, आगे और खुलासे संभवइन मामलों में सबसे मुश्किल काम डमी अभ्यर्थियों की पहचान करना था, क्योंकि कागजों में बहुत बारीकी से बदलाव किए गए थे. लेकिन SOG ने खास सॉफ्टवेयर और नई जांच तकनीक का इस्तेमाल कर इस खेल को पकड़ लिया. धीरे-धीरे कड़ी जुड़ती गई और तीनों केस सामने आ गए.

तीनों मामलों में IPC की कई धाराओं के साथ राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम-2022 और IT एक्ट-2008 के तहत केस दर्ज किया गया है. जांच एएसपी तरुण सोमानी की देखरेख में चल रही है. अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क और बड़ा हो सकता है, इसलिए बाकी लोगों की भी तलाश जारी है. SOG ने साफ संकेत दिया है कि भर्ती परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. आने वाले समय में ऐसे मामलों पर और सख्ती देखने को मिल सकती है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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